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किसान आंदोलन : लंबे आंदोलन से बढ़ रही ऊब, दिल्ली की सीमाओं पर भीड़ घटी, किसान नेताओं ने की ये अपील 

Fri, 19 Feb 2021 05:11 PM IST
निवेदिता वर्मा अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
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कुंडली बॉर्डर पर कम हो रही किसानों की संख्या। - फोटो : अमर उजाला
किसान आंदोलन में उतार-चढ़ाव खत्म नहीं हो रहा है। अब सरकार से बातचीत बंद होने से आंदोलन को लंबा होता देखकर दिल्ली की सीमाओं पर भीड़ कम होने लगी है। कुंडली बॉर्डर से किसान वापस चले गए और वहां टेंट खाली दिखाई देने लगे हैं। लंगरों में लगने वाली लाइन भी खत्म हो गई है। हरियाणा के किसान भी पहले के मुकाबले बॉर्डर पर काफी कम पहुंच रहे हैं। कुछ किसान धरनास्थल पर सुबह को जाकर शाम को लौट आते हैं। भीड़ कम होती देखकर पंजाब के किसान नेताओं ने महापंचायत की जगह किसानों को बॉर्डर पर लेकर पहुंचने की अपील शुरू कर दी है और इसके लिए गांव-गांव अभियान भी शुरू कर दिया है। 
 
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खाली पड़ा कुंडली बॉर्डर। - फोटो : अमर उजाला
कृषि कानून रद्द कराने के लिए पिछले 85 दिनों से किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है तो गृहमंत्री अमित शाह भी किसानों से वार्ता कर चुके हैं। इसके बावजूद कोई हल अभी तक नहीं निकल सका है, लेकिन किसानों को लगातार बातचीत होने से एक उम्मीद थी। किसानों व सरकार के बीच आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी और उसके बाद से बातचीत का रास्ता बंद पड़ा है। 
 
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लंगर स्थल भी खाली। - फोटो : अमर उजाला
इस बीच ट्रैक्टर परेड के दौरान बवाल होने पर दो दिन तक टूटता आंदोलन किसान नेताओं की भावुक अपील के बाद दोबारा खड़ा हो गया था लेकिन अब इतना समय बीतने के बावजूद सरकार से बातचीत का रास्ता न खुलने पर आंदोलन लंबा हो रहा है और किसानों का धैर्य जवाब देने लगा है। इससे किसानों ने घर वापसी शुरू कर दी है। कुंडली बॉर्डर पर भीड़ कम होने लगी है। जहां कुछ दिन पहले तक करीब 45 हजार किसान थे, वहीं अब यह आधे रह गए हैं। 
 

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खाली पड़े टेंट। - फोटो : अमर उजाला
पंजाब में किसान महापंचायतों पर बैन
कुंडली बॉर्डर पर भीड़ कम होने से किसान नेताओं की परेशानी भी बढ़ गई है पंजाब के किसान नेताओं ने सबसे पहले महापंचायतों को बंद कराने का आह्वान किया है। उनको लगता है कि किसानों को कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान को लेकर जागरूक करने के लिए महापंचायत की जा रही है। लेकिन पंजाब में किसान पहले ही जागरूक हैं और इसलिए पंजाब में इनकी जरूरत नहीं है। ऐसे में किसान नेता जितनी मेहनत महापंचायतों में कर रहे हैं, वह गांवों में अभियान चलाकर हर घर से एक किसान को बॉर्डर चलने की अपील करें। इसके लिए अभियान भी शुरू कर दिया है और पंजाब से जल्द ही काफी किसानों के बॉर्डर पर पहुंचने का दावा किया जा रहा है। 
 
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लुधियाना के जगरांव में आयोजित महापंचायत में मौजूद किसान। - फोटो : फाइल फोटो
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य बूटा सिंह का कहना है कि पंजाब में सभी किसान कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान को लेकर जागरूक हैं। इसलिए वहां से सभी को बॉर्डर पर पहुंचने के लिए कहा गया है और उसका असर दिखने लगा है। वहां से काफी किसान जल्द ही बॉर्डर पर पहुंचेंगे और बॉर्डर पर पहले से ज्यादा भीड़ दिखाई देगी। वहीं कीरती किसान यूनियन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह दीपसिंह वाला ने कहा कि किसान महापंचायतों में जुट गए थे, जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं है। इसलिए सभी को कहा गया है कि महापंचायतों की जगह बॉर्डर पर पक्के मोर्चों पर जाकर बैठें। उससे ही सरकार पर दबाव बनेगा। पंजाब से काफी किसान बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं। 

 
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