जम्मू-कश्मीर बोर्ड के स्कूली बच्चों को अब अपने अंकपत्र, माइग्रेशन प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज के लिए स्कूल और बोर्ड के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (जेकेबोस) छात्रों को उनके जरूरी दस्तावेज डिजिलॉकर से उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए बोर्ड ने नेशनल अकादमी डिपॉजिटरी के साथ एमओयू साइन किया है। ये एजेंसी भारत सरकार की है जो इसे तैयार कर रही है। कोरोना कॉल में डिजिलॉकर जैसी सुविधाओं का महत्व और बढ़ जाता है। बच्चों या अभिभावकों को अंकपत्र, माइग्रेशन, प्रमाण पत्र या अन्य जरूरी दस्तावेजों के लिए बेवजह स्कूलों का चक्कर लगाना नहीं पड़ेगा। जम्मू व कश्मीर संभाग के सभी स्कूलों के लिए इस सुविधा को शुरू किया जा रहा है। नेशनल अकादमी डिपॉजिटरी के साथ एमओयू साइन हो गया है और एजेंसी ने इसको लेकर काम भी शुरू कर दिया है। हालांकि, कोविड के करण कार्य में थोड़ी देर हो सकती है।
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डिजिटल लॉकर के जरिए दस्तावेज उपलब्ध होने पर कोरोना संक्रमण या सामान्य हालात में भी छात्रों और अभिभावकों को अंकपत्र, प्रमाण पत्र के लिए स्कूल नहीं जाना पड़ेगा। इससे स्कूल एवं छात्रों की परेशानी कम होगी। छात्र-छात्राएं आधार, बोर्ड में पंजीकृत मोबाइल नंबर अथवा फेस मैचिंग तकनीक के जरिए डिजिटल लॉकर का इस्तेमाल कर सकेंगे।
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परीक्षा
- फोटो : पिक्साबे
दसवीं के प्रमाण डिजिटल लॉकर से हो सकेंगे उपलब्ध
जेके बोर्ड की ओर से दसवीं के परीक्षार्थियों का रिजल्ट परीक्षा रद्द होने से पहले तक हुए पेपर के आधार पर जारी किया जाएगा, जबकि बारहवीं की परीक्षा पर अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
बोर्ड छात्रों के अंकपत्र, प्रमाण पत्र, माइग्रेशन प्रमाण पत्र के साथ दूसरे प्रमाण पत्र डिजिटल लॉकर से उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। सीबीएसई ने भी डिजिलॉकर से दस्तावेज उपलब्ध करवाने का फैसला लिया है। अब बोर्ड भी इसको लेकर तैयारी शुरू कर रहा है।
बच्चों को डिजिलॉकर से अंकपत्र सहित अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए बोर्ड काम कर रहा है। बोर्ड ने नेशनल अकादमी डिपॉजिटरी के साथ एमओयू साइन किया है। ये राष्ट्रीय एजेंसी इस तरह की सुविधा मुहैया करवाती है। कोरोना के कारण इसके कार्य में थोड़ी देरी हुई है, लेकिन जल्द छात्रों को ये सुविधा मिलनी शुरू होगी। - वीणा पंडिता, चेयरमैन, जेके बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन