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एक्सक्लूसिव: जिला पंचायत वार्डों के आरक्षण ने बिगाड़ा इस दिग्गज पार्टी का चुनावी गणित, इस चुनौती को लेकर परेशान हैं नेता

Thu, 04 Mar 2021 04:34 PM IST
vivek shukla संतोष सिंह, गोरखपुर।
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यूपी पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला।
जिला पंचायत वार्डों के आरक्षण ने भाजपा का चुनावी गणित और समीकरण बिगाड़ दिया है। इससे चिंतित नेताओं का कहना है कि जो सीटें जिताऊ थीं, वह आरक्षित हो गई हैं। अब प्रत्याशी की तलाश नए सिरे से करनी पड़ेगी। आरक्षित सीट पर जीतने वाले प्रत्याशी मिलेंगे या नहीं, इस पर कुछ कह पाना संभव नहीं है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
भाजपा ने इस बार जिला पंचायत का चुनाव दमदारी से लड़ने का एलान किया है। चुनावी तैयारियां भी पूरी हैं। अलग-अलग वार्ड से जिताऊ प्रत्याशी भी तलाशे जा रहे थे। कुछ नामों पर सहमति भी बन चुकी थी। मंगलवार को आरक्षण की सूची जारी होने के बाद भाजपा नेतृत्व चिंतित हो गया। भाजपा नेता मायाशंकर शुक्ला ने सर्वाधिक वोटों से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता था। इस बार वार्ड नंबर 49 से चुनावी तैयारी में लगे थे, लेकिन यह सीट सामान्य की जगह ओबीसी के लिए आरक्षित हो गई। अब मायाशंकर चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। इस सीट से सपा युवजन सभा के जिलाध्यक्ष देवनाथ यादव चुनाव लड़ते हैं। वह पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर थे। अब मुकाबला ओबीसी प्रत्याशियों के बीच होगा। वार्ड नंबर 41 से भाजपा के निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य मनोज कुमार सिंह भी बिना चुनाव लड़े मैदान से बाहर हो गए हैं। यह सीट आरक्