फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कश्मीर में सेब की बंपर पैदावार, 8500 मी. टन नैफेड ने खरीदा

Sat, 30 Nov 2019 02:35 AM IST
Pranjal Dixit अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
विज्ञापन
1 of 5
कश्मीरी सेब - फोटो : बासित जरगर
कश्मीर घाटी में इस वर्ष सेब की बंपर पैदावर हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में यह 10 फीसदी ज्यादा है। इसके साथ ही सेब की सरकारी खरीद भी अधिक हुई है। पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जानेे के बाद पैदा हालात के बाद बाहर के व्यापारी घाटी नहीं आ रहे थे। किसान फसल की बिक्री को लेकर परेशान थे। किसानों की मुश्किल का हल निकालते हुए सेब की खरीद की जिम्मेदारी नैफेड को सौंपी गई थी। बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत नैफेड ने उत्पादकों को उचित कीमत देकर अब तक 8500 मीट्रिक टन सेब खरीदा है।   
विज्ञापन

2 of 5
कश्मीरी सेब - फोटो : बासित जरगर
बागवानी विभाग के निदेशक एजाज अहमद ने बताया कि इस वर्ष 12 लाख मीट्रिक टन से अधिक सेब बाहर भेजा जा चुका है। पिछले साल 21.5 लाख मीट्रिक टन सेब प्रदेश से बाहर गया था। करीब 50 प्रतिशत सेब की फसल अभी भी बागों में मौजूद है। जल्दी ही इसकी भी खरीद की जाएगी। किसान 15 फरवरी, 2020 तक योजना का लाभ उठा सकते हैं।   

 
विज्ञापन

3 of 5
कश्मीरी सेब - फोटो : बासित जरगर
1700 किसानों ने उठाया योजना का लाभ
12 सितंबर से शुरू हुई नैफेड की सेब खरीद की योजना से 1700 से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं। किसानों को सबसे अच्छे उच्च क्वालिटी के सेब की कीमत 70 रुपये, बी ग्रेड 60 रुपये और 44 रुपये और सी ग्रेड के सेब की कीमत 24 रुपये किलो के औसत से दी गई। अभी तक 40 करोड़ से ऊपर का कारोबार हो चुका है।  

 

4 of 5
कश्मीरी सेब - फोटो : बासित जरगर
प्रदेश की जीडीपी में आठ फीसदी योगदान
आंकड़ों के अनुसार सेब के 8000 करोड़ रुपये के कारोबार को कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह जम्मू-कश्मीर की कुल जीडीपी का लगभग आठ प्रतिशत है। यह व्यवसाय 8.73 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता है। कश्मीर में दो लाख 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सेब की फसल होती है। 

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
कश्मीरी सेब - फोटो : बासित जरगर

नवंबर में बारिश और बर्फबारी से किसानों को नुकसान हुआ है। इससे किसी भी किसान को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की ओर से इन्हें मुआवजा दिया जाएगा। हॉर्टिकल्चर और रेेवेन्यू विभाग के शुरुआती सर्वे में पता चला है कि करीब 35 प्रतिशत फसल का नुकसान हुआ है, जिसका मूल्यांकन 2257 करोड़ रुपये है।- एजाज अहमद, निदेशक, बागबानी विभाग 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें