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कश्मीर में ‘मददगार’ हेल्प लाइन बनी मसीहा, की 34 हजार लोगों की मदद, बीमारों को पहुंचाई दवा

Tue, 10 Sep 2019 08:07 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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कश्मीर घाटी में सीआरपीएफ द्वारा स्थापित ‘मददगार’ हेल्पलाइन स्थानीय लोगों के वास्तव में मददगार बनकर सामने आई। पांच अगस्त के बाद लागू संचार प्रतिबंधों के बीच एक माह की अवधि में 34 हजार से अधिक फोन कॉल्स रिसीव हुए। इनमें इनकमिंग व आउट गोइंग दोनों तरह के फोन कॉल्स शामिल थे। 
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जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद पांच अगस्त से लागू प्रतिबंधों के कारण संचार सुविधाएं पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई थीं। ऐसे में कश्मीर में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) लोगों की मददगार बन कर सामने आई। उसने हेल्प लाइन के नंबर सार्वजनिक किए तथा कुछ स्थानों पर फिक्स फोन बूथ की सुविधा भी उपलब्ध करायी। जहां लोग एक-दूसरे से संपर्क कर सकते थे। इन हेल्प लाइन पर बाहर से फोन करने वाले लोग अपने परिजनों व परिचितों की खैरियत जानना चाहते थे। जबकि यहां रहने वाले लोग अपने बच्चों व रिश्तेदारों की खैरियत जानने के साथ ही यह भी बताना चाहते थे कि वह सकुशल हैं।  

 
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अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि पांच अगस्त के बाद हेल्प लाइन नंबर 14411 पर 34,274 फोन कॉल्स प्राप्त हुए। इनमें 1277 कॉल्स ऐसे थे जिनमें देश के दूसरे हिस्सों से फोन करने वाले लोग अपने परिवार वालों की खैरियत जानना चाहते थे। ऐसे में सीआरपीएफ के जवानों ने फोन करने वालों से संबंधित परिचित अथवा परिजनों के घर का पता लिया और घर से लौटकर वापस उस नंबर पर उनकी खैरियत की सूचना दी। इस दौरान सीआरपीएफ जवानों ने फोन करने वालों की अलग-अलग वजहों से मदद भी की। मसलन किसी को हवाई टिकट देने के लिए उनके घर गए तो दूसरे प्रदेश में पढ़ने वाले छात्रों की परीक्षा व साक्षात्कार की तिथियों में बदलाव की सूचना भी दी। इसके अलावा भी वह विभिन्न मौकों पर इमरजेंसी मदद के लिए भी उपलब्ध रहता है। सिर्फ इतना ही नहीं सीआरपीएफ ने मददगार किडनी, मधुमेह व कैंसर जैसी बीमारियों से पीड़ित 123 मरीजों को उनके घर पर दवाइयां भी उपलब्ध कराईं।

 

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2017 में हुई थी ‘मददगार’ की स्थापना
कश्मीर घाटी के निवासियों को देश में कहीं भी मदद करने के लिए सीआरपीएफ ने ‘मददगार’ हेल्पलाइन को जून 2017 में लांच किया था। यह श्रीनगर में एक सीआरपीएफ शिविर से संचालित होता है। यह हेल्पलाइन ट्विटर पर भी चल रही है।

 
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घाटी में 65 बटालियनें तैनात
घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियानों व कानून व्यवस्था में मदद के लिए 65 से अधिक बटालियनें (एक बटालियन में एक हजार कर्मी) तैनात हैं।
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