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होलाष्टक: इन आठ दिन में नहीं होता कोई शुभ कार्य, जानिए क्यों लगता है ये 'बैन'

Mon, 19 Feb 2018 07:59 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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होलीका दहन
होलाष्टक में शुभ कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है। इसका असर मानव जीवन पर भी पड़ता है। उनके इस इस उग्र व्यवहार से कार्य प्रभावित होते है।  शादी समारोह हो या ग्रह प्रवेश सभी पर बैन लगा रहता है। 
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23 फरवरी से 1 मार्च तक नहीं होगी शादी

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marriage line
23 फरवरी से होलाष्टक प्रारंभ होने जा रहे हैं, होली के आठ दिन पूर्व होलाष्टक लगने के कारण इन दिनों कोई भी शुभ कार्य, यज्ञ, शादी आदि नहीं किए जाते हैं। इसके कारण 23 फरवरी से 1 मार्च तक विवाह का कोई मुहूर्त नहीं है।

 
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उग्र होता है ग्रहों का स्वभाव

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होलिका दहन - फोटो : demo pic
पं. राजकुमार चतुर्वेदी ने बताया कि होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं जिसके कारण शुभ कार्यों का अच्छा फल नहीं मिल पाता है। होलाष्टक प्रारंभ होते ही प्राचीन काल में होलिका दहन वाले स्थान की गोबर, गंगाजल आदि से लिपाई की जाती थी। साथ ही वहां पर होलिका का डांडा लगा दिया जाता था।

 

बढ़ जाती है हानि की संभावना

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ग्रह नक्षत्र
होलाष्टक के दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहू उग्र स्वभाव में रहते हैं। इन ग्रहों के उग्र होने के कारण मनुष्य के निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है जिसके कारण कई बार उससे गलत निर्णय भी हो जाते हैं। जिसके कारण हानि की आशंका बढ़ जाती है। 


 
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16 संस्कार होते हैं पूरी तरह निषेध

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होलिका
पं अक्षय शास्त्री ने बताया कि होलाष्टक में 16 संस्कारों को करना पूर्णतः निषेध माना गया है। वहीं ग्रह प्रवेश, मुंडन, गृह निर्माण कार्य आदि भी प्रारंभ नहीं कराए जाते हैं।

 
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