सोनीपत में बीसवां मील चौक के पास ट्रकों की भिड़ंत में क्लीनर जिंदा जल गया। अमृतसर के गांव फोबा निवासी हरमनप्रीत सिंह ने हादसे का दर्द बयां किया। बताया कि ट्रकों की टक्कर होते ही आग लग गई, वह खिड़की खोलकर बाहर कूदा, ताया भाई अंदर ही फंसा रह गया।
विज्ञापन
1 of 5
जितेंदर का फाइल फोटो। ट्रक में फंसे चालक को निकालने का प्रयास करते दमकलकर्मी व पुलिस।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मेरी आंखों के सामने ही मेरा ताया भाई (ताऊ का बेटा) जिंदा जल गया। वह बचाने को चिल्लाता रहा और मैं कुछ नहीं कर सका। यह कहते-कहते ट्रक चालक हरमनप्रीत की आंखें छलक गईं और गला भर आया। हरमनप्रीत ही उस ट्रक को चला रहा था, जिसके दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उसका क्लीनर व ताऊ का बेटा जितेंदर सिंह जिंदा जल गया। सोनीपत में नेशनल हाईवे पर हुए हादसे के बाद वहां खड़े हरमनप्रीत ने अमर उजाला से बातचीत की तो वे हादसे में मिले दर्द को छिपा नहीं सके।
पंजाब के जिला अमृतसर के गांव फोबा निवासी हरमनप्रीत सिंह ने बताया कि उनके पिता ट्रांसपोर्टर है और उनके अपने ट्रक है। एक ट्रक को सोमवार दोपहर बाद चालक ताजप्रीत सिंह कश्मीर से लेकर लौटा था। वह उसमें सेब भरकर लाया था। वहां से देर शाम ताजप्रीत ट्रक लेकर त्रिपुरा के अगरतला के लिए चल पड़ा।
उसी दौरान उन्हें जालंधर से गुवाहाटी के लिए आलू लेकर जाने थे। जिस पर वह भी जालंधर आ गए और वहां से आलू से भरा ट्रक लेकर गुवाहाटी के लिए चल दिए। उनके साथ उसके ताऊ का बेटा जितेंदर था। जितेंदर हमउम्र था, और उसका बहुत खयाल रखता था। दोनों ट्रक एक साथ चल रहे थे। रात को वह पंजाब के खन्ना पहुंचे और वहां पर सभी ने एक साथ खाना खाया था। उसके बाद वह आगे चल पड़े थे। उसे क्या पता था कि वह आखिरी बार अपने ताया भाई के साथ खाना खा रहा है।
विज्ञापन
3 of 5
बीसवां मील के पास हादसाग्रस्त ट्रक को देखते राहगीर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
‘कैसे करूंगा ताया-ताई का सामना’
हरमनप्रीत ने बताया कि जितेंदर बुजुर्ग माता-पिता की बुढापे की लाठी था। उसे समझ नहीं आ रहा कि वह ताया मंगल सिंह और ताई हरजिंद्र कौर का सामना किस तरह करेगा। जितेंदर ही 70 और 65 साल के ताया-ताई की सेवा कर रहा था। उसने अभी तक शादी तक नहीं की थी। उनके बड़े भाई भूपेंद्र शादी के बाद अलग रह रहे हैं। ऐसे में ताई-ताया की सेवा जितेंदर कर रहा था। हरमनप्रीत ने कहा कि तमाम उम्र यह दुख रहेगा कि वह अपने भाई को बचा नहीं सके।
4 of 5
हादसे में क्षतिग्रस्त वाहन।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बचाने के प्रयास में जला हाथ
हरमनप्रीत बताते हैं कि हादसे के बाद अचानक लगी आग से वह बाहर निकल आए, लेकिन भाई अंदर ही फंसा रह गया। उसने जब बचाने की कोशिश की तो उसका हाथ भी जल गया। उसका भाई चिल्लता हुआ चालक खिड़की की तरफ तक आ गया था। जब उसने उसे वहां से निकालने का प्रयास किया तो उसी दौरान उसका हाथ जल गया था।
प्रत्यक्षदर्शी बोले - इतना भयावह हादसा कभी नहीं देखा
प्रत्यक्षदर्शी मुकेश ने बताया कि जब वह सुबह छह बजे फैक्टरी से आए तो ट्रक में आग लगी थी और अंदर एक व्यक्ति फंसा था। हमें बहुत दुख है कि उसे बचा नहीं पाए। हमारी आंखों के सामने ही वह जिंदा जल गया। इतना भयावह हादसा मैंने मेरी 35 साल की उम्र में कभी नहीं देखा।