कहते हैं न जो स्वभाव का मीठा हो, वो सबको अपना बना ही लेता है। यही खूबी हमारी मातृभाषा हिंदी में भी है, जो अपनी मिठास के कारण विश्व फलक के माथे की बिंदी बन रही है। सहजता और आत्मीयता से संवाद होने के कारण ही विश्व आज इसके सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक महत्त्व को भी समझ रहा है। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे 'हिंदी हैं हम' अभियान के अगले चरण में बुधवार को आयोजित वेबिनार में दुनिया के अलग-अलग देशों से लोगों ने हिस्सा लिया। वेबिनार में शामिल भारतीय परंपराओं के पोषक अतिथियों ने तय किया कि हम सभी अपनी हिंदी भाषा पर गर्व करेंगे, सम्मानित महसूस करेंगे, साथ ही हिंदी को भी सम्मान देंगे और दिलवाएंगे भी।