फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फादर्स-डे पर भारी कोरोना के जख्म: पढ़िए महामारी की दूसरी लहर में पिता को खो चुके बच्चों का दर्द

Sun, 20 Jun 2021 04:46 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
1 of 6
फादर्स-डे पर भारी कोरोना के जख्म - फोटो : अमर उजाला
कोरोना की दूसरी लहर में अपने पिता को खो चुके जम्मू शहर में शिव नगर तालाब तिल्लो निवासी अजीत सिंह ने फादर्स-डे पर जरूरतमंदों की मदद करके अपने पिता को श्रद्धांजलि दी। वह बताते हैं कि उनके पिता दिव्यांग थे। इसके बावजूद उसे और भाई को एक हाथ से साइकिल चलाकर स्कूल छोड़ने और लेने जाते थे। बचपन में दोनों भाइयों को साइकिल भी सिखाई।

अजीत ने बताया कि गत 27 अप्रैल को कोरोना से संक्रमित उनके पिता स्व. जोगेंद्र सिंह (78) को ऑक्सीजन की कमी होने पर सीडी और जीएमसी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दोनों ही जगह समय पर ऑक्सीजन न मिलने से उनकी मौत हो गई। पिता के साथ परमात्मा की तरह लगाव था। पिछले फादर्स-डे पर उन्हें पैंट कोर्ट दिया था जो आज भी मेरे पास है और पिता जी की याद दिलाता है। संक्रमण में अपनों को खोने का उन्हें जिंदगी भर मलाल रहेगा। हालांकि अपने पिता की मौत के लिए अजीत स्वास्थ्य विभाग की ढुलमुल कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराते हैं।
विज्ञापन

2 of 6
फादर्स-डे पर भारी कोरोना के जख्म - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करके हम इस बीमारी से बच सके हैं। अस्पतालों के प्रति आम लोगों के विश्वास को बढ़ाया जाए। खासतौर पर कोरोना वार्डों में वरिष्ठ डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित बनाई जाए, ताकि अधिक लोगों को बचाया जा सके।

 
विज्ञापन

3 of 6
जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : बासित जरगर
पिता और सबसे अच्छे दोस्त की कमी खल रही
चिनैनी में सत्यालता बरमीन के रहने वाले विशाल सिंह कोरोना काल में अपने पिता पुरुषोत्तम सिंह को खो चुके हैं। विशाल कहते हैं पिता उनके सबसे अच्छे दोस्त भी थे। फादर्स-डे मनाने की परंपरा तो नहीं रही है लेकिन वे हर साल इस दिन पर पिता को शुभकामनाएं और बधाई संदेश जरूर देते थे। विशाल ने बताया कि बीते वर्ष फादर्स-डे पर पिता के साथ कई फोटो खिंचवाईं थीं। महामारी ने पिता को उनसे छीन लिया है। विशाल ने कहा कि पिता उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा थे। वे पिता की कमी को हर रोज महसूस करते हैं लेकिन इस बार पितृ दिवस पर उनकी कमी बहुत खल रही है।

 

4 of 6
जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : बासित जरगर
इकलौते बेटे के साथ चले गए पितृ दिवस के मायने
हीरानगर के दियाला चक में जगन्नाथ सुंदन को जब इकलौता बेटा विशाल पांव छूकर पितृ दिवस की बधाई देता तो उनके लिए यह पल सबसे खास बन जाता। कोरोना काल ने विशाल को हमेशा के लिए उनसे छीन लिया। जगन्नाथ सुंदन कहते हैं कि बच्चे जब ऐसे मौकों पर अभिभावकों को बधाई व शुभकामना संदेश देकर आशीर्वाद लेते हैं तो मां-बाप सब कुछ उन पर वार देते हैं। कोरोना महामारी में बेटे को खो देने से पितृ दिवस की खुशियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं। 

 
विज्ञापन

5 of 6
जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : बासित जरगर
पिता की यादों के साथ रोहित और खुशी मनाएंगे फादर्स-डे 
दोमाना में मढ़ क्षेत्र के कल्याणपुर गांव के रहने वाले रोहित और खुशी शर्मा ने बताया कि बीते साल फादर्स-डे पर उन्होंने पूरा दिन पिता (राजकुमार) के साथ बिताया था। पिता ने उन्हें खाने-पीने की चीजें भी लाकर दीं। खुशी ने बताया कि पिछली बार वह पिता की गोद में सोई थी। इस बार उनके पिता तो साथ नहीं, लेकिन उनकी यादें हमेशा साथ रहेंगी। फादर्स-डे पर उनको बीते साल पिता के साथ बिताए पल याद आएंगे। वे उन्हीं यादों के साथ पिता की फोटो को देखकर यह दिन मनाएगी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : बासित जरगर
राजकुमार एक प्राइवेट स्कूल में ड्राइवर थे। इस साल 18 मई को कोराना के कारण उनकी मौत हो गई। बेटा रोहित (13) 8वीं में और बेटी खुशी (10) चौथी कक्षा की छात्रा है। रोहित और खुशी ने बताया कि उनके पिता उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाकर सरकारी नौकरी करवाना चाहते थे। पिता के चले जाने के बाद सब कुछ बिखर गया है। हमें भविष्य की चिंता है। आगे की पढ़ाई कैसे होगी, घर का खर्च कैसे चलेगा। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें