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कश्मीरः हालात का शिकार हुई शिकारा, लोग बोले...कैसे चलेगा घर-परिवार, देखिए तस्वीरें

Sun, 11 Aug 2019 03:33 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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पर्यटन उद्योग कश्मीर
कश्मीरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाने वाले पर्यटन उद्योग को जबरदस्त झटका लगा है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े टैक्सी ऑपरेटर निराश हैं। उनका मानना है कि घाटी में हालात सामान्य होने और पर्यटकों की वापसी तक उनका व्यवसाय प्रभावित ही रहेगा। फिलहाल उन्हें अपना भविष्य धूमिल नजर आ रहा है।

 
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पर्यटन उद्योग कश्मीर
मालूम हो कि राज्य में अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसले से पहले दो अगस्त को जम्मू-कश्मीर में प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को रोक दिया था और तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को कश्मीर घाटी छोड़ने के लिए कहा था। इसके साथ ही घाटी में सख्त पाबंदियां लागू कर दी गई थीं।

 
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पर्यटन उद्योग कश्मीर
टैक्सी  ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मो. अशरफ लोन कहते हैं,पर्यटन का मौसम समाप्त हो चुका है । पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हम सभी लोग घबराए हुए हैं। भविष्य धूमिल दिखाई दे रहा है। हमें फिलहाल अगले वर्ष मार्च से पहले कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही। जबकि इस बार उन्हें बेहतर व्यावसायिक सीजन की उम्मीद थी।

 

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पर्यटन उद्योग कश्मीर
उन्होंने कहा कि स्टैंड पर मौजूद 200 टैक्सी ऑपरेटरों में से 85 फीसदी ने बैंकों से कर्ज ले रखा है। अब वह सभी मासिक किस्तों को लेकर चिंतित हैं। इन्हें 8000 से लेकर 20000 प्रतिमाह की किस्त चुकानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि सोमवार को ईद के बाद स्थानीय निवासियों का आगमन भी बंद हो जाएगा। फिर हमें कोई काम नहीं मिलेगा।

 
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पर्यटन उद्योग कश्मीर
दूसरी ओर जो लोग शनिवार को हवाई अड्डे पर उतरे वह घर पहुंचने के लिए टैक्सी चालकों को अतिरिक्त भुगतान के लिए भी तैयार थे। मॉरीशस से यहां पहुंचे एक छात्र ने बताया कि उसने लंबे समय के बाद अपने परिवार के साथ बकरीद का त्योहार मनाने के लिए महीनों पहले अपनी यात्रा की योजना बनाई थी। संचार माध्यम बंद होने के बाद वह काफी हताश है। कम से कम लैंड लाइन तो चालू रहनी चाहिए। श्रीनगर के सिविल लाइंस इलाके का निवासी उक्त युवक जल्द से जल्द अपने घर पहुंचना चाहता था।

 
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पर्यटन उद्योग कश्मीर
इस बीच स्थानीय प्रशासन ने त्योहारों के मद्देनजर शहर के कुछ हिस्सों में आम लोगों की सहूलियत के लिए कई उपाय किए हैं। वह फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए विशेष बस सेवा चलाने की योजना बना रहा है। साथ ही विभिन्न स्थानों पर 300 टेलीफन बूथ बनाए हैं।
 
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पर्यटन उद्योग कश्मीर
जम्मू में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई कर रही तीन छात्राएं यहां पहुंचने के बाद इस बात से खफा थीं कि वह श्रीनगर के अशांत इलाकों में स्थित अपने घरों में अब कैसे पहुंचें। इनमें से एक कौसर ने कहा कि हमारे परिवारों को हमारे आगमन के बारे में नहीं पता है अन्यथा कोई हमें लेने आया होता।
 

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पर्यटन उद्योग कश्मीर
ट्रैवेल एजेंट तौशीफ मीर का कहना है कि मेरे कर्मचारियों का प्रति माह वेतन का खर्च एक लाख रुपये से अधिक है। जो भी स्थिति हो हमें उन्हें भुगतान करना होगा, क्योंकि यह मेरा नैतिक दायित्व है। ऐसे समय में हम उन्हें छोड़ भी नहीं सकते । घाटी में  अर्थव्यवस्था पहले से ही संघर्ष कर रही थी वर्तमान माहौल ने इस पर कील ठोंक दी।

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पर्यटन उद्योग कश्मीर
हाउस बोट मालिक बशीर अहमद ने कहा, पर्यटन का मौसम समाप्त हो गया है और फिलहाल पर्यटकों के जल्दी लौटने की संभावना नहीं है। हम यहां अमन के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। अहमद ने कहा कि कई हाउस बोट मालिकों ने बैंकों से ऋण लिया है और मौजूदा स्थिति में मासिक किस्तों का भुगतान करना बहुत मुश्किल है। हमारे बच्चों की पढ़ाई और उनका भविष्य भी दांव पर लग गया है।

 
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शिकारा, पर्यटन उद्योग कश्मीर
घाटी आने वाले पर्यटकों के मुख्य आकर्षण ‘शिकारा’ चलाने वाले अहमद अहमद डार कहते हैं कि उन्हें अब दैनिक मजदूर की तरह विकल्प तलाशना होगा।

बता दें कि डल झील के आकर्षण का मुख्य केन्द्र हैं यहां के हाउसबोट, इन्हें शिकारे या शिकारा नाम से बुलाते हैं। पर्यटक इन शिकारे में रहकर झील का आनंद उठाते हैं। दुकानें भी शिकारों पर ही लगी होती हैं। यहां तक कि इनमें ठहरने तक की व्यवस्था होती है।
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