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तो इस वजह से उमर अब्दुल्ला-महबूबा मुफ्ती पर लगा पीएसए, अबतक इस कानून के तहत 389 लोग गिरफ्तार

Fri, 07 Feb 2020 12:29 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला
नेकां (नेशनल कांफ्रेंस) प्रमुख डा. फारूक अब्दुल्ला के बाद अब उनके बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती पर गुरुवार शाम पीएसए लगा दिया गया। इसके साथ ही एमएलए हॉस्टल से रिहा किए जाने के तत्काल बाद पीडीपी के वरिष्ठ नेता और महबूबा मुफ्ती के मामा सरताज मदनी व नेकां के जनरल सेक्रेटरी अली मोहम्मद सागर पर भी पीएसए लगा दिया गया। नेशनल कांफ्रेंस के पूर्व एमएलसी डॉ. बशीर वीरी को रिहा कर दिया गया। मदनी और सागर को गुपकार स्थित सरकारी बंगले में ले जाया गया। जबकि वीरी को उनके घर पर ही नजरबंद कर दिया गया है।

 
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महबूबा मुफ्ती
सूत्रों ने बताया कि उमर, महबूबा की हिरासत की छह महीने की अवधि समाप्त होने के कारण यह फैसला किया गया। अब इन्हें तीन महीने तक बिना किसी ट्रायल के जेल में रखा जा सकता है। हालांकि, आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

 
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सज्जाद गनी लोन - फोटो : ani
गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को पीपुल्स कॉन्फेंस के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सज्जाद गनी लोन, पीडीपी नेता वहीद, पीडीपी नेता अब्दुल कयूम वानी को भी एमएलए हॉस्टल से रिहा कर दिया गया। इसके साथ ही रविवार से बुधवार तक नौ नेता व कार्यकर्ता रिहा किए जा चुके हैं। दूसरी ओर यह भी जानकारी आ रही है कि छह महीने से नजरबंद पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को अब स्टेट गेस्ट हाउस में शिफ्ट किया जा सकता है।

 

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महबूबा मुफ्ती
अमर उजाला ने गुरुवार के अंक में यह खबर प्रकाशित की थी कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन एहतियातन बंदी बनाए गए नेताओं की हो रही क्रमबद्ध रिहाई के बाद उन नेताओं व कार्यकर्ताओं पर पीएसए के तहत कार्रवाई कर सकता है जिनसे उसे कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका हो।

 
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फारूक अब्दुल्ला, फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
फारूक अब्दुल्ला घर में ही हैं बंद
नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला  पर 15 सितंबर 2019 को पीएसए के तहत कार्रवाई की थी। जिसके बाद उन्हें गुपकार रोड स्थिति निजी आवास में ही कैद कर दिया था,और उनके घर को ही अस्थाई जेल घोषित कर दिया गया था।

 
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जी किशन रेड्डी
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने बुधवार को राज्यसभा में बताया था कि जम्मू-कश्मीर में फिलहाल, 389 लोग जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में हैं। अगस्त, 2019 से 444 लोगों पर पीएसए लगाया गया था। नियमित समीक्षा के बाद 55 लोगों को रिहा किया जा चुका है। 
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