हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने बुधवार रात 67 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। इसमें 17 विधायकों और आठ मंत्रियों को दोबारा टिकट दी गई है। पार्टी ने आठ महिलाओं को भी उम्मीदवार बनाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को करनाल की जगह कुरुक्षेत्र के लाडवा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। सोनीपत, रोहतक, जींद, नारनौल, रेवाड़ी, झज्जर से 17 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। आइए जानते हैं सभी का प्रोफाइल, क्यों मिला टिकट...
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डॉ. कृष्णलाल मिड्ढा।
- फोटो : अमर उजाला
1. नाम : डाॅ. कृष्ण लाल मिड्ढा
विधानसभा क्षेत्र : जींद
पार्टी : भाजपा
उम्र : 54
शिक्षा : बीएएमएस
राजनीतिक अनुभव :15 साल
कार्य : राजनीति और अपना खुद का क्लीनिक
2009 और 2014 में डाॅ. कृष्णलाल मिड्ढा के पिता डॉ. हरिचंद मिड्ढा इनेलो के टिकट पर जींद विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। 2018 में उनका निधन हो गया था। जनवरी 2019 में हुए विधानसभा उपचुनाव के समय डॉ. कृष्णलाल मिड्ढा भाजपा में शामिल हो गए और जींद से विधायक बने। अक्तूबर 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में फिर से वह जींद विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते। अब 2024 के विधानसभा चुनाव में उनको भाजपा से टिकट मिला है।
टिकट मिलने का कारण : भाजपा ने जींद से भाजपा से लगातार दो बार के विधायक डॉक्टर कृष्ण लाल मिड्ढा को टिकट दिया है। डॉक्टर मिड्ढा 2019 में उपचुनाव भी जीते थे और 2019 के आम चुनाव में भी जीते थे, इसी कारण टिकट दिया गया है।
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रामकुमार गौतम।
- फोटो : संवाद
रामकुमार गौतम
भाजपा ने जींद जिले की पांच विधानसभा सीटों में से तीन पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। इनमें जींद से डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा, उचाना से देवेंद्र चतुर्भुज अत्री तथा सफीदों से रामकुमार गौतम हैं।
सफीदों के लोगों ने हमेशा ही बाहरी उम्मीदवार को कभी भी तव्वजो नहीं दी। भाजपा की टिकट की आस लगाए बैठे पूर्वमंत्री बच्चन सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वह सात सितंबर को नामांकन दाखिल करेंगे और बाहरी उम्मीदवार को किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा।
एक सितंबर को भाजपा में शामिल हुए थे गौतम
नारनौंद निवासी रामकुमार गौतम ब्राह्मण समुदाय से हैं। वह एक सितंबर को जींद में हुई भाजपा की जन आशीर्वाद रैली में ही भाजपा में शामिल हुए थे। रामकुमार गौतम नारनौंद से 2019 में जजपा के टिकट पर विधायक बने थे। उन्होंने भाजपा के ही कैप्टन अभिमन्यु को हराया था। अब भाजपा ने उनको सफीदों विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतार दिया है। अब देखना होगा कि भाजपा यहां पर बागियों को कैसे संतुष्ट कर पाती है या फिर रामकुमार गौतम को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। सफीदों विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण समुदाय की लगभग 15 हजार वोट हैं।
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देवेंद्र चतुर्भुज अत्री।
- फोटो : संवाद
उचाना कलां
नाम : देवेंद्र चतुर्भुज अत्री
विधानसभा क्षेत्र : उचाना कलां
पार्टी : भाजपा
उम्र : 45
शिक्षा : स्नातकोत्तर
कार्य : राजनीति के साथ-साथ खुद का स्कूल चलाते हैं
राजनीतिक अनुभव : 2011 से शुरुआत
देवेंद्र चतुर्भुज अत्री के पिता स्व. चतुर्भुज अत्री का नाम एक समाजसेवी के रूप में जाना जाता है। वह इनेलो के वरिष्ठ नेता रहे हैं। 2011 में देवेंद्र चतुर्भुज अत्री ने भी इनेलो जॉइन कर ली थी। 2012 में इनेलो ने उनको जिला प्रेस प्रवक्ता बना दिया। इसके बाद उन्होंने इनेलो को अलविदा कह दिया। 30 अप्रैल 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहसून गांव में उनके निवास पर भोजन किया था और देवेंद्र चतुर्भुज अत्री भाजपा में शामिल हो गए। फिलहाल वह भाजपा के जिला महामंत्री भी हैं। देवेंद्र चतुर्भुज अत्री कहसून गांव में एक निजी स्कूल भी चलाते हैं।
टिकट मिलने का कारण : देवेंद्र चतुर्भुज अत्री नए चेहरे हैं और वह उचाना विधानसभा क्षेत्र में अकेले ही भाजपा के टिकट के दावेदार थे। उनसे मजबूत उम्मीदवार भाजपा को उचाना में कोई नहीं दिखाई दिया।
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डाॅ. अभय सिंह यादव
- फोटो : संवाद
विधानसभा क्षेत्र : नांगल चौधरी
नाम : डॉ. अभय सिंह यादव
पार्टी : भाजपा
शिक्षा : एमए, एलएलएम व पीएचडी (लॉ)
राजनीतिक अनुभव :10 साल
फरवरी 2014 में अपनी स्वेच्छा से सेवानिवृत्त हुए, इसके बाद 2014 पहली बार विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वर्ष 2019 में दोबारा से विधायक चुने गए और नायब सैनी की सरकार में सिंचाई मंत्री बने। अब भाजपा ने तीसरी बार डॉक्टर अभय सिंह यादव को उम्मीदवार घोषित किया है।
टिकट मिलने का कारण : भाजपा से लगातार दो बार विधायक रहे। नायब सैनी की सरकार में सिंचाई मंत्री। 2020-21 में सर्वश्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार मिला। नांगल चौधरी में नहर में टेल के गांवों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया।
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आरती राव
- फोटो : संवाद
विधानसभा क्षेत्र : अटेली
नाम : आरती राव।
पार्टी : भाजपा
उम्र : 45
शिक्षा : एमए, एलएलबी
राजनीतिक अनुभव : 10 साल
सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना, पिता केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के साथ राजनीतिक मंच पर भी भागीदारी निभाई। आरती राव शूटिंग में तीन बार नेशनल चैंपियन रहीं। पिछले एक दशक से राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके पिता राव इंद्रजीत सिंह वर्तमान में भाजपा सरकार में केन्द्रीय मंत्री हैं।
टिकट मिलने का कारण : केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की बेटी होने का फायदा मिला।
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लक्ष्मण सिंह यादव
- फोटो : संवाद
रेवाड़ी विधानसभा क्षेत्र : लक्ष्मण सिंह यादव
जन्म: 4 फरवरी 1961
शिक्षा: बीए
राजनीति: 2005 में विधानसभा चुनाव हारे थे, 2019 में जीते
कोसली के मौजूदा विधायक लक्ष्मण सिंह यादव को रेवाड़ी विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। 2019 विधानसभा चुनाव में लक्ष्मण सिंह यादव को कोसली से 78,813 वोट मिले थे। 2003 से वह संघ के सक्रिय सदस्य हैं। 2005 में उन्होंने साल्हावास विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, तीसरे स्थान पर रहे थे। 2010 से 2013 तक जिला अध्यक्ष रेवाड़ी का भी उन्होंने कार्यभार संभाला। 2014 में भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य रहे। 2019 में भाजपा के टिकट से कोसली से विधानसभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी।
टिकट मिलने का कारण : कांग्रेस के विधायक चिरंजीव राव के सामने मजबूत प्रत्याशी।
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अनिल डहीना
- फोटो : संवाद
विधानसभा क्षेत्र कोसली
उम्र :48
शिक्षा: बीए
राजनीति : दो बार जिला परिषद का चुनाव लड़ चुके एक में जीत मिली।
अनिल डहीना पहली बार विधायक का चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले अनिल दो बार जिला पार्षद का चुनाव लड़ चुके हैं। 2016 में उन्होंने जिला पार्षद के चुनाव में जीत हासिल की थी। 2022 में भी वह जिला पार्षद का चुनाव लड़े थे, मगर हार गए थे। अनिल केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के खास समर्थक माने जाते हैं।
टिकट मिलने का कारण : केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के खास समर्थक माने जाते हैं।
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मेयर निखिल मदान।
- फोटो : संवाद
सोनीपत विधानसभा क्षेत्र
नाम: निखिल मदान
पार्टी : भाजपा
उम्र: 34
शिक्षा: मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट
राजनीतिक अनुभव : 9 साल
मेयर निखिल मदान वर्ष 2015 में राजनीति में सक्रिय हुए थे। उसके बाद कांग्रेस के टिकट पर 30 दिसंबर 2020 को सोनीपत नगर निगम के पहले मेयर का चुनाव जीता था। इसी साल 11 जुलाई को मेयर निखिल मदान ने कांग्रेस को अलविदा कह भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी। अब भाजपा ने उन्हें सोनीपत विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा है।
टिकट मिलने का कारण : युवा पंजाबी चेहरा और नगर निगम के पहले मेयर हैं।
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डॉ. अरविंद शर्मा।
- फोटो : संवाद
गोहाना विधानसभा क्षेत्र
नाम : डाॅ. अरविंद शर्मा
पार्टी : भाजपा
उम्र : 62
गांव: एमपी माजरा, झज्जर, हरियाणा
राजनीतिक अनुभव : 28 साल
डॉ. अरविंद शर्मा ने वर्ष 1996 में सोनीपत से निर्दलीय के रूप में सांसद का चुनाव जीतकर राजनीतिक शुरू की थी। इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उन्होंने करनाल से 2009 में सांसद का चुनाव जीता था। वर्ष 2014 में वह कांग्रेस को छोड़कर बसपा में शामिल हो गए थे और उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया था। अरविंद शर्मा ने यमुनानगर और जुलाना से विधानसभा का चुनाव लड़ा था। वह दोनों सीटों पर हार गए थे। इसके बाद वह साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और रोहतक लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा। चुनाव में वह रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा को 7503 मतों से हराकर सांसद बने। 2024 का लोकसभा चुनाव रोहतक से लड़ा और 3,45,298 वोट से हार का सामना करना पड़ा।
टिकट मिलने का कारण : नॉन जाट का ध्रुवीकरण करने के लिए, यहां सबसे ज्यादा जाट मतदाता हैं।
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पवन खरखौदा।
- फोटो : संवाद
खरखौदा (सोनीपत )
नाम: पवन कुमार
पार्टी : भाजपा
उम्र 44
शिक्षा : बीए
राजनीतिक अनुभव : 11 वर्ष
पवन कुमार वर्ष 2013 में सक्रिय राजनीति में आए, कांग्रेस पार्टी से टिकट मांगा। वर्ष 2014 में टिकट नहीं मिलने पर पार्टी छोड़कर चुनाव में निर्दलीय उतरे, हार गए। इसके बाद फिर से अशोक तंवर तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की अगुवाई में कांग्रेस में आए, लेकिन 2019 के चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ दी। इसके बाद वर्ष 2019 के विधानसभा में भाजपा ने भी टिकट नहीं दिया तो जजपा का दामन थाम लिया, चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। जजपा ने भाजपा के साथ सरकार में हिस्सेदारी की तो जजपा कोटे से हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के चेयरमैन बनाए गए। जजपा के सरकार से बाहर होने के बाद लोकसभा चुनाव खत्म होने पर जजपा को भी छोड़ दिया और भाजपा में शामिल हो गए।
