कोरोना वायरस इतना खतरनाक है कि इसकी रिकवरी होने के बाद भी शरीर पर इसका गहरा और लंबे समय तक असर रहता है। कोविड विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना संक्रमण ने पीड़ितों को कितना प्रभावित किया है, यह उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता पर निर्भर करता है। रिकवर होने के बाद भी कई मामलों में ठीक हुए व्यक्ति के महत्वपूर्ण अंगों पर संक्रमण के कारण कमजोरी आ जाती है। इस वायरस से रिकवर हुए मरीज पूरी तरह से सेहतमंद नहीं होते हैं बल्कि पोस्ट कोविड कॉम्प्लिकेशन के कारण उनमें निरंतर इसके लक्षण नजर आते हैं। इस वायरस से निगेटिव होना काफी नहीं है, बल्कि आगे की जंग जीतना भी जरूरी है। कोविड से संक्रमित हुए बड़ी संख्या में मरीज रिकवर होने के बाद पोस्ट कॉम्प्लिकेशन बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। कोविड विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी परिस्थितियां भी पीड़ितों के लिए घातक होती हैं। जीएमसी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप डोगरा का कहना है कि रिकवर हुए मरीजों में कई समस्याएं देखी जा रही हैं। मसलन उनके शरीर में नियमित थकावट रहना, सांस लेने में दिक्कत होना, हृदय बीमारियों का दोबारा पनपना, आंतड़ियों और पेट संबंधी समस्याएं, तनाव, उलझन में रहना आदि लक्षण रहते हैं। यह रिकवर होने के एक माह बाद हो सकते हैं।