शहीद मेजर आशीष धौंचक को आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में दो गोली लगी थी, जो जांघ में लगकर दूसरी तरफ निकल गई। इसके बाद साथियों ने उन्हें वापस लाने का प्रयास किया, लेकिन वे पीछे हटने को तैयार नहीं हुए और दुश्मनों को मारकर ही वापस चलने की बात कही। इस दौरान खून अधिक बहने से उनकी स्थिति नाजुक होती गई। फिर उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए जम्मू अस्पताल लाया गया पर तब तक काफी देर हो चुकी थी। यही कारण है कि परिवार ने रक्षामंत्री से जवानों की पूरी वर्दी बुलेटप्रूफ करने की मांग उठाई है।
विदित हो कि गांव बिंझौल निवासी मेजर आशीष धौंचक 19-राष्ट्रीय राइफल अनंतनाग में तैनात थे। उनका यहां दो साल पहले ही मेरठ से तबादला हुआ था। एक सूचना के आधार पर उन्होंने कर्नल मनप्रीत और बाकी टीम के साथ सर्च अभियान शुरू किया था। तभी दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकरनाग क्षेत्र में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ हो गई।