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CWG 2022: पिता ने रोजाना 40 किमी दूध-घी पहुंचाया, बेटे ने सोना लौटाया, ऐसी है नवीन की सफलता की कहानी

Mon, 08 Aug 2022 02:58 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, गन्नौर, सोनीपत (हरियाणा)

सार

नवीन की मां ने कहा कि  घर लौटने पर लाडले को खिलाऊंगी मनपसंद हलवा, पूरी और सब्जी। पहलवान नवीन मलिक के स्वर्ण पदक जीतने पर परिवार व गांव में खुशी का माहौल है।
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नवीन मलिक, परिवार में उसके द्वारा जीती गदा दिखाते परिजन। अखाड़े में मिठाई बांटते साथी पहलवान। - फोटो : अमर उजाला
कॉमनवेल्थ खेल में स्वर्ण पदक जीतने वाले हरियाणा के सोनीपत के पुगथला गांव के पहलवान नवीन मलिक के परिवार में खुशी का माहौल है। परिवार के साथ ही पूरे गांव को लाडले का वापस लौटने का बेसब्री से इंतजार है। नवीन की मां गुणवती ने कहा कि बेटे को हलवा बहुत पसंद है। वह जब घर लौटकर आएगा तो उसकी पसंद का हलवा, लड्डू के साथ पूरी और सब्जी खिलाऊंगी। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि स्वर्ण पदक जीत कर लौटने पर लाडले का धूमधाम से स्वागत किया जाएगा। 

नवीन मलिक का जन्म गांव पुगथला में 21 नवंबर, 2002 को हुआ था। नवीन ने फिलहाल 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है और भारतीय वायुसेना में कार्यरत हैं। नवीन को बचपन से ही पहलवान बनने का शौक था। उसने 3 साल की आयु से ही खेलना शुरू कर दिया था। उसके पिता व बड़ा भाई प्रवीन भी पहलवानी करते थे। नवीन के अलावा उनकी तीन बहनों भी हैं, जो शादीशुदा हैं। सभी भाई बहनों में नवीन सबका लाडला है। 
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स्वर्ण पदक जीतने के बाद पहलवान नवीन मलिक के परिवार में उसके द्वारा जीती गदा दिखाते परिजन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नवीन के प्रशिक्षक कुलदीप का कहना है कि नवीन बहुत मेहनती है और उसकी मेहनत का ही नतीजा है कि वह कॉमनवेल्थ में स्वर्ण जीतकर लाया है। नवीन ने एशियन चैंपियनशिप अंडर 23 में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसके बाद सीनियर एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक पर कब्जा जमाया था।

नवीन ने पहली बार कॉमनवेल्थ गेम का ट्रायल दिया था, जिसमें उसका चयन हो गया था। पहली बार में ही नवीन मलिक ने स्वर्ण पदक जीता है। परिजनों का कहना है कि आने वाली प्रतियोगिताओं में भी वह अच्छा प्रदर्शन करेगा। ओलंपिक की तैयारी भी खूब अच्छे से करेगा।
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गांव पुगथला में टीवी पर पहलवान नवीन मलिक का मुकाबला देखते माता-पिता व ग्रामीण। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल फोटो)
40 किलोमीटर दूर देने जाते थे दूध-घी
नवीन मलिक के पिता धर्मपाल का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे को पहलवान बनाने के लिए बहुत मेहनत की है। बेटे को रोजाना घर का दूध और घी देने के लिए 40 किलोमीटर तक जाते थे। इसके लिए वह पहले गांव से गन्नौर रेलवे स्टेशन पर पहुंचते थे और वहां से ट्रेन पकड़ कर आगे 10 किलोमीटर पैदल चल कर उसके अखाड़े में पहुंचते थे। स्वर्ण पदक जीतकर नवीन ने उनका नाम रोशन कर उनकी मेहनत सफल कर दी है। 

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गांव पुगथला में टीवी पर पहलवान नवीन मलिक का मुकाबला देखते माता-पिता व ग्रामीण। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अखाड़े की रसोई में खुद बनाता था खाने का सामान 
नवीन पुगथला रायपुर के अखाड़े में अभ्यास करता था। वह प्रशिक्षक बलवान से प्रशिक्षण लेने के दौरान अखाड़े की रसोई में स्वयं खाने का सामान खुद बनाता था। उसे बचपन से ही मसाले डालकर बेहतर खाना बनाने में दिलचस्पी रही। उनके प्रशिक्षक बताते हैं कि नवीन ने सदैव अपने काम स्वयं किए।  

बाल्टी में सीमेंट भरकर गट्टे मजबूत करने का जुगाड़ बनाया
जब नवीन अभ्यास करता था तो उस समय आधुनिक उपकरण कम ही थे। ऐसे में पट्टे (हाथ की कलाई) को मजबूत करने के लिए उन्होंने सीमेंट का बाल्टी में भर दिया था। जिसके सूखने के बाद उससे देशी जुगाड़ तैयार किया था। वह सीमेंट से भरी बाल्टी की मदद से गट्टे की मजबूती का अभ्यास करते थे। 
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नवीन मलिक। - फोटो : सोशल मीडिया
सर्दी में भी बनियान पहनकर घूमता था नवीन 
नवीन के साथी संदीप ने बताया कि जब वह महज सात-आठ साल का था तो भी सर्दी के मौसम में बनियान पहनकर घूमता था। उसे कहते की सर्दी लग जाएगी तो कहता था कि उसे सर्दी नहीं लगती। वह सुबह ठंडे पानी में नहाता है। जिसके चलते शरीर को उसी अनुसार ढाल लिया है। 
 


नवीन के स्वर्ण पदक जीतने पर अखाड़े में बांटी मिठाई 
कॉमनवेल्थ खेलों में पहलवान नवीन के स्वर्ण पदक जीतने पर गांव रायपुर अखाड़ा संचालक नेवी प्रशिक्षक कुलदीप सहरावत व समस्त रायपुर अखाड़ा कमेटी ने मिठाई खिलाकर खुशियां मनाई। इस दौरान पहलवान नवीन मलिक के भाई प्रवीण भी मौजूद रहे। प्रवीण ने बताया कि नवीन शुरू से बहुत ही मेहनती है। नवीन 8 वर्ष से रायपुर अखाड़ा के अंदर मेहनत कर रहा है। रायपुर अखाड़ा कमेटी ने कहा कि कड़ी मेहनत करते हुए नवीन ने देश, प्रदेश व जिले के साथ रायपुर अखाड़ा का नाम पूरे विश्व में रोशन किया है। कमेटी पूरे सम्मान के साथ अपने लाडले को अखाड़ा में लेकर आएगी। इस दौरान सतीश खत्री, जितेंद्र जागलान, नीरज पंडित, सुभाष, रविंद्र, मंजीत खत्री, दीपक, मंजेश खत्री, अमित, विकास, सुरेंद्र, प्रशिक्षक शमशेर, तेजेंद्र खत्री मौजूद रहे।
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