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आफत: गोरखपुर में पहली बार मिले व्हाइट फंगस के लक्षण वाले तीन मरीज, डॉक्टरों को सता रही इस बात की चिंता

Mon, 24 May 2021 08:22 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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व्हाइट फंगस(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
कोरोना वायरस की दूसरी लहर अभी थमी है नहीं। इस बीच ब्लैक फंगस एक आफत बनकर आ गई। इसका इलाज शुरू ही हुआ कि अब व्हाइट फंगस ने गोरखपुर जिले में दस्तक दे दी है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में व्हाइट फंगस के लक्षण वाले तीन मरीज मिले हैं। तीनों मरीजों का इलाज मेडिकल कॉलेज में ही चल रहा है। शुरुआती जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है, लेकिन कन्फर्म करने के लिए कल्चर एंड सेंसटिविटी जांच के लिए नमूना लिया गया है। इसकी रिपोर्ट 72 से 96 घंटे के बीच आएगी।

जानकारी के मुताबिक अब तक जिले में केवल ब्लैक फंगस के लक्षण वाले मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी था। इसका इलाज किसी तरह शुरू हुआ कि अब व्हाइट फंगस के लक्षण वाले मरीजों ने प्रशासन की मुसीबतें बढ़ा दी है। जिन तीन मरीजों में शुरुआती व्हाइट फंगस के लक्षण मिले हैं। वह कोविड पॉजिटिव भी हैं। उनका इलाज कोविड वार्ड में चल भी रहा है। 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
डॉक्टरों को डर है कि अगर व्हाइट फंगस का संक्रमण बढ़ता है तो वह शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि एहतियात के तौर पर मरीजों की दवाएं भी शुरू कर दी गई है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि शुरुआती लक्षण में तो व्हाइट फंगस की बात सामने आई है। कल्चर एंड सेंसटिविटी जांच की जाएगी। इसके बाद बीमारी की पुष्टि हो सकेगी। इसमें तीन से चार दिन का वक्त लगेगा।
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डॉ. अमरेश सिंह - फोटो : अमर उजाला।
कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को खतरा ज्यादा
डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि कमजोर इम्युनिटी वालों को खतरा ज्यादा है। इस बीमारी को कैंडिडा भी कहते है। विशेष रूप से मधुमेह, एचआईवी मरीज या स्टेरॉयड का प्रयोग करने वाले मरीजों को खतरा ज्यादा होता है, जो खून के माध्यम से शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है। ये बीमारी म्यूकॉरमाइसाइट्स नामक फफूंद से होती है जो नाक के माध्यम से बाकी अंग में पहुंचती है। ये फंगस हवा में होता है जो सांस के जरिए नाक में जाता है। इसके अलावा शरीर के कटे हुए अंग के संपर्क में अगर ये फंगस आता है तो ये संक्रमण हो जाता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
ये हैं लक्षण
डाक्टर के अनुसार व्हाइट फंगस के लक्षणों में सिर में तेज दर्द, नाक बंद होना या नाक में पपड़ी सी जमना, उल्टियां, आंखें लाल होने के साथ सूजन आती है। अगर ज्वाइंट पर इसका असर होता है तो जोड़ों पर तेज दर्द होता है। ब्रेन पर अगर इसका असर होता है तो व्यक्ति की सोचने समझने की क्षमता पर असर दिखता है। बोलने में भी समस्या होती है। इसके अलावा शरीर में छोटे-छोटे फोड़े जो सामान्य तौर पर दर्द रहित रहते हैं। ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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बीआरडी के प्रभारी प्राचार्य डॉ. पवन प्रधान। - फोटो : अमर उजाला।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ पवन प्रधान ने बताया कि व्हाइट फंगस के लक्षण वाले तीन मरीज मिले हैं। तीनों का इलाज बीआरडी में चल रहा है। बीआरडी में ब्लैक फंगस और व्ह्वाट फंगस के इलाज की सुविधा है।
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