भूतों के भानगढ़ के बारे में कई स्टोरी हैं। वहां रात को कोई रुक नहीं सकता। कुछ ऐसा ही 'साया' जयपुर के नाहरगढ़ किले पर भी है। यहां भी कई बार अजीबो-गरीब घटनाएं होती रहती हैं। 283 साल पुराने नाहरगढ़ के ऐतिहासिक किले की प्राचीर पर लटकती लाश ने पिंकसिटी जयपुर में सनसनी फैल गई। जहां यह लाश मिली थी वहां चट्टानों पर कोयले से लिखा था कि 'पद्मावती का विरोध, हम सिर्फ पुतले नहीं लटकाते, हम जान देते हैं।' जिसे अब पद्मावती फिल्म के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है।
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क्राइम सीन में उलझी पुलिस
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- फोटो : Amar Ujala
मृतक की पहचान चेतन सैनी के रूप में हुई है। घटनास्थल के क्राइम सीन ने पुलिस का उलझा दिया है। यहां चट्टानों पर लिखे गए संदेशों से साफ है कि इस घटना के माध्यम से पद्मावती फिल्म का विरोध करने के साथ-साथ साम्प्रदायिकता भड़काने का प्रयास बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस इसे अभी आत्महत्या मान रही है जबकि परिजन का आरोप है कि चेतन की हत्या की गई है।
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तांत्रिकों से रहा है किले का गहरा नाता
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किले के चारों तरफ सुरक्षा के लिये अभेद मोटी दीवारें
- फोटो : Amar Ujala
यहां लिखे संदेशों में चेतन का तांत्रिक बताने का प्रयास किया है जबकि परिजनों के अनुसार उसका तंत्र—मंत्र से कोई लेना देना नहीं था। उधर, नाहरगढ़ किले से तांत्रिकों का गहरा नाता रहा है। इस किले के निर्माण में तांत्रिकों का बहुत योगदान रहा है।
किले का निर्माण शुरू होते ही होने लगी थी रहस्यमय घटनाएं
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खिड़की के रास्ते आ जाते है बादल
- फोटो : File
दरअसल, जब किले का निर्माण चल रहा था तो यहां अजीबो-गरीब घटनाएं हो रही थीं। तत्कालीन जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह ने इस संबंध तांत्रिकों की सलाह ली और फिर उस अमल किया। जिसके बाद इस किले का निर्माण हो सका। इस किले का नाम इंद्र के पुत्र सुदर्शन के नाम पर सुदर्शन किला रखा गया था, लेकिन बाद में नाहरगढ़ किया गया। विदेशों में इसे टाइगर फोर्ट के नाम से जानते है जबकि इसके नामकरण से 'टाइगर' का कोई लेना देना नहीं है। यहां तक कि टाइगर भी इस इलाके काफी साल पहले ही खत्म हो गए थेंं।
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दिन का निर्माण कार्य सूर्यास्त के बाद हो जाता था नष्ट
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नाहरगढ़ किले का विहंगम दृश्य
- फोटो : Amar Ujala
जयपुर और आमेर की सुरक्षा की दृष्टि से इस किले का निर्माण 1734 में सवाई जयसिंह ने शुरू करवाया। इस किले का नाम सुदर्शन किला रखा गया, लेकिन इस किले के निर्माण के समय व्यवधान होने लगा। दिनभर में हुआ निर्माण काम रात में स्वत: नष्ट हो जाता था। राजा ने इस मामले में तांत्रिकों की सलाह ली। तो बताया गया कि इस इलाके में एक नाहरसिंह भौमिया का प्रभाव है। दरअसल, किसी युद्ध में नाहरसिंह नामक सैनिक लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे और वे इस किले का निर्माण नहीं होने दे रहे थे। तांत्रिकों की सलाह पर उन्हे मनाया गया और उनके नाम पर इस किले का नामकरण किया था उनके मंदिर की स्थापना आगरा रोड पर घाट की गूणी में की गई, तब जाकर यहां किले का निर्माण पूरा हो सका।
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इस किले में ही शूट हुईं ये हॉरर फिल्में, सीरियल भी
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नाहरगढ़ किला महाराजाओं का निवास स्थान भी हुआ करता था। यहां बॉलीवुड की कुछ प्रसिद्ध फिल्म जैसे आमिर खान अभिनीत फिल्म 'रंग दे बसंती', 'जोधा-अकबर', 'दाता' सहित कई प्रमुख फिल्मों और हॉरर सीरियल्स के दृश्यों को भी शूट किया गया है। आमेर किले और जयगढ़ किले के साथ नाहरगढ़ किला भी जयपुर शहर को मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है। शहर से इस किले को देखना निश्चित ही आनंदमयी होता है।
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शोधकर्ताओं ने रखे थे चौंका देने वाले विचार
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बावड़ी को देख रह जाएंगे दंग, हो चुकी कई फिल्मों की शूटिंग
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जयपुर में कुछ अरसे पहले एक होटल में ‘द स्प्रिट वर्ल्ड एंड हाउ डज वी इंटरेक्ट विद इट' विषय पर शोधकर्ताओं ने अपने विचार रखे थे। इसमें भी यंग बंगाल ब्रिगेड की चेयरपर्सन इप्सिता रॉय चक्रवर्ती ने बताया था कि वह 2012 में वह 13 सदस्यीय टीम के साथ रात 10 बजे नाहरगढ़ के किले में पहुंची थी। वहां काफी अंधेरा था। ऐसे में उन्होंने अपनी टीम को काउंट किया तब काउंटिंग में सदस्यों की संख्या 14 लोग थी। चक्रवर्ती के मुताबिक वह समझ गई कि कोई और भी साथ है। इसी तरह ‘ऑर्ब फिनोमिना’ की जांच के बाद भी यह दावा किया गया था कि भानगढ़ के किले के अलावा नाहरगढ़ किले में आत्माएं निवास करती हैं।
कनक घाटी, आमेर रोड से नाहरगढ़ तक करीब 14 किलोमीटर का सर्पीला रास्ता है। इस रास्ते से पर्यटकों की आवाजाही रहती है। यहां पर कई घुमाव बड़े ही खतरनाक है और आए दिन हादसे होते रहते हैं। जिनमें कई लोगों की जान भी जा चुकी है। ऐसे में इसे डेथ वैली भी कहा जाने लगा है। कुछ लोग इन घटनाओं को यहां तंत्र मंत्र से भी जोड़ते है। हालांकि अधिकांश मौतें यहां खतरानक मोड़ पर तेज रफ्तार गाड़ी के बेकाबू होने से हुई है।