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अलविदा धरती के 'भगवान': कोई आखिरी सांस तक करता रहा इलाज, किसी ने यूं गंवा दी जान

Wed, 26 May 2021 03:55 PM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंडियन मेडिकल असोसिएशन यानी आईएमए के मुताबिक, कोरोना महामारी की वजह से अब तक 513 चिकित्सकों की मौत हो चुकी है। इनमें दिल्ली के ही 100 से ज्यादा डॉक्टर्स शामिल हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे देश में त्राहि-त्राहि मचा दी। हालात इस कदर बिगड़ते चले गए कि हर दूसरे शख्स ने इस महामारी में अपना कुछ न कुछ गंवा दिया। हर किसी के पास अपनी दर्दभरी कहानी है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने सबसे ज्यादा नुकसान हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स को उठाना पड़ा। इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने भी एक बयान जारी करते हुए कहा कि अब तक 513 चिकित्सकों को हम खो चुके हैं। इनमें दिल्ली के ही 100 से ज्यादा डॉक्टर्स शामिल हैं। इस रिपोर्ट में हम आपको रूबरू कराते हैं धरती के उन 'भगवानों' से, जिन्होंने हम सबको कोरोना महामारी से बचाते हुए अपनी जान गंवा दी और अपनी आखिरी सांस तक मरीजों का इलाज करते रहे। 
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डॉ. अनस मुजाहिद - फोटो : सोशल मीडिया
मौत से एक दिन पहले तक किया इलाज
महज 26 साल के डॉ. अनस मुजाहिद बेहद शांत स्वभाव के शख्स थे। अपने हंसमुख अंदाज और मेहनत से वह मरीजों की आधी बीमारी पलभर में छू कर देते थे, लेकिन इस उम्दा चिकित्सक को कोरोना के क्रूर पंजों ने 9 मई को हमसे छीन लिया। अनस कोरोना से जान गंवाने वाले सबसे युवा डॉक्टर थे। दरअसल, अनस ईद पर इफ्तारी के लिए अपने परिवार से मिलने घर गए थे। लौटते वक्त वह बुखार की चपेट में आ गए। कोरोना टेस्ट कराया तो वह संक्रमित मिले और उसके बाद अनस की हालत बिगड़ती चली गई। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन कुछ ही घंटे में उनका निधन हो गया। साथी चिकित्सक बताते हैं कि मौत से एक दिन पहले तक अनस मरीजों की सेवा करते रहे।
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डॉ. डिंपल अरोड़ा चावला - फोटो : सोशल मीडिया
अजन्मे बच्चे को गंवाया और अपनी जिंदगी भी
अपने आखिरी वीडियो में दुनिया से कोरोना से सावधान रहने की अपील करने वाली डॉ. डिंपल अरोड़ा चावला को भी इस महामारी ने हमसे छीन लिया। 11 अप्रैल को वह कोरोना संक्रमित हो गईं। उस वक्त वह गर्भवती थीं। कोरोना से जब उनकी सांसें उखड़ने लगीं तो उन्होंने एक वीडियो बनाया। अपनी कमजोर आवाज में उन्होंने कहा, 'प्लीज एव्रीवन...प्लीज टेक केयर।' डॉ. डिंपल की मौत के बाद यह वीडियो उनके पति डॉ. रवीश चावला ने पोस्ट किया था। 19 अप्रैल को डॉ. डिंपल ने अपने अजन्मे बच्चे को खो दिया और अगले दिन यानी 20 अप्रैल को वह इस दुनिया को अलविदा कह गईं।

