26 तारीख को मोदी सरकार को सत्ता में आये तीन साल पुरे होने वाले हैं। 26 मई 2014 को भारत की जनता ने एक नये बदलाव को देखते हुए बीजेपी को केंद्र की सत्ता सौंपी थी और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री चुना था।
अपने चुनावी प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी ने देश की जनता से कालेधन की वापसी से लेकर नौजवानों के लिए नौकरी पैदा करे और देश की सुरक्षा को लकेर कई चुनावी वादे किया थे। ऐसे में आज तीन साल गुजर जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल उभरता है कि क्या हुआ मोदी सरकार के वादों का ? जाने मोदी सरकार की 10 विफलतायें
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बेरोजगारी
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प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में नौजावनों को रोजगार दिलाने के लिए कई चुनावी वादे किये थे। मगर इन दिनों भारत में बेरोजगारी का स्तर ये हो गया है कि लोगों को नौकरी तक से निकाला जा रहा है। इस समय टेलीकॉम, आईटी और बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में नौकरियों की छटनी जारी है।
अर्थव्यवस्था के आठ प्रमुख गैर-कृषि क्षेत्रों में सिर्फ 2.3 लाख नौकरियां जुड़ी गईं। इस आठ सेक्टर में विनिर्माण, निर्माण, व्यापार, परिवहन, आवास और रेस्तरां, आईटी / बीपीओ, शिक्षा और स्वास्थ्य शामिल हैं। साथ ही इन सभी सेक्टर में 2 करोड़ लोग काम करते है।
संयुक्त राष्ट्र संघ ( यूएन ) के इटरनेशनल लेबर आफर्गेनाइजेशन के रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की तुलना में 2017-18 में बेरोजगारी ज्यादा होगी। रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल जो बेरोजगारों की संख्या 1.77 करोड थी वो इस साल 1.78 करोड़ तक जा सकती है।
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भूमि अधिग्रहण बिल
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मोदी सरकार ने भारत में विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए यूपीए सराकार के भूमि अधिग्रहण बिल में कुछ बदलाव करना चाहे। नये भूमि बिल को पारित करवाने के लिए मोदी सरकार कई बार अध्यदेश भी पारित किये। मोदी सरकार किसानों के विकास का दावा करती है।
मगर यूपीए के भूमि अधिग्रहण बिल से 'किसानों की सहमति' और 'सामाजिक प्रभाव के आंकलन' की अनिवार्यता को मोदी सरकार ने अपने नये बिल से हटा दिया था। वहीं विपक्ष के कडे विरोध के बाद सरकार को बिल में कुछ बदलाव को वापस लेना पड़ा, लेकिन अभी भी कुछ ऐसे बदलाव है जो अंतरिक रूप से बिजनेसमैनस को फायदा पहुंचाते है।
कालाधन
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2014 के चुनावी प्रचार में बीजेपी के हर नेता ने और पीएम मोदी ने 100 दिनों के अंदर विदेशों में जमा कालेधन को वापास लाने और प्रत्येक भारतीय के बैंक अकाउंट में 15 से 20 लाख रुपये जमा कराने का वायदा किया था।
मगर तीन साल बाद भी कालेधन का मुद्दा महज मुद्दा भर बनकर रह गया है। हालांकि भारत सरकार और स्विस बैंक के बीच कालेधन को लेकर कुछ समझौते भी हुए। मगर परिणाम न बराबर ही देखने को मिला।
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सीजफायर का उल्लंघन
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यूपीए के समय बीजेपी ने हर दिन पाकिस्तान के द्वारा हो रहे सीजफायर के उल्लंघन का मुद्दा उठाया। साथ ही यूपीए सरकार से कठोर कदम उठाने की मांग करते रहे। मगर जिस बीजेपी की सरकार ने पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने का फैसला किया था। आज वही सरकार हर रोज सीजफायर के उल्लंघन को लेकर चुप बैठी रहती है।
मोदी सरकार ने खुद पिछले महीने इस बात को माना कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पिछले एक साल में 268 बार सीजफायर का उल्लंघन किया है। 2016-17 में सबसे ज्यादा सीजफायर का उल्लघंन किया गया। पाकिस्तान द्वारा अब तक सीजफायर उल्लंघन 300 के करीब में पहुंच गया है।
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वन रैंक वन पेंशन
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सेना से रिटायर्ड एक्स-सर्विसमेन ने ओआरओपी के लिए बहुस संघर्ष किया, अपनी चुनावी वायदों में मोदी सरकार ने रिडायर्ड एक्स-सर्विसमेन के लिए खास योजनना लागू करने का फैसला किया था। मगर सत्ता में आते ही सरकार चुपी मार कर बैछ गई।
हालांकि कुछ समय बाद सरकार ने वन रैंक वन पेंशन लागू तो किया, मगर लागू किये जाने वाले फैसलाा सच्चाई से एक दम परे है। दिल्ली के जतंर-मंतर पर पिछले 700 दिनों से एक्स-सर्विसमेन सरकार द्वारा लागू किये गये फैसले के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। एक्स-सर्विसमेन द्वारा ये आंदोलन सरकार की सच्चाई की पोल खोलता है।
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मेक इन इंडिया
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मेक इन इंडिया मोदी सरकार के महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक योजना रही है। मगर इस योजना का फायदा कहां हुआ और किस वर्ग को हुआ इसका आंकडा अभी तक सामने नहीं आया है। मेकर इंडिया के द्वारा कुछ विदेशी कंपनियां भारत में निवेश करने के लिए आकृषित हुई।
मगर परिणाम कुछ खास नहीं रहे। सरकार की इस योजना की कठोरता का इससे ही पता चलता है कि अब मेक इन इंडिया योजना के दौबार नाम बदलकर बॉय इन इंडिया के नाम से लॉच करने वाली है।
कानून व्यवस्था
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खुद को हर मोर्चे पर मजबूत माने वाली बीजेपी की सरकार के राज में भी कानून व्यवस्था का हर भी बाकी सरकारों जैसा ही रहा है। हर दिन गौरक्षा के नाम पर हिंसा, नक्सलवाद और रेप जैसी आपारधिक घटनाये हर दिन देखने और सुनने को मिलती है।
इस साल फरवरी में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकडों के अनुसार पूरे देश में छोटे-बड़े अपराध 28,51,563 हुए। अकेले एमपी में 2,72,423 हुए। हत्या-अपहरण के मामले में यूपी नंबर वन है। लूट के मामलों में महाराष्ट्र देश में पहले नंबर पर है। ये सभी आंकडे मोदी सरकार की कानून व्यवस्था की सच्चाई बताती हैं।
गंगा सफाई अभिया
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बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी गंगा नहीं को लेकर शुरू से गंभीर रहे हैं। गंगा की सफाई को लेकर मोदी सराक ने गंगा सफाई अभियान को भी चलाया। मगर इस अभियान का परिणाम सरकार की श्रर्द्धा पर सवाल खड़े करता है। सरकार की इतनी मेहनत के बाद भी गंगा में गिरने वाले गंदे नाले और ट्रेनरियों का दूषित पानी बंद नही हो रहा है।
मानव विकास पर भी मोदी सरकार का भी कुछ खास योगदान नहीं रहा है। 2016 में जारी यूएनडीपी की मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार विकास सूचकांक में शामिल 188 देशों की सूची में भारत 130वें पायदान से फिलकर 131वें पायदान पर आ गया है। जबकि तमाम विपरीत परस्थितियों के बावजूद भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत से ज्यादा रहा है।