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Kashmir: घाटी में दीवाली पर अब्दुल के दीयों से जगमग होंगे हिंदुओं के घर, देखें तस्वीरें

Tue, 18 Oct 2022 12:01 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर

सार

दिवाली के नजदीक आने के साथ कश्मीर के रहने वाले अब्दुल स्लाम परिवार सहित कश्मीर में दम तोड़ रही मिट्टी के बर्तनों की कला को पुनर्जीवित करने की कोशिश में लगे हैं।
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Kashmir Diwali - फोटो : बासित जरगर
दिवाली के नजदीक आने के साथ कश्मीर के रहने वाले अब्दुल स्लाम परिवार सहित कश्मीर में दम तोड़ रही मिट्टी के बर्तनों की कला को पुनर्जीवित करने की कोशिश में लगे हैं। वह पूरे जोश के साथ मिट्टी के दीये बनाने में जुटे हुए हैं। कि सदियों पुराने शिल्प को पुनर्जीवित करना एक कठिन चुनौती है, लेकिन वह हार नहीं मानने वाले हैं।
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Srinagar Diwali 2022 - फोटो : बासित जरगर
उनका बेटा उमर भी पिता की मदद कर रहा है। उमर ने कहा कि दीवाली के त्योहार के लिए ‘मिट्टी का दीपक’ आशा के साथ-साथ पैसा भी लाएगा। उन्होंने बताया कि उन्हें कुलगाम के एक डीलर से दीवाली के लिए 15,000 दीयों का ऑर्डर मिला है। उन्हें त्योहार से पहले दीयों का वितरण किया जाना उमर ने कहा कि डीलर को ऑर्डर समय पर पहुंचाना समय के ही खिलाफ  एक दौड़ है। हालांकि वह इसमें जल्दबाजी नहीं कर सकता। यह एक कला है। यह सुनिश्चित करना है कि उत्पाद बिल्कुल ठीक है।
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Srinagar Diwali - फोटो : बासित जरगर
उन्होंने कहा कि ग्लेजेड पॉटरी, जिसे ‘दाल गेट पॉटरी’ के नाम से जाना जाता है, कश्मीर के लिए अद्वितीय है। मूल रूप से गहरे हरे, नीले, भूरे और गेरू में चमकता हुआ टाइल ही घाटी में बनाया जाता था। यह शिल्प बाद में टेबलवेयर और फूलदानों में विभाजित हो गया। लाल, हरे और नीले रंग के ग्लेज में बनाया गया। उन्होंने बताया कि वह हजरतबल इलाके में अपनी दुकान पर दीये भी बेचता था। उसने अपने पिता और भाई को भी व्यापार में लगाया है। उमर ने कहा कि यह ऑर्डर हमारे परिवार के लिए बड़ा ऑर्डर है।

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Kashmir Diwali 2022 - फोटो : बासित जरगर
कभी इस कला से जुड़े थे 500 परिवार, अब मात्र 50
उन्होंने कहा कि शहर में कभी 500 से अधिक परिवार इस काम में लगे हुए थे जो अब घटकर लगभग 50 हो गया है। वह और अधिक परिवारों को शामिल करने की पूरी कोशिश कर रहा है। अब तक वह छह परिवारों को वापिस इस काम में लाने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर समर्थन मिलना चाहिए। उमर ने मिट्टी के बर्तनों की कला किसी पुराने व्यक्ति से सीखी। उन्होंने न केवल अपने परिवार को शिल्प में शामिल किया है, बल्कि वे कुछ युवाओं को यह कला सिखाते भी हैं।
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Diwali 2022 - फोटो : बासित जरगर
बाजार में मिट्टी के बर्तनों की मांग
उमर का परिवार पिछले कई वर्षों से मिट्टी के बर्तनों का काम कर रहा है, लेकिन उन्होंने पिछले साल एक अलग क्षेत्र में उतरने के लिए खुद को तैयार किया। इसमें वह अन्य चीजें भी बनाने लगे जैसे की सजावटी वस्तु आदि। कहा कि बाजार में चमकते हुए मिट्टी के बर्तनों की मांग भी है और आवश्यकता भी, लेकिन अकेले उनके लिए इस मांग को पूरा करना मुश्किल हो गया है।
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