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यूपी: बड़े दलों की बेरुखी से बाहुबलियों के सपने टूटे, अरमानों पर यूं फिरा पानी

Sat, 06 Apr 2019 07:47 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुख्तार अंसारी-धनंजय सिंह - फोटो : Amar Ujala
भाजपा, कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन लोकसभा चुनाव 2019 में अपनी छवि को लेकर बेहद सतर्क हैं। पार्टियों के रणनीतिकारों ने साफ लकीर खींच दी है कि किसी भी ऐसे प्रत्याशी को टिकट नहीं मिले, जिसकी छवि आम जनता के बीच खराब है। इस सख्ती ने चुनाव लड़ने को आतुर पूर्वांचल के करीब आधा दर्जन बाहुबलियों के सपने तोड़ दिए हैं। आइए जानते हैं किन-किन बाहुबलियों के अरमानों पर पानी फिर गया। 
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मुख्तार अंसारी - फोटो : Social Media
मुख्तार अंसारी 
मुख्तार अपने बेटे अब्बास को बसपा से चुनाव लड़ाना चाहते थे। लेकिन बसपा अपने कोटे की घोसी सीट से अतुल राय और गाजीपुर से मुख्तार के बड़े भाई अफजाल अंसारी को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। 
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विजय मिश्र - फोटो : Social Media
विजय मिश्रा 
2012 में सपा और 2017 में भदोही से निर्बल इंडियन शोषित हमारा अपना दल (निषाद पार्टी) से विधायक हैं। भदोही सीट निषाद पार्टी के खाते में आती तो यहां से मैदान में उतरने की तैयारी में थे। 

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vineet singh - फोटो : अमर उजाला
विनीत सिंह
बसपा एमलएसी रहे विनीत चंदौली से उतरने की तैयारी में थे। सीट सपा के खाते में गई तो विनीत सुभासपा, निषाद दल और भासपा से भी संपर्क में थे। लेकिन विनीत के समीकरण फेल हो गए। 
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अभय सिंह - फोटो : social Media
अभय सिंह
सपा विधायक रहे अभय अकबरपुर से कमर कस रहे थे। सपा से ही टिकट की चाहत थी, लेकिन अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इनकार कर दिया। कुछ छोटे दलों को भी पकड़ा, पर बात नहीं बनी। 
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जितेंद्र सिंह बबलू - फोटो : फेसबुक
जितेंद्र सिंह बबलू
बसपा के रास्ते सियासत में घुसे जितेंद्र फैजाबाद से लड़ने की कोशिश में थे। सीट सपा कोटे में चली गई। फिर भी वह बसपा के कोटे की अन्य सीट से भी उतरने को तैयार थे। बसपा ने नहीं सुनी। 
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पूर्व सांसद धनंजय सिंह - फोटो : amar ujala
धनंजय सिंह
2009 में बसपा से सांसद और विधायक रह चुके धनंजय को बड़े दलों ने तवज्जो नहीं दी तो सुभासपा व निषाद दल से समीकरण बैठाया था, चर्चा है कि भाजपा ने साफ मना कर दिया। 
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अतीक अहमद - फोटो : अमर उजाला
अतीक अहमद
अपना दल कृष्णा गुट और गठबंधन से अतीक को उम्मीद थी। अतीक एक सीट लेने का समीकरण बना रहे थे। कांग्रेस ने पीलीभीत और गोंडा सीट अपना दल को दी, और अतीक का रास्ता बंद हो गया। 
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