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ये हैं भारत की सबसे खतरनाक स्पेशल फोर्सेस, जानिए इनके बारे में कुछ खास बातें

Sun, 30 Sep 2018 06:44 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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देश में आई आपदा हो या फिर दुश्मन की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने की बात हो, किसी भी पथ पर इनके पैर नहीं डगमगाते। भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है और कुछ मुश्किल पड़ोसियों से घिरा हुआ है, लेकिन इन जाबांजों का सिर्फ एक ही लक्ष्य होता है, किसी भी कीमत पर देश और देश के नागिरकों की सुरक्षा करना।

आमतौर पर आप सेना के नाम पर आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को ही जानते हैं, पर भारत के पास कुछ ऐसी भी स्पेशल फोर्सेस हैं, जो सबकी नजर में आये बिना दुश्मनों के दांत खट्टे करने का हुनर जानती हैं। ये बात जानकर आश्चर्य होगा कि भारतीय कमांडो फोर्स को अलर्ट रहने के लिए और दुश्मन के अचानक हुए हमले से संभलने के लिए आधे घंटे से भी कम का समय मिलता है। जानिए कुछ ऐसी ही फोर्सेस के बारे में... 
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मार्कोस मरीन कमांडो

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मार्कोस इंडियन नेवी की एक स्पेशल ऑपरेशन यूनिट है। मार्कोस मरीन कमांडो सबसे ट्रेंड और आधुनिक माने जाते हैं। मार्कोस (समुद्री कमांडो) जिसे 1987 में स्थापित किया गया था। मार्कोस कमांडो बनना आसान नहीं है। इसका प्रशिक्षण शायद दुनिया में सबसे मुश्किल है जिसमें कमांडो शारीरिक और मानसिक क्रूरता के लिए तैयार किए जाते हैं। इसका मकसद कांउटर टेररिज्म, डायरेक्ट एक्शन ऑन किसी जगह का खास निरीक्षण, अनकंवेंशनल वॉरफेयर, होस्टेंज रेस्यूकस, पर्सनल रिकवरी और इस तरह के खास ऑपरेशनों को पूरा करना है। देश के ये कमांडो जमीन, समुद्री और हवा में लड़ने के लिए पूरी तरह से सक्षम होते हैं। मार्कोस को यूएस नेवी के स्पेशल फोर्स सील्स की तरह ट्रेंड किया गया है। मार्कोस ने कारगिल वार, ऑपरेशन लीच, ऑपरेशन स्वान जैसे खतरनाक मिशन को अंजाम दिया है।
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गरुड़ कमांडो फोर्स

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इंडियन एयरफोर्स ने 2004 में अपने एयर बेस की सुरक्षा के लिए आसमानी रक्षक गरुड़ फोर्स की स्थापना की थी। गरुड़ फोर्स हवाई युद्ध में माहिर मानी जाती है। अपने हुनर से इनको पता होता है कि कैसे दुश्मन की सीमाओं में घुसकर अपने साथियों को सफलतापूर्वक बाहर लाना है। गरुण कमांडो को युद्ध के दौरान दुश्मन की सीमा के पीछे काम करने के लिए ट्रेंड किया गया है। आर्मी फोर्सेस से अलग ये कमांडो काली टोपी पहनते हैं। बाकी फोर्स से अलग गरुड़ फोर्स सिर्फ एयरफोर्स के सैनिकों को ही गरुड़ कमांडो बनने का मौका देती है। इनकी ट्रेनिंग 72 हफ्तों की होती है, जबकि पूरी तरह से गरुड़ फोर्स में शामिल होने में लगभग 3 साल तक का समय लग जाता है। इनका लक्ष्य होता है ‘प्रहार से सुरक्षा’। यह हर तरह के प्रहार से देश की सुरक्षा करने के लिए तैयार रहते हैं।

 

कमांडो फोर्स कोबरा

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कोबरा कमांडो भारत की सबसे बेहतरीन फोर्सेस में से एक है। कोबरा फोर्स केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की स्पेशल फोर्स है। इन्हें भेष बदलकर दुश्मन पर हमला करने की खास ट्रेनिंग दी जाती है। ये दुनिया के बेस्ट पैरामिलिट्री फोर्सेस में से एक है, इसके लिए इन्हें खास ‘गोरिल्ला ट्रेनिंग’ दी जाती है। यह घात लगाकर मारने में एक्सपर्ट होते है। इन्हें नक्सलियो से लड़ने के लिए भी भेजा जाता है। कोबरा फोर्स के कारनामे हमेशा गुप्त ही रहते हैं। दिल्ली में संसद और राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा के लिए भी इन्हें तैनात किया गया है।
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घातक फोर्स

