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एक ऐसा गांव जो मछलियों से करता है 4 करोड़ का बिजनेस, पढ़ें पूरी कहानी

Sun, 05 Feb 2017 05:56 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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वर्सोवा का गांव
क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव है, जहां केवल 4000 घर हैं और उनकी वार्षिक आय 4 सौ करोड़ रुपये है। यहां बड़ी-बड़ी इमारतें हैं। 300 मछुआरी जहाज हैं। चार हजार घर हैं, जिनकी वार्षिक आय 4 सौ करोड़ रुपए है। इस गांव में कोल्ड स्टोरेज और आइस फैक्ट्री भी है।
 
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वर्सोवा का गांव
मुंबई के वर्सोवा में कोलिवाड़ा गांव है। पश्चिम तट पर बरगद के पेड़ों से घिरा यह गांव तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की आम जीवन शैली से बिल्कुल ही अलग है। यहां महिलाओं के दिन की शुरुआत  दोपहर दो बजे से होती है। वे बीच के किनारे पहुंचती हैं और उतराई हुई मछलियों को पकड़ती हैं। फिर वह उसे सूर्य अस्त होने तक बेचती हैं। फिर बची हुई मछलियों को वे ट्रकों में भरकर क्रॉउफार्ड मार्केट में भेज देती हैं, जहां से समुद्री खाद्य निर्यातकों द्वारा उन्हें बाहर भेज दिया जाता है। 

 
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वर्सोवा का गांव

मछलियों के व्यवसाय से यहां की रहने वाली 'कोली' जनजाति काफी समृद्ध है। यहां बड़ी-बड़ी इमारतें हैं। यहां 300 मछुआरी जहाज हैं। चार हजार घर हैं, जिनकी वार्षिक आय 4 सौ करोड़ रुपए है। इस गांव में कोल्ड स्टोरेज और आइस फैक्ट्री भी है।

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वर्सोवा का गांव


गांव में चार सहकारी सोसायटी हैं, जिसमें 4000 सदस्य और 271 मछुआरी नावें हैं। 15 साल पहले तक सोसायटी ही मछली की बिक्री की जिम्मेदारी संभालती थी। फिर व्यवसाय में तेजी आई और अब अब हर मछुआरा खुद ही सौदा करता है। हालांकि, डीजल और बर्फ सोसायटी ही उपलब्ध कराती है। सोसायटी मछली का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर देती हैं जिससे कम कीमत पर किसी को भी बिक्री की इजाजत नहीं है।
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वर्सोवा का गांव

गांव के घरों में लगे संगमरमर और ग्रेनाइट इसके साथ-साथ उसमें मौजूद गैजेट्स खुद ही गांव की समृद्धि को बयान कर देते हैं।
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वर्सोवा का गांव

वर्सोवा में 3000 सक्रिय मछुआरे हैं। इस व्यवसाय को पुरुष प्रधान माना जाता है, लेकिन यहां के 80 प्रतिशत घरों में महिलाएं इसमें भागीदारी निभा रही हैं। वे निर्यातकों से डील तक करती हैं।
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वर्सोवा का गांव

इस गांव के रहने वाले लोगों के 25-30 मछुआरे जहाज रोजाना ताजी मछलियां पकड़कर लौटते हैं। इसमें एक मछुआरा जहाज लगभग 3 लाख रुपए कीमत की मछलियां पकड़कर लाता है।
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वर्सोवा का गांव


हालांकि, समुद्र में सीवेज का गंदा पानी बहाने की वजह से कारोबार प्रभावित हो रहा है। इससे परेशान लोगों को लगभग 50 मिल्स ज्यादा दूरी तय करके मछलियां पकड़ने जाना होता है।
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