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कुपवाड़ा: पाकिस्तानी गोलाबारी से बचने के लिए बनाए गए 48 कम्युनिटी बंकर, लोगों ने ली राहत की सांस

Fri, 16 Jul 2021 12:44 PM IST
प्रशांत कुमार अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर

सार

स्थानीय लोग इस बदलाव से काफी खुश हैं और सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। लेकिन उनकी यह भी मांग है कि इन बंकरों की संख्या प्रत्येक गांव में बढ़ाई जाए।
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कम्युनिटी बंकर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एलओसी के पास बसे गावों में रहने वाले स्थानीय लोगों को पाकिस्तानी गोलाबारी के दौरान एक सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारतीय सेना की मदद से कई जगह पर कम्युनिटी बंकर बनाए जा रहे हैं। एलओसी के पास बसने वाले हर गांव वासी की मांग है कि बंकर बनाए जाएं। ऐसा ही बदलाव 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कुपवाड़ा जिले के मछिल सेक्टर में देखने को मिला, जहां केंद्र सरकार द्वारा सेना की मदद से करीब 48 कम्युनिटी बंकर बनवाए गए।

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पुशवारी गांव के अब्दुल जब्बार बाबा ने बताया कि यहां मछिल सेक्टर में हर गांव में दो बंकर बनाए गए हैं, लेकिन जरूरत और भी है। उन्होंने कहा कि अगर कभी पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का उल्लंघन होगा तो दो बंकरों में सभी गांव वाले शरण नहीं ले पाएंगे इसलिए वह प्रशासन से मांग करते हैं कि एक गांव में कम से कम 10 बंकर आने वाले समय में बनाए जाएं। उन्होंने बताया कि उनका इलाका एलओसी के काफी करीब है और जब भी कभी शेलिंग होती है तो दहशत का माहौल होता है। जब्बार ने कहा कि गोला यह नहीं देखता कि कहां पड़ना है, थल्ली गांव में पिछली बारी एक शख्स की मौत हुई थी। इसलिए जब भी गोलाबारी होती है तो डर तो लगता ही है।

पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी होती है तो दहशत का माहौल होता है

मछिल के सरपंच हबीबुल्ला भट ने कहा कि वह केंद्र सरकार के काफी शुक्रगुजार हैं जिन्होंने एलओसी के करीब रहने वाले लोगों के लिए बंकर बनवाए। उन्होंने कहा कि जब भी यहां पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी होती है तो दहशत का माहौल होता है, लेकिन जब से यहां बंकरों का निर्माण हुआ है तब से लोगों ने राहत महसूस की है। भट ने कहा कि जब भी कभी फायरिंग की आवाज सुनाई पड़ती है तब उस समय स्थानीय लोग इन बंकरों में शरण लेते हैं। इन बंकरों का निर्माण पिछले वर्ष अगस्त में शुरू हुआ था। 

 

सीजफायर समझौते से कश्मीर से सटी एलओसी पर शांति का माहौल

इस बीच फरवरी में दोनों देशों के बीच डीजीएमओ स्तर पर एक बार फिर से हुए सीजफायर के समझौते से कश्मीर से सटी एलओसी पर काफी शांति का माहौल है। दोनों देश सीजफायर के समझौते का सही से पालन कर रहे हैं। इस समझौते के कारण एलओसी से सटे इलाकों में बेस गांव में रहने वाले लोगों ने काफी राहत की सांस ली है और उनका कहना है कि वह चाहते हैं कि यह सीजफायर आगे भी इसी तरह कायम रहे। 

मछिल सेक्टर के निवासी अब्दुल जब्बार ने कहा कि यह सीज़फायर हमेशा के लिए रहे ताकि हम चैन की ज़िन्दगी जी सकें। यहां बर्फ़बारी के चलते छह महीने तो कुछ काम नहीं होता, गर्मियों के महीनो में कुछ रोज़गार मिलता है। उस दौरान भी अगर गोलाबारी होगी तो हम कैसे अपना जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

 
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पाकिस्तान इस इलाके में गोलाबारी करने की हिमाकत करता भी है तो उसे मुंह की खानी पड़ेगी

सेना के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि मछिल सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी की कम संभावना है क्योंकि इस इलाके में भारतीय सेना ऊंचाई पर है। अगर पाकिस्तान इस इलाके में गोलाबारी करने की हिमाकत करता भी है तो उसे मुंह की खानी पड़ेगी, जिस डर से वह बहुत कम ऐसी घटना को इस सेक्टर में अंजाम देते हैं। अधिकारी के अनुसार इस सेक्टर में थल्ली गांव में वर्ष 2018 में और एक बार वर्ष 2019 में गोलाबारी हुई थी, जिसमें एक बुज़ुर्ग की जान गई थी और कुछ घायल हुए थे। उन्होंने बताया कि 5 अगस्त 2019 के बाद यहां करीब 48 कम्युनिटी बंकर बने, लेकिन भाग्यवश अभी तक इसकी जरूरत नहीं पड़ी।
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