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भारत छोड़ो आंदोलन-1942 से जुड़े दिलचस्प तथ्य

Mon, 08 Aug 2016 05:25 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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Quit India Movement - फोटो : Getty Images
अंग्रेजों की दासता से मुक्ति के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में सबसे बड़ा असहयोग आंदोलन चलाया गया। अगस्त 1942 में शुरू हुए इस आंदोलन को भारत छोड़ो आंदोलन के नाम से जाना गया। इस आंदोलन को अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है। महत्वपूर्ण सवाल ये है कि इतने बड़े आंदोलन की चिंगारी कैसे धधक उठी? इनमें सबसे महत्वपूर्ण सर स्टैफोर्ड क्रिप्स की वापसी के खिलाफ महात्मा गांधी का विरोध प्रदर्शन था। 1942 की जुलाई में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने इस आंदोलन को स्वीकार किया और अगस्त 1942 में प्रस्ताव पास हुआ। 
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Quit India Movement - फोटो : Getty Images
स्वतंत्रता संग्राम के हमारे महान नेताओं अबुल कलाम आजाद, वल्लभ भाई पटेल, महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू को 9 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया गया। आजादी के लिए मचल उठे देशवासियों को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का अमर नारा दिया। 
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Quit India Movement - फोटो : Getty Images
लॉर्ड लिनलिथगो ने अहिंसा को हटाने के लिए हिंसा की नीति अपना ली। भारत छोड़ो आंदोलन के आधे चरण में ही कई हड़तालों, प्रदर्शन और जुलूस ने अंग्रेजों के हाथ पांव फूला दिए। 

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Quit India Movement - फोटो : Getty Images
आंदोलन के दूसरे चरण में सरकारी बिल्डिंगों, म्यूनिसिपल हाउसेस, पोस्ट ऑफिस और रेलवे स्टेशनों में छापे पड़े और आगजनी हुई। आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेजों ने मशीन गन और बम का भी इस्तेमाल किया। ताकि अंग्रेजी शासन बरकरार रखा जा सके। 
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Quit India Movement - फोटो : Getty Images
आंदोलन का आखिरी और महत्वपूर्ण पड़ाव सितंबर 1942 में शुरू हुआ। इसके तहत सरकारी जगहों जैसे बॉम्बे और मध्य प्रदेश में भीड़ ने हमले किए। 
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Quit India Movement - फोटो : Getty Images
अंत में आंदोलन को महत्ता मिलनी शुरू हुई और शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहा, जब तक की महात्मा गांधी की रिहाई नहीं हो सकी।
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Quit India Movement - फोटो : Getty Images
ब्रिटिश हुकूमत के पास वॉयसराय की मुस्लिम परिषद और कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थन था। यही नहीं उनके पास अमेरिका का भी समर्थन था, जो आंदोलन को बुरी तरह कुचल देना चाहते थे। 
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Quit India Movement - फोटो : Getty Images
आखिर में अंग्रेजों को हार का सामना करना पड़ा और भारतीयों के हाथों मिली हार को वे पचा नहीं पाए। ऐसे में अंग्रेजों ने भारत को तत्काल आजादी देने से इनकार कर दिया। कुछ सालों के इंतजार के बाद द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति पर 1947 में भारत को आजादी मिली। 
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