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डॉ. जगदीश मिश्रा - फोटो : सोशल मीडिया
जहां 50 साल सेवा की, वहां नहीं मिला वेंटिलेटर बेड
प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरु अस्पताल में 50 दशक तक अपनी सेवाएं देने वाले डॉ. जगदीश मिश्रा के साथ जो हुआ, वैसा किसी के साथ भी न हो। उन्हें उसी अस्पताल में वेंटिलेटर बेड नसीब नहीं हुआ, जहां वह मरते दम तक मरीजों की सेवा करते रहे। दरअसल, वह 13 अप्रैल को कोरोना की चपेट में आए और उनकी हालत काफी तेजी से बिगड़ने लगी। उस वक्त स्वरूप रानी नेहरु अस्पताल में कोई भी वेंटिलेटर बेड नहीं था। डॉ. मिश्रा कोविड से जूझते रहे और 25 अप्रैल को उनका निधन हो गया। 
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डॉ. केके अग्रवाल - फोटो : सोशल मीडिया
पिक्चर अभी बाकी है...कहने वाले डॉ. केके अग्रवाल
डॉ. केके अग्रवाल को कौन नहीं जानता...देश के बेहतरीन फिजिशियन और कार्डियोलॉजिस्ट...जब लोग कोरोना से भयभीत थे तो वह घंटों तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोगों से बातचीत करते। उनका डर दूर करते और तमाम सवालों के जवाब देते। यहां तक कि अपने आखिरी दिनों में वह लोगों को कोरोना से लड़ने के तरीके समझाते रहे। अपने आखिरी वीडियो में डॉ. अग्रवाल ऑक्सीजन पाइप लगाए नजर आए थे। उन्होंने कहा था, 'मुझे कोविड निमोनिया है, जो काफी तेजी से फैलता है...लेकिन तब भी राजकपूर की बात याद रखो। पिक्चर अभी बाकी है.. शो मस्ट गो ऑन...'
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डॉ. माहा बशीर - फोटो : PTI
गर्भवती होने के बावजूद करती रहीं इलाज
मूल रूप से केरल से ताल्लुक रखने वाली डॉ. माहा बशीर दुबई में पली-बढ़ीं। हालांकि, अपने मेडिकल करियर के लिए वह बंगलूरू आ गईं। जब देश कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में आया तो डॉ. बशीर गर्भवती थीं। इसके बावजूद वह मरीजों की सेवा करती रहीं, लेकिन खुद भी महामारी की चपेट में आ गईं। 26 अप्रैल को उन्होंने अपने अजन्मे बच्चे को खो दिया और 27 अप्रैल को वह खुद भी यह दुनिया छोड़कर चली गईं। बता दें कि डॉ. बशीर का निकाह महज 8 महीने पहले ही हुआ था। 
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डॉ. मनीषा जाधव - फोटो : PTI
एफबी पर लिखा अंतिम गुड मॉर्निंग और कह दिया अलविदा
51 साल की डॉ. मनीषा जाधव मुंबई के सेवरी टीबी हॉस्पिटल में टीबी स्पेशलिस्ट और चीफ मेडिकल ऑफिसर थीं। वह मार्च 2020 से ही अस्पताल क्लीनिकल और प्रशासनिक दोनों जिम्मेदारी संभाल रही थीं। वह लगातार यह सुनिश्चित करती रहीं कि उनके स्टाफ को खाना और ट्रेवल फैसिलिटी के साथ-साथ सुरक्षा उपकरण भी मिलते रहे। हालांकि, अपनी जिम्मेदारियां निभाते-निभाते वह महामारी की चपेट में आ गईं। 19 मई को उनका निधन हो गया। डॉ. मनीषा का फेसबुक पर अंतिम फेयरवेल पोस्ट था, 'शायद यह अंतिम गुड मॉर्निंग है। शायद मैं आपसे फिर इस प्लेटफॉर्म पर न मिलूं। अपना ध्यान रखना आप सब। शरीर मरता है, आत्मा नहीं। आत्मा नश्वर है।'

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डॉ. प्रदीप बिजलवान - फोटो : PTI
अंत तक करते रहे इलाज, खुद को नहीं मिला ऑक्सीजन
डॉ. प्रदीप बिजलवान अक्सर कहते थे कि जिनको सबसे ज्यादा जरूरत है, उनकी सेवा करना ही अकेला काम है, जो मैं करना चाहता हूं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी वंचितों की सेवा में गुजार दी। अपने अंतिम दिनों में भी वह मरीजों का इलाज करते रहे। अप्रैल 2021 के दौरान वह कोरोना की चपेट में आ गए और ऑक्सीजन की कमी से उनकी जान चली गई। उनके एक दोस्त ने बताया कि डॉ. बिजलवान ऐसे शख्स थे, जिन्हें पैसों में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं थी। उनका बस एक ही सपना था जरूरतमंदों की सेवा करना। अपने अंतिम दिनों में भी वह बेघरों के लिए कोविड-19 क्लीनिक चला रहे थे।
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डॉ. शुभम उपाध्याय - फोटो : @ChouhanShivraj
'तूफान' ने छीन ली इस डॉक्टर की जिंदगी
30 साल के डॉ. शुभम उपाध्याय बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में कोरोना से जूझ रहे मरीजों की हिम्मत जमकर बढ़ाते थे। हालांकि, इस दौरान वह भी कोरोना की चपेट में आ गए। करीब एक महीने तक उन्होंने संघर्ष किया, लेकिन 25 नवंबर 2020 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गए। दरअसल, उनके फेफड़ों में 100 फीसदी संक्रमण हो गया था। जान बचाने के लिए लंग ट्रांसप्लांट होना था, जिसके लिए उन्हें चेन्नई एयरलिफ्ट किया जाना था, लेकिन उस वक्त एक चक्रवात की वजह से ऐसा नहीं हो सका। 
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