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घातक फोर्स का काम है भारतीय थल सेना के साथ काम करना। यह एक 20 लोगों की पलटन होती है, जिसका काम है दुश्मन को चौकाना और फिर उस पर हमला करना है। यह थल सेना से आगे चलकर काम करते हैं, ताकि सेना को आने वाले खतरों का पहले ही पता चल जाए। यह दुश्मन के इलाके में छापा मारते हुए जाते हैं। यही नहीं, बड़े-बड़े जंगी हथियारों से यह दुश्मन पर दूर बैठे हुए भी वार कर सकते हैं। कारगिल की जंग में भी इनका सहयोग रहा था। इनकी ट्रेनिंग बहुत ही कठिन व खतरनाक होती है। इन्हें पर्वतारोहण और 50-60 किलोमीटर तेजी से चलने की ट्रेनिंग दी जाती है। इन्हें ट्रेनिग के दौरान हाथों में बंदूक पकड़कर और पीठ पर 20 किलो वजन लेकर मीलों दौड़ाया जाता है। 
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एलीट पैराकमांडोज

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एलीट पैराकमांडोज के कमांडो इजराइली टेओर असॉल्ट राइफल से लैस होते हैं। इंडियन आर्मी के एलीट पैराकमांडोज ने इंडो-म्यांमार बार्डर पर सर्जिकल मिशन को अंजाम दिया। इस कमांडो यूनिट का निर्माण भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 में हुई जंग के दौरान हुआ था। यह सिर्फ जमीन नहीं, हवा में भी लड़ सकती है। एलीट पैरा कमांडो ने 1971 और 1999 में हुई जंग में बहुत अहम भूमिका निभाई थी। पैरा कमांडो को पैराशूट से कूदकर दुश्मन के इलाकों में अंदर तक घुसने में महारत हासिल होती है। ये भारतीय सेना में एकमात्र इकाई है जो अपने शरीर पर टैटू रखने की अनुमति देती हैं, ऐसा कहा जाता है कि हजारों से केवल 10 से 20 प्रतिशत लोग ही इसकी ट्रेनिंग पास कर पाते हैं।

इंडियन आर्मी के ट्रेंड कमांडो दुश्मनों को छलने के लिए विशेष ड्रेस का इस्तेमाल करते हैं। इन ड्रेसों का हल्का रंग रेगिस्तान में और गाढ़ा रंग हरियाली के बीच उन्हें छिपने में मदद करता है। कमांडो एक खास झिल्लीदार सूट भी पहनते हैं, जिन्हें किसी वातावरण में छिपने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। स्पेशल फोर्स पर्पल बैरेट पहनते हैं और इनकी इजराइली टेओर असॉल्ट राइफल इन्हें पैरामिलिट्री फोर्स से अलग बनाती है।
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एसपीजी और एनएसजी तो आप जानते ही हैं... 

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स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) : अपने ट्रेडमार्क सफारी सूट में दिखने वाली एसपीजी को देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है। इसका गठन 1985 में पूर्व प्रधानंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद किया गया था। अब इसके कमांडो फोर्स पूर्व प्रधानमंत्री और उनके परिवारों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

एनएसजी/ब्लैक कैट कमांडो : एनएसजी या ब्लैक कैट कमांडो देश में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध स्पेशल कमांडो फोर्स में से एक हैं। यह फोर्स अपने काम को करने में बिल्कुल भी नहीं हिचकिचाती। फिर चाहे वह दुश्मन को ढूंढकर निकालना हो या फिर देश में घुसे आतंकवादियों को मारना हो। 1984 में इस फोर्स का गठन किया गया था। यह फोर्स 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा' के लक्ष्य पर काम करती है। 26/11 के मुंबई हमले में बिना किसी मुसीबत के सफलतापूर्वक आतंकियों से निपटने में इन कमांडो का बहुत बड़ा हाथ था। 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' जैसे बड़े मिशन को भी इस फोर्स ने बड़ी समझदारी से संभाला था।
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