फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उरी हमलाः तीन साल पहले जब आतंकियों ने दिया था कभी न भूलने वाला जख्म

Wed, 18 Sep 2019 03:36 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
1 of 7
उरी हमला - फोटो : फाइल, अमर उजाला
उरी हमले को तीन साल हो चुके है। जले हुए बैरक आज भी उस दिन की याद को ताजा करा रहे हैं। 18 सितंबर 2016 के बाद से इस बैरक और यहां के आसपास के लोगों की पूरी जिंदगी बदल चुकी हैं। उरी में चलने वाली गाड़ियों को आज भी मॉनिटर किया जा रहा है जबकि रात में उस इलाके से आम लोगों का गुजरना मना है। इस हमले में 19 सैनिक शहीद हुए थे। पीओके से सटी उरी तहसील आज भी हमले की उस त्रासदी से उबर नहीं पाई है। 

 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 7
उरी हमला - फोटो : फाइल, अमर उजाला
उत्तरी कश्मीर के उरी सेक्टर में 18 सितंबर 2016, रविवार सुबह भारी मात्रा में हथियारों से लैस आतंकियों ने सेना के 12 इनफैंट्री ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला किया था। उरी हमले को तीन साल भले ही बीत चुका है लेकिन उरी तहसील और आसपास रहने वाले करीब 30,000 लोगों की जिदंगी प्रभावित हुई है। वैसे तो आर्मी ने इस पूरे इलाके में काफी ढील दे दी है फिर भी 25 गांवों को जोड़ने वाला उरी संतरा माइक रोड आज भी शाम 6 बजते ही बंद कर दिया जाता है। गांव वाले या शहर वाले जो जहां हैं वहीं रुक जाते हैं। 
विज्ञापन

3 of 7
उरी हमले में शहीद जवान - फोटो : फाइल, अमर उजाला
19 सैनिक मारे गए थे इस आतंकी हमले में
पीओके से निकलकर 4 आतंकी सलमाबाद नाले (झेलम नदी) के रास्ते उरी सेक्टर में पहुंचे। आतंकियों के पास भारी मात्रा में असलहा और ग्रेनेड मौजूद थे। इस बार भी आतंकियों ने पठानकोट हमले की तर्ज पर हमला करने की प्लानिंग की थी। पठानकोट में भी आतंकी नालों के रास्ते घुसपैठ करके भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे।

 

4 of 7
उरी हमला - फोटो : फाइल, अमर उजाला
सुबह करीब सवा पांच बजे आतंकियों ने उरी की आर्मी यूनिट में स्थित प्रशासनिक बेस कैंप के पिछले हिस्से पर पहला हमला किया था। कुछ ऐसे ही जनवरी 2016 में पठानकोट स्थित एयरफोर्स बेस पर हमला किया गया था। वहां भी सुबह के वक्त ही आतंकी एयरफोर्स स्टेशन में दाखिल हुए थे। उरी में भी आतंकियों का दस्ता आत्मघाती था, जिसका मकसद सेना को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना था।
विज्ञापन

5 of 7
उरी हमला - फोटो : फाइल, अमर उजाला
उरी के प्रशासनिक बेस की इस इमारत में सेना की अलग-अलग यूनिट के जवान थे, इनमें कुछ अपनी ड्यूटी बदल रहे थे। वहीं डोगरा रेजीमेंट के कई जवान इमारत के पास के तंबुओं में सो रहे थे, जो कि पिछली रात अपनी ड्यूटी पूरी करके वापस लौटे थे। 
विज्ञापन

6 of 7
उरी हमले में आतंकियों से बरामद हथियार - फोटो : फाइल, अमर उजाला
आग लगने के बाद सोते हुए जवानों को संभलने का कोई मौका नहीं मिल सका था
आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला कर सेना के इन्हीं तंबुओं में आग लग दी थी। आग लगने के बाद सोते हुए जवानों को संभलने का कोई मौका नहीं मिल सका था जिसके कारण बड़ी संख्या में जवान घायल हो गए थे। सेना के तत्कालीन डीजीएमओ के मुताबिक 12 से 13 जवानों की मौत तो सिर्फ आग की वजह से हुई थी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
उरी हमले में शहीद जवान - फोटो : फाइल, अमर उजाला
आतंकी बड़ी मात्रा में हथियारों से लैस थे जिससे अंदाजा लगाया गया था कि पठानकोट की तर्ज पर ब्रिगेड मुख्यालय में काफी नुकसान करने की प्लानिंग थी। लेकिन कुशल रणनीति के चलते आर्मी और पैरा कमांडोज ने कुछ ही घंटों में चारों आतंकियों को ढेर कर दिया था। इसके बाद सेना के ब्रिगेड मुख्यालय और आसपास के इलाकों में सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप द्वारा सर्च ऑपरेशन भी चलाया गया था। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें