श्रीनगर में आतंकी हमले शहीद हुए सेना के जवान रतन सिंह को शुक्रवार को हजारों लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर रतन सिंह अमर रहे और भारत माता की जय के नारों के साथ अंतिम विदाई दी। शहीद को अंतिम संस्कार पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव साढ़ माहोर में किया गया। शहीद की अंतिम यात्रा में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ के साथ सेना, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।
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शहीद जवान को सलामी देते हुए सेना व पुलिस के जवान
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर को 12.30 बजे शहीद रतन सिंह का पार्थिव शरीर पैतृक गांव साढ़ में पहुंचा। जवान का पार्थिव शरीर घर पर पहुंचते ही पूरे इलाके में चीखो-पुकार मच गई। इलाके के हर व्यक्ति की आंखों में आंसू थे। शहीद जवान के पार्थिव शरीर को जैसे की घर के अंदर लाया गया, शहीद की मां और वीरांगना बेसुध हो गईं। शहीद के बच्चे भी टकटकी लगा करके पिता के शव को निहारते रहे।
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विलाप करते शहीद जवान के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
लगभग दो घंटे तक घर में अंतिम रस्में पूरी करने के बाद शहीद का तिरंगे से लिपटा शव बाहर लाया गया। शव के बाहर आते ही रतन सिंह अमर रहे और भारत माता की जय के नारों से समूचा क्षेत्र गूंज उठा। हर कोई शहीद की अंतिम यात्रा में शव को कंधा देने के लिए आगे बढ़ा। कुछ दूर तक पैदल चलने के बाद शहीद का शव सैन्य वाहन में पैतृक श्मशान घाट पहुंचाया गया।
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मुखाग्नि देता शहीद का बेटा
- फोटो : अमर उजाला
मौके पर सेना और पुलिस के जवानों ने पूरे सम्मान से अंतिम सलामी दी। शहीद के बड़े बेटे सात वर्षीय अमित सिंह ठाकुर पिता को मुखाग्नि दी। सेना के कमांडिंग ऑफिसर ने शहीद के शव से लिपटा तिरंगा पिता धनी राम को सौंपा और सांत्वना देते हुए कहा कि रतन सिंह की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता है। शहीद की अंतिम यात्रा में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हुए।
विलाप करती हुई शहीद रतन सिंह की मां
- फोटो : अमर उजाला
...हम तो जीते जी मर गए, मुझे ही उठा लेता तो भगवान
उधर, शहीद जवान की वीरांगना नीलम देवी का भी रो-रो कर बुरा हाल था। बार-बार बेसुध हो रही थीं। आसपास से आए रिश्तेदार और महिलाएं उनको बार-बार संभाल रही थी। वीरांगना बोलीं कि हम तो अब जीते जी मर गए हैं, भगवान उनके बजाय मुझे उठा लेता तो ठीक था। वहीं, शहीद की बेटी दीपिका ठाकुर ने पिता के गले में फूलों का हार डालकर नम आंखों से विदाई दी।