गरिमा गर्ग को मिठाई खिलाती मां सुनीता गर्ग।
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14 लाख का पैकेज छोड़ की तैयारी, प्राप्त किया 220 रैंक
सोनीपत के गुड़मंडी अग्रसेन नगर निवासी राधाकृष्ण की लाडली गरिमा गर्ग ने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में 220वां रैंक हासिल कर अपने सपनों को उड़ान दी। लाडली की उपलब्धि पर परिजन फूले नहीं समा रहे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत राधाकृष्ण का कहना है कि गरिमा तीन बहन भाइयों में सबसे छोटी है। बचपन से ही पढ़ाई में होनहार गरिमा का सपना शुरू से ही सिविल सेवा में जाने था। वर्ष 2016 में इंजीनियरिंग में 14 लाख का पैकेज मिला था, लेकिन गरिमा ने उस पैकेज को छोड़ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। गरिमा ने चार बार प्री और दो बार मेंस क्लीयर किया।
अब अपने पांचवें प्रयास में 220वां रैंक हासिल किया है। गरिमा ने अपनी 10वीं कक्षा तक की शिक्षा हिंदू विद्यापीठ से हासिल की। उसके बाद आईआईटी की तैयारी के लिए कोटा गई। वहीं डीएवी स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई की। उसके बाद बिटस पिलानी से ड्यूल डिग्री की। गरिमा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, मामा, चाचा व परिवार के अन्य सदस्यों को दिया है। गरिमा बताती हैं कि उसने परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली से एक साल तक कोचिंग की, उसके बाद सेल्फ स्टडी करती रही। सामान्य दिनों में वह 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती थी।
परीक्षा नजदीक आने पर 10 से 12 घंटे तक पढ़ाई की। इस दौरान मां सुनीता गर्ग ने हमेशा पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए ही प्रेरित किया। कभी घर का काम करने के लिए भी नहीं कहा। गरिमा गर्ग की मां सुनीता गर्ग दिल्ली में पीजीटी हैं। वे कहती हैं कि अगर बेटियों को मौका मिले तो वो भी आसमान छू सकती हैं। माता-पिता अक्सर बेटी को थोड़ी बड़ी होते ही चूल्हा-चौका सीखने का दबाव डाल सकते हैं। अगर उसे भी पढ़ने की छूट दी जाए तो वह खुद को साबित कर सकती है। मैंने अपने बच्चों को हमेशा पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया। बेटा आज अमेरिका में वैज्ञानिक है तो दूसरी बेटी अमेजोन में प्रबंधक है।