टिकट मिलने का कारण : खुद का वोट बैंक अधिक, 2014 में निर्दलीय से चुनाव लड़ते हुए तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं, 2019 में जजपा की टिकट पर दूसरे स्थान पर रहे थे।
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कप्तान बिरधाना
- फोटो : संवाद
झज्जर विधानसभा क्षेत्र : कप्तान सिंह बिरधाना
गांव --बिरधाना
शिक्षा-- ग्रेजुएशन
पिता-- कृष्णचंद्र
पत्नी-- राजेश
राजनीतिक सफर : कप्तान बिरधाना ने 2018 में भाजपा ज्वाॅइन की थी। इससे पहले इनेलो में थे। 2014 में कप्तान बिरधाना ने झज्जर विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। उनको 5048 वोट हासिल हुए थे। इसी योजना में भाजपा ने उनको जिला परिषद चेयरमैन पद के लिए लड़वाया था और वह चेयरमैन चुने गए थे। वह फिलहाल जिला परिषद के चेयरमैन भी हैं।
टिकट मिलने का कारण : भाजपा से जुड़े पुराने कार्यकर्ता हैं और वर्तमान में जिला परिषद के चेयरमैन हैं।
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संजय कबलाना
- फोटो : संवाद
विधानसभा क्षेत्र बेरी
नाम- संजय कुमार
गांव -कबलाना
उम्र-48
शिक्षा- 12वीं
पिता का नाम- ओमप्रकाश
पत्नी का नाम-मधु देवी
राजनीतिक सफर- संजय कबलाना ने दो दिन पहले ही भाजपा का दामन थामा था। संजय कबलाना ने राजनीति भाजपा से शुरू हुई थी और बादली हलके से 2009 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उन्होंने 12,495 वोट लेकर तीसरा स्थान हासिल किया था। इसके बाद वह आईएनएलडी में शामिल हो गए थे और हलका अध्यक्ष रहे। उसके बाद जजपा में शामिल होकर 2019 में जजपा से बादली हलके से चुनाव लड़ा और 28,089 वोट लेकर तीसरा स्थान पाया। जजपा में संजय कबलाना ने जिला अध्यक्ष, जजपा प्रदेश पंचायत सेल के अध्यक्ष रहे। दो माह पहले ही संजय ने जजपा के सभी पदों से इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ दी थी। संजय के बिना ओमप्रकाश पूर्व चेयरमैन भी रहे हैं।
टिकट मिलने का कारण : पूर्व कृषि मंत्री ओपी धनखड़ के करीबी हैं। झज्जर और बादली क्षेत्र में काफी प्रभाव है।
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दीपक हुड्डा
- फोटो : deepak_hooda_kabaddi
महम (रोहतक) विधानसभा क्षेत्र
नाम : दीपक हुड्डा
पार्टी : भाजपा
उम्र : 30
शिक्षा : एमए
राजनीतिक अनुभव : 8 माह से पार्टी में।
कार्य : खिलाड़ी व भाजपा कार्यकर्ता
भारतीय पुरुष कबड्डी टीम के पूर्व कप्तान दीपक निवास हुड्डा मूलरूप से चमारिया गांव के रहने वाले हैं। ऑल राउंडर भारतीय कबड्डी सर्किट में कई वर्षों तक दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में बने रहे। प्रो कबड्डी लीग में जयपुर पिंक पैंथर्स के लिए खेलते रहे हैं। इनका जन्म 10 जून 1994 को किसान परिवार में हुआ। इन्होंने 15 साल की उम्र में कबड्डी खेलना शुरू किया। उस समय वे 12वीं कक्षा में पढ़ रहे थे। पिता के निधन के बाद अपने खेतों में काम करने के साथ अंशकालिक शिक्षक के रूप में काम किया। पत्नी स्वीटी बूरा अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर हैं।
टिकट मिलने का कारण : अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी व युवा चेहरा।
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मंजू हुड्डा।
- फोटो : संवाद
गढ़ी सांपला किलोई क्षेत्र
