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सत्ता का संग्राम: पांचों राज्यों में ये थे सबसे दागी 15 उम्मीदवार, किसे नकारेगी जनता और किसे मिलेगा एक और मौका?

Thu, 10 Mar 2022 11:16 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तर प्रदेश समेत पांचों चुनावी राज्यों के परिणाम आ गए हैं। यूपी के अलावा उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में प्रत्याशियों और उनके राजनीतिक दलों के भाग्य का फैसला हो गया है। 10 फरवरी को पहले चरण के लिए मतदान हुआ था। आखिरी चरण के लिए वोटिंग सात मार्च को हुई थी। पढ़िए अमर उजाला की यह खास रिपोर्ट...
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यूपी चुनाव 2022 - फोटो : Amar Ujala
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे गुरुवार को घोषित हो रहे हैं। जनता से किसे चुना और किसे सबक सिखाया? धीरे-धीरे सामने आने लगा है। उन दागी उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला भी हो रहा है, जिन पर राजनीतिक पार्टियों ने दांव खेला था। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा दागी उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा गया। पंजाब और मणिपुर में कुछ उम्मीदवारों पर कई मामले दर्ज हैं। हालांकि, उत्तराखंड और गोवा में ज्यादातर उम्मीदवारों पर दर्ज केस दहाई आंकड़े से भी कम हैं। ऐसे में अमर उजाला आपको बता रहा है पांचों राज्यों के उन 15 उम्मीदवारों के बारे में जिन पर सबसे ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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आजम खान - फोटो : Amar Ujala
1. आजम खान
समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान पर सबसे ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। रामपुर से सांसद आजम खान को पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव में रामपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। इससे पहले 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भी आजम खान को जीत हासिल हुई थी। इस वक्त उन्होंने भाजपा के शिव बहादुर सक्सेना को एक लाख से ज्यादा वोट से हराया था।
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मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान। - फोटो : Amar Ujala
2. मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान
मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान को सपा ने रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा था। इनका मुकाबला बसपा के अध्यापक शंकर लाल, अपना दल (सोनेलाल) के हैदर अली खान उर्फ हमजा मियां से था। अब्दुल्ला ने 2017 में भी 53 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। इस बार भी अब्दुल्ला को जनता ने भारी मतों से विजयी बनाया।

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अतुल प्रधान। - फोटो : Amar Ujala
3. अतुल प्रधान
मेरठ की सरधना विधानसभा सीट से सपा ने अतुल प्रधान को टिकट दिया था। इन पर कुल 38 मामले दर्ज हैं। इनका मुकाबला भाजपा के संगीत सिंह सोम से था। इस मुकाबले में भाजपा के संगीत सोम हार गए हैं। संगीत सोम इससे पहले दो बार यहां से चुनाव जीते थे, जबकि अतुल प्रधान दो बार चुनाव हारे थे। सरधना सीट पर ऐसा पहली बार हुआ है, जब सपा का कोई प्रत्याशी जीता है। 
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संदीप यादव। - फोटो : Amar Ujala
4. संदीप यादव
प्रयागराज की इलाहाबाद उत्तर सीट से सपा ने इस बार संदीप यादव को उम्मीदवार बनाया था। इससे पहले 2017 में इस सीट से भाजपा के हर्षवर्द्धन वाजपेई को जीत हासिल हुई थी। उन्हें कुल 1.72 लाख वोट हासिल हुए थे।
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योगेश वर्मा। - फोटो : Amar Ujala
5. योगेश वर्मा
सबसे ज्यादा दागी उम्मीदवारों में पांचवें नंबर में सपा के योगेश वर्मा का नाम आता है। इनका मुकाबला इस सीट पर भाजपा नेता और मौजूदा विधायक दिनेश खटीक से था। 2017 के विधानसभा चुनाव में दिनेश ने 36 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी।
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नसीर अहमद खान। - फोटो : Amar Ujala
6. नसीर अहमद खान
रामपुर की चमरुआ विधानसभा सीट पर सपा ने अपने मौजूदा विधायक नसीर अहमद खान को टिकट दिया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में नसीर ने 34 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी।

