संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर चल रहे विवाद के एक पहलू का तो हल निकाल लिया गया है। सरकारी अधिकारियों ने विवाद के एक कारण पर परदा गिराकर अपना काम पूरा कर लिया है।
दरअसल पद्मावती फिल्म के कथानक को लेकर उपजे पूरे विवाद में एक बात यह भी सामने आई थी कि चित्तौड़गढ़ के पद्मिनी महल के बाहर एक शिलालेख पर वही कहानी लिखी गई है, जिसे लेकर विवाद हो रहा है। राजपूत समाज की ओर से मांग की गई थी कि इस शिलालेख को हटाया जाए।
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कपड़े से ढक दिया शिलालेख
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इनसेट में ढ़का हुआ शिलालेख
- फोटो : अमर उजाला
विवाद को लेकर पिछले दिनों प्रदर्शन भी किया गया था। इसके बाद पुरातत्व विभाग ने इस शिलालेख को यहां से हटाया तो नहीं पर उस पर परदा जरूर लगा दिया। कपड़े से ढ़क दिए जाने के बाद अब लोग इस कहानी को नहीं पढ़ पाएंगे।
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ये है विवादित कहानी...
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शिलालेख पर लिखी कहानी
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल इस शिलालेख पर लिखा था कि यह महल पद्मिनी तालाब के उत्तरी तट पर स्थित है, जो कि रानी पद्मिनी महल के नाम से जाना जाता है। मेवाड़ के इतिहास में इस महल का खास महत्व है। किंवदन्ती है कि राजा रतन सिंह ने महल के दक्षिणी भाग में स्थित कमरे में लगे शीशे से रानी पद्मिनी के सौंदर्य की झलक अलाउद्दीन खिलजी को दिखाई थी। जिसके बाद उसने चित्तौड़ के अधिकार में लेने हेतु आक्रमण किया।
प्रदर्शन कर हटाने की मांग की थी
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padmavati ban
इस शिलालेख को लेकर राजूपत समाज की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया था। उन्होंने ज्ञापन देकर मांग की थी कि इस विवादास्पद शिलालेख को हटा दिया जाए, जिससे यहां आने वाले पर्यटक गलत जानकारी नहीं पढ़ें।
इसके बाद विभाग ने कपड़े से इस पूरे शिलालेख को ढ़क दिया। इसके साथ ही बोर्ड की सुरक्षा में जवान भी लगा दिए गए हैं। विभाग को यह डर भी है कि इस शिलालेख को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जा सके।
गौरतलब है कि फिल्म का विरोध शूटिंग के साथ ही शुरू हो गया था। संजय लीला भंसाली ने जब पद्मावती फिल्म की शूटिंग की तो उस वक्त भी इसका विरोध हुआ। इसकी कहानी को लेकर आपत्ति जताई गई। इसके बाद फिल्म को लेकर विवाद लगातार बढ़ता गया। कुछ समय पहले आक्रोशित उन विवादित शीशों को भी चित्तौड़गढ़ में तोड़ दिया, जिनमें रानी पद्मिनी को खिलाजी को दिखाने का दावा किया जाता है।