मछिल के सरपंच हबीबुल्ला भट ने कहा कि वह केंद्र सरकार के काफी शुक्रगुजार हैं जिन्होंने एलओसी के करीब रहने वाले लोगों के लिए बंकर बनवाए। उन्होंने कहा कि जब भी यहां पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी होती है तो दहशत का माहौल होता है, लेकिन जब से यहां बंकरों का निर्माण हुआ है तब से लोगों ने राहत महसूस की है। भट ने कहा कि जब भी कभी फायरिंग की आवाज सुनाई पड़ती है तब उस समय स्थानीय लोग इन बंकरों में शरण लेते हैं। इन बंकरों का निर्माण पिछले वर्ष अगस्त में शुरू हुआ था।
इस बीच फरवरी में दोनों देशों के बीच डीजीएमओ स्तर पर एक बार फिर से हुए सीजफायर के समझौते से कश्मीर से सटी एलओसी पर काफी शांति का माहौल है। दोनों देश सीजफायर के समझौते का सही से पालन कर रहे हैं। इस समझौते के कारण एलओसी से सटे इलाकों में बेस गांव में रहने वाले लोगों ने काफी राहत की सांस ली है और उनका कहना है कि वह चाहते हैं कि यह सीजफायर आगे भी इसी तरह कायम रहे।
मछिल सेक्टर के निवासी अब्दुल जब्बार ने कहा कि यह सीज़फायर हमेशा के लिए रहे ताकि हम चैन की ज़िन्दगी जी सकें। यहां बर्फ़बारी के चलते छह महीने तो कुछ काम नहीं होता, गर्मियों के महीनो में कुछ रोज़गार मिलता है। उस दौरान भी अगर गोलाबारी होगी तो हम कैसे अपना जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
सेना के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि मछिल सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी की कम संभावना है क्योंकि इस इलाके में भारतीय सेना ऊंचाई पर है। अगर पाकिस्तान इस इलाके में गोलाबारी करने की हिमाकत करता भी है तो उसे मुंह की खानी पड़ेगी, जिस डर से वह बहुत कम ऐसी घटना को इस सेक्टर में अंजाम देते हैं। अधिकारी के अनुसार इस सेक्टर में थल्ली गांव में वर्ष 2018 में और एक बार वर्ष 2019 में गोलाबारी हुई थी, जिसमें एक बुज़ुर्ग की जान गई थी और कुछ घायल हुए थे। उन्होंने बताया कि 5 अगस्त 2019 के बाद यहां करीब 48 कम्युनिटी बंकर बने, लेकिन भाग्यवश अभी तक इसकी जरूरत नहीं पड़ी।