राजसमंद और जयसमंद झीलें 44 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार छलक ही पड़ीं। उदयपुर संभाग के राजनगर और कांकरोली को ही नहीं पूरे मेवाड़ को इस झील के छलकने का इंतजार था। 44 साल बाद जब झील से पानी छलकने लगा तो शहर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लोगों के बहुत से किस्से कहानियां और यादें जो इन झीलों के साथ जुड़ी हुई है उन्हें ताजा करने के लिए यहां उनका जमावड़ा भी लग गया और हर किसी ने अपनी आंखो और मोबाइल के कैमरे इस नजारे को कैद करना चाहा।
यहां के स्थानीय लोगों को इन दोनों झीलों से इतना प्यार है कि उन्होनें इनके नाम पर एक क्लब भी बनाया है। तस्वीर में दिखाई दे रहे ये वो बुर्जुग हैं जिन्होंने से 1973 में झील को छलकते देखा था। इनमें से एक डूंगरसिंह कर्णावट के अनुसार झील को पुनः भरा देखने की उन्हें इस जीवन में आस नहीं रही थी। लेकिन पूरी भरी झील देखने के बाद 1973 की यादें ताजा हो गई है। झील ने राजनगर का सौन्दर्य बढ़ा दिया है।
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1952 में छलकी थीं पहली बार ये झीलें
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झील देखने पहुंचे बुजुर्ग
- फोटो : amar ujala
राजसमंद के बुर्जुगों के अनुसार 1952 में और फिर 1973 में लोगों ने राजसमंद को छलकते देखा। 1952 में झील को छलकते देखने वाले अब इसे देखने को जीवित नहीं है या फिर इस हालात में नहीं है कि झील तक आ सकें। वहीं 1973 में झील को छलकता देखने वाले मौके पर पहुंचे और उसका आनन्द भी लिया।
4 सितम्बर 1973 को एक रात में भरी थी झील
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झील का शानदार नजारा
- फोटो : amar ujala
1973 का वर्ष राजस्थान में मानसून का ऐतिहासिक वर्ष रहा है। उस साल लगभग पूरे राजस्थान में भारी बारिश के कारण बाढ़ के हालात बन गए थे। ऐसे में 4 सितम्बर की रात को चारभुजा और भीम, देवगढ़, आमेट के मगरा क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण राजसमंद की भरने वाली गोमती नदी से पानी की भारी आवक हुई। ऐसे में राजसमंद और आमेट, देवगढ़ व भीम सड़क व रेल मार्ग से कट गए। इसके साथ ही सुबह होते होते राजसमंद झील छलक गई। पानी अपने खतरे के निशान से उपर था। लगभग 36 फीट। नौ चौकी पाल पर बनी छतरियां और तौरण करीब आधे पानी में डूब चुके थे।
झील पर उमड़ी स्थानीय लोगों की भीड़
- फोटो : amar ujala
करीब आधी सदी के बाद छलकी झील को देखने के लिए कांकरोली और राजनगर के लोग ही नहीं पूरे मेवाड़ से जनता पहुंच रही है। इसकी खुशी पूरे मेवाड़ अंचल में है। आशा है कि झील के भरने से कांकरोली,राजनगर में इस बार पर्यटन में वृद्धि होगी। अब मंगलवार को हुई बारिश के बाद गोमती नदी में पानी की आवक बढ़ जाने से झील पर एक इंच से अधिक की चादर चल रही है। नौचैकी की पाल, एरिगेशन व वासोल गांव के पास झील पेटे से छलक रही जल राशि को देखने के लिए मेला लग गया है।