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अजय कुमार लल्लू। - फोटो : Amar Ujala
7. अजय कुमार लल्लू
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू पर कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर भरोसा जताया था। उन्हें उनकी ही विधानसभा सीट तमकुही राज से चुनावी मैदान में उतारा गया था। पिछली बार उन्होंने 18 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी। इस बार भी उन्होंने जीत हासिल की है।

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सुधीर सिंह। - फोटो : Amar Ujala
8. सुधीर सिंह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर की सहजवां विधानसभा सीट से बसपा ने सुधीर सिंह को उम्मीदवार बनाया था।  2017 के विधानसभा चुनाव में भी यहां की जनता ने भाजपा की शीतल पांडेय को 15 हजार से ज्यादा वोटों से विजयी बनाया था।

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विजय मिश्रा। - फोटो : Amar Ujala
9. विजय मिश्रा
भदोही की ज्ञानपुर सीट से प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के विजय मिश्रा चुनावी मैदान में थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में विजय ने निर्बल भारतीय शोषित हमारा आम दल के बैनर तले चुनाव लड़ा था और 20 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी।

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सपम कंगलेइपाल मेइतेइ - फोटो : Amar Ujala
10. सपम कंगलेइपाल मेइतेइ
मणिपुर की इंफाल पूर्व विधानसभा सीट से सपम कंगलेइपाल मेइतेइ निर्दलीय चुनावी मैदान में चुनौती पेश कर रहे थे। सपम पर कुल 24 मामले दर्ज हैं। इनका मुकाबला कांग्रेस के अचोइबम देबेन सिंह और भाजपा के खोंगबंताबम इबोंचा से था।

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रविदास मेहरोत्रा। - फोटो : Amar Ujala
11. रविदास मेहरोत्रा
लखनऊ मध्य विधानसभा सीट से सपा से रविदास मेहरोत्रा को चुनाव में उतारा है। इनका मुकाबला इस सीट से मौजूदा विधायक बृजेश पाठक से था। बृजेश पाठक ने 2017 के विधानसभा चुनाव में पांच हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी।

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यशभद्र सिंह। - फोटो : Amar Ujala
12. यशभद्र सिंह
सुल्तानपुर की इसौली विधानसभा सीट से बसपा ने यशभद्र सिंह को चुनावी मैदान में उतारा था। उनका सामना सपा नेता और सपा के मोहम्मद ताहिर खां और भाजपा के ओम प्रकाश पांडेय से है। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां से सपा के अबरार अहमद को जीत हासिल हुई थी।

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लुईस खुर्शीद। - फोटो : Amar Ujala
13. लुईस खुर्शीद
फर्रुखाबाद विधानसभा सीट से कांग्रेस ने लुईस खुर्शीद को टिकट दिया था। इनका मुकाबला भाजपा के मेजर सुनील दत्त तिवारी, सपा की सुमन शाक्य और बसपा के विजय कुमार कटियार से था। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में मेजर सुनील दत्त तिवारी को 45 हजार से ज्यादा वोट से जीत हासिल हुई थी।

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नाहिद हसन - फोटो : Amar Ujala
14. नाहिद हसन
शामली की कैराना विधानसभा सीट से सपा ने नाहिद हसन को उम्मीदवार बनाया था। विवादों में घिरे उम्मीदवार के नाम के एलान के साथ ही विपक्षी पार्टियों ने सपा को घेरना शुरू कर दिया था। नाहिद के सामने भाजपा ने मृगांका सिंह, बसपा ने राजेंद्र और कांग्रेस ने अहलक को चुनावी मैदान में उतारा था। 2017 में नाहिद ने इसी सीट से 21 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी।
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सिमरजीत सिंह - फोटो : Amar Ujala
15. सिमरजीत सिंह
लुधियाना की आत्म नगर विधानसभा सीट से लोक इंसाफ पार्टी के सिमरजीत सिंह चुनावी मैदान में हैं। 2017 में भी इन्होंने ही जीत हासिल की थी। इस बार इनका मुकाबला आप के कुलवंत सिंह सिद्धू, कांग्रेस के कमलजीत सिंह करवाल और भाजपा के प्रेम मित्तल से था।
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