चुनाव
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संशोधन में ये अहम बिंदु जोड़े, जिनका हो रहा विरोध
-पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, अखिल भारतीय सेवा और भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो के संबंध में वित्त विभाग की पूर्व सहमति की आवश्यकता वाले किसी भी प्रस्ताव को तब तक स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया जाएगा, जब तक इसे मुख्य सचिव के माध्यम से उप राज्यपाल के समक्ष नहीं रखा जाता है। अभी इनसे जुड़े मामलों में वित्त विभाग की मंजूरी लेना जरूरी है।
- विधि, न्याय और संसदीय कार्य विभाग, न्यायालय की कार्यवाही में महाधिवक्ता की सहायता के लिए महाधिवक्ता और अन्य विधि अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के जरिये उप राज्यपाल की मंजूरी के लिए पेश करेगा। अभियोजन मंजूरी प्रदान करने या अपील दायर करने के संबंध में कोई भी प्रस्ताव विधि, न्याय और संसदीय कार्य विभाग की ओर से मुख्य सचिव के माध्यम से उप राज्यपाल के समक्ष रखा जाएगा।
- यह प्रावधान भी किया गया है कि कारागार, अभियोजन निदेशालय और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला से संबंधित मामले मुख्य सचिव के माध्यम से गृह विभाग के प्रशासनिक सचिव की ओर से उप राज्यपाल के समक्ष पेश किए जाएंगे। प्रशासनिक सचिवों की तैनाती, तबादले तथा अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के पदों से संबंधित मामलों के संबंध में प्रस्ताव मुख्य सचिव के माध्यम से सामान्य प्रशासन विभाग के प्रशासनिक सचिव द्वारा उप राज्यपाल को प्रस्तुत किए जाएंगे।