रेवाड़ी में लोको शेड में चल रहा सबसे पुराना और सबसे हल्का फेयरी क्वीन इंजन। लोको शेड में खड़ा स्टीम इंजन आजाद।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी के स्टीम इंजन 20 के करीब फिल्मों में आ चुके हैं काम
1. गदर एक प्रेम कथा वर्ष 2000 में बनी थी
2. वृत्त चित्र(टेली फिल्म) वर्ष 2004 में बनी थी।
3. गांधी माय फादर वर्ष 2005 में बनी थी।
4. रंग दे बसंती वर्ष 2005 में बनी थी।
5. पार्टीशन वर्ष 2005 में बनी थी।
6. गुरू वर्ष 2006 में बनी थी।
7. लव आज कल वर्ष 2008 में बनी थी।
8. वीर वर्ष 2009 में बनी थी।
9. प्रणायाम(मलयालम फिल्म ) वर्ष 2011 में बनी थी।
10. गैंग्स ऑफ वासेपुर वर्ष 2012 में बनी थी।
11. भाग मिल्खा भाग वर्ष 2012 में बनी थी।
12. स्टारिंग पोरनवी(मलयालम फिल्म) वर्ष 2013 में बनी थी।
13. एक था चन्दर, एक थी सुधा(टीवी धारावाहिक) वर्ष 2014 में बनी थी।
14. जॉनीसार वर्ष 2015 में बनी थी।
15. की एंड का वर्ष 2015 में बनी थी।
16. सुल्तान वर्ष 2016 में बनी थी।
17. करीब करीब सिंगल वर्ष 2017 में बनी थी।
18. विजय 61 (तमिल) वर्ष 2017 में बनी थी।
19. राईफल मेन जसवंत सिंह रावत वर्ष 2017 में बनी थी।
20. भारत वर्ष 2018 में बनी थी।
रेवाड़ी लोको शेड में दुनिया के सबसे पुराने और ऐतिहासिक भाप के इंजन चालू हालत में हैं। सभी इंजनों का अलग ही इतिहास है। फेयरी क्वीन देखने के लिए तो लोको शेड में विदेशी सैलानी भी आते रहते हैं। - आरएच मीणा, लोको फोरमैन, रेवाड़ी स्टीम लोको
देश का एकमात्र हैरिटेज लोकोशेड बना पर्यटकों की आकर्षण का केंद्र
रेवाड़ी में स्थित देश का एकमात्र हैरिटेज लोकोशेड पर्यटकों को खूब पसंद आ रहा है। हालांकि कोरोना में लोकोशेड की रौनक काफी पड़ गई थी। मगर कोरोना काल के थमने के बाद लोकोशेड में दूर-दूर से पर्यटक यहां के इतिहास के बारे में जानने व घूमने के लिए आ रहे है। पहले लोकोशेड में एंट्री फ्री रहती थी, लेकिन जबसे यहां ट्वॉय ट्रेन और अम्युलेटर जैसी एक्टिविटी शुरू की गई है तब से यहाँ एंट्री पर ना टिकट लगा दी है। इसका रेट भी न के बराबर है। बच्चों के लिए 5 रुपये और बड़ों के लिए दस रुपये टिकट निर्धारित किए गए हैं। लोकोशेड में फेयरी क्वीन इंजन के साथ अकबर, अंगद, सुल्तान सहित शहंशाह जैसे स्टीम इंजन पर्यटकों की आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। फेयरी क्वीन स्टीम इंजन 1853 में बना था, जिसे आज भी भारतीय रेल ने संभालकर रखा हुआ है।
रेवाड़ी लोकोशेड में एक म्यूजिम भी बनाया हुआ है. जहां भाप के इंजन की यादों को जिंदा रखा गया है. ताकि युवा पीढ़ी भारतीय रेल का शुरू से लेकर अबतक का सफ़र जान सकें। लोकोशेड के भीतर ही पर्यटकों को लुभाने के लिए टॉय ट्रेन भी चलाई जाती है। जिसका 800 मीटर का ट्रेक लगाया हुआ है। इसके आलावा लोकोशेड के अंदर ही एक ऐसी जगह बनाई गई है, जिसे देखकर आप यहीं से ही भारतीय रेल का मानचित्र देख सकते हैं कि कैसे-कैसे स्थानों पर भारतीय रेल सेवाएं दे रही है। इसके साथ ही लोकोशेड में स्टीम एम्युलेटर और कोच एम्युलेटर रूप बनाये गए हैं। जहां वर्चुअल तरीके से और थ्री-डी डिवाइस के जरिये इंजन में बैठने का अनुभव महसूस कराया जाता है। यहां पर एक डॉक्युमेंट्री के जरिये रेलवे के अबतक के सफ़र को पर्यटकों को दिखाया जाता है।