अमर उजाला- प्यार के बाद शादी, कुछ बदला जीवन में?
योगेश कुमार (आईएएस)- हां, हम अक्सर एक गलतफहमी में रहते हैं कि दो लोग जो प्यार करते हैं, फिर जीवनसाथी बनते हैं वो एक जैसे होते हैं जबकि सच ये होता है कि हम एक दूसरे से विपरीत होते हैं ( अपोजिट अप्रोच ) । बस हमें एक दूसरे को समझना चाहिए। जैसे मैं और संदीप, यह देर से सोती हैं और देर से जागती हैं, मैं जल्दी सोता हूं और जल्दी जागता हूं । यह बहुत कम बोलती हैं और मैं बहुत ज्यादा। यह बहुत पूजा-पाठ करती हैं और मैं ना के बराबर।
अमर उजाला- आखिरकार आपने कैसे शादी के लिए मना लिया?
योगेश कुमार (आईएएस)- आप ही सोच कर देखिए अगर कोई पहले ही रिजेक्ट कर दे तो कितना मुश्किल होता है दोबारा हिम्मत करना, हुआ ये कि ट्रेनिंग के दौरान उनका पैर फ्रैक्चर हो गया, उस वक्त मैंने उनकी बहुत सेवा की ( एक अच्छे दोस्त की तरह ), ख्याल रखा और ट्रेनिंग में भी मदद की, तब उन्होंने मुझे एक दिन खुद हां कर दी। इस वाकए से मैंने सीखा अच्छे जीवनसाथी सबसे पहले अच्छे दोस्त होते हैं।
अमर उजाला- बाहर आप दोनों आईएएस अधिकारी हैं और घर में कैसे रहते हैं ?
योगेश कुमार (आईएएस)- घर में हम लोग अफसर नहीं होते हैं, जीवनसाथी होते हैं और इस बात को बखूबी समझते हैं कि हम अच्छे माता पिता की तरह जीवन जिए और अपने बच्चों की परवरिश करें। हम दोनों मिलकर अपने बेटे को पढ़ाते हैं, संदीप इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं और मैं सोशल साइंस...दोनों मिलकर अपने बेटे को सिखाते हैं और एक दूसरे से भी सीखते हैं। संदीप, बाहर कलेक्टर साहब की भूमिका में होती हैं, सबको सुनती हैं।
अमर उजाला-क्या आप पर कभी नाराज होती हैं, फिर आप क्या करते हैं ?
योगेश कुमार (आईएएस)- बिलकुल होती हैं और मेरे पास एक ही विकल्प होता है, इनको मनाने का। मैं पूरी कोशिश करता हूं कि घर का माहौल बहुत अच्छा रहे क्योंकि हम दोनों के लिए बाहरी दुनिया में बहुत सारी चुनौतियां होती हैं। मैं मनाने के लिए उनके पसंदीदा गीत गाकर सुनाता हूं।
अमर उजाला-ऐसी कौन सी बात है जो आपकी पत्नी संदीप कौर को नहीं पसंद?
योगेश कुमार (आईएएस)- मेरे फोन का पासवर्ड। कभी कभी मेरा ज्यादा बोलना।
अमर उजाला-किसी भी लव स्टोरी की सफलता क्या हैं?
योगेश कुमार (आईएएस)- एक दूसरे के साथ 10 साल गुजर गए और यही सीखा, किसी भी लव स्टोरी का आखिर में सफल होना बहुत जरूरी है। शुरुआती प्यार के पल तो बहुत अच्छे होते हैं मगर समझदारी से वो अंत तक चलते रहे वो ही सच्ची मुहब्बत है। इसके लिए जरूरी है,
- सामंजस्य
- व्यावहारिक संतुलन
- वैचारिक तालमेल
- समय और
- सम्मान।
अगर इन बातों का ख्याल रखा जाए तो उससे बेहतरीन और खूबसूरत लव स्टोरी कोई नहीं हो सकती है।