आतंकी हमले में मारे गए शिक्षक दीपक चंद के जम्मू शहर के रिहाड़ी स्थित आवास से शुक्रवार को उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। उनके पार्थिव शरीर को देखकर उनकी मां और पत्नी का रो-रो कर बुरा हाल है। उनकी तीन साल की बेटी को समझ भी नहीं आ रहा कि घर में हो क्या रहा है और उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। दीपक के रिश्तेदार, दोस्त, आसपास रहने वाले लोगों का सुबह से ही उनके घर पर आना-जाना लगा हुआ है। दीपक की मौत से उनका पूरा परिवार आंसुओं के सैलाब में डूब चुका है। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हैं। परिवार ने यहां तक कहा है कि कश्मीर हमारे लिए जन्नत नहीं, नर्क बन गया है। इस मौके पर जम्मू के विभिन्न संगठन भी दीपक को श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे। पिछले कुछ दिन से कश्मीर में होने वाले आतंकी हमलों को लेकर परेशान थे। दीपक ने अपनी मां से बात करते हुए कहा था कि जिस तरह से कश्मीरी पंडितों को मारा जा रहा है, वह उससे दुखी है।