फोटो कैप्शन 04सीटीके 38
नाम : मंजू हुड्डा
पार्टी : भाजपा
उम्र : 35
शिक्षा : डबल एमए, पीएचडी अंतिम वर्ष कार्य : जिला परिषद चेयरपर्सन
मंजू हुड्डा गुरुग्राम की रहने वाली हैं, जिनके स्व. पिता प्रदीप यादव हरियाणा पुलिस में डीएसपी रहे। 2021 में मंजू हुड्डा ने गढ़ी सांपला-किलोई हलके के गांव धामड़ निवासी राजेश हुड्डा से शादी की। अक्तूबर 2022 में मंजू हुड्डा पहली बार राजनीति में उतरीं और जिला परिषद के वार्ड नंबर 5 से पार्षद बनीं, साथ ही जनवरी 2023 में जिला परिषद की सर्वसम्मति से चेयरमैन चुनी गई और भाजपा में शामिल हो गई। मंजू का परिवार पहले कभी राजनीति में नहीं रहा। वर्तमान में भाजपा की जिला परिषद की चेयरपर्सन हैं।
टिकट मिलने का कारण : भाजपा के पूर्व प्रत्याशी सतीश नांदल का चुनाव लड़ने से इन्कार और मंजू हुड्डा महिला युवा चेहरा।
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रेणु डाबला
- फोटो : संवाद
कलानौर विधानसभा क्षेत्र
नाम : रेणु डाबला
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पार्टी : भाजपा
उम्र : 36
शिक्षा : नर्सिंग, एमएससी मैथ, बीएड व एलएलएम
राजनीतिक अनुभव : 12 साल
कार्य : भाजपा प्रदेश सचिव
रेणु डाबला महम चौबीसी के गांव मोखरा की बेटी हैं। उनकी शादी कांग्रेस के स्थानीय विधायक भारत भूषण बतरा के करीब रहे आजाद डाबला के बेटे संदीप डाबला से हुई है। डाबला परिवार शहर की हनुमान कॉलोनी में रहता है। 2013 में रेणु डाबला ने एएनएम की सरकारी नौकरी छोड़कर नगर निगम पार्षद का चुनाव लड़ा और पहली बार में ही जीतकर कांग्रेस की तरफ से नगर निगम की पहली मेयर बनीं। 2019 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं। वह लंबे समय से कलानौर हलके में सक्रिय थीं, साथ ही संगठन में उनका कद बढ़ता गया। वर्तमान में वह भाजपा की प्रदेश सचिव और भिवानी जिले की प्रभारी हैं।
टिकट मिलने का कारण : भाजपा का दलित युवा चेहरा व संगठन में सक्रियता।
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ओमप्रकाश धनखड़
- फोटो : संवाद
विधानसभा क्षेत्र : बादली
नाम: ओमप्रकाश धनखड़
पिता का नाम: मोहब्बत सिंह
माता के नाम: छोटो देवी
पत्नी के नाम: निरुपमा धनखड़
जन्म: पहली जुलाई, 1961
विधानसभा: बादली
पार्टी: भाजपा
शिक्षा: एमए, एमएड
प्राथमिक व्यवसाय: लेक्चरार
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय सचिव, किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हरियाणा सरकार में मंत्री। 2009 में दादरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। 2014 में रोहतक लोकसभा सीट से चुना लड़ा, लेकिन हार गए। 2014 में बादली विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधायक बने और 2019 में बादली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।
टिकट मिलने का कारण : बादली विधानसभा क्षेत्र में पैतृक गांव ढाकला। 2014 में बादली क्षेत्र से ही भाजपा के विधायक रहे।
विधानसभा क्षेत्र बहादुरगढ़
16. नाम : दिनेश कौशिक, पूर्व विधायक नरेश कौशिक के भाई
पिता का नाम : स्व. रामकरण कौशिक
माता : स्व. चंद्रो देवी
जन्म : 22 मार्च 1970
विधानसभा : बहादुरगढ़
पार्टी : भाजपा
शिक्षा : मैट्रिक पास
राजनीतिक अनुभव : 11 वर्ष ( 9 जुलाई 2013 को भाजपा राष्ट्रीय कार्यालय नई दिल्ली में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की) कार्य : सामाजिक कार्यों में रुचि
टिकट मिलने का कारण : बहादुरगढ़ से टिकट की दौड़ में शुरुआत से ही थे। टिकट मिलने का कारण समाजसेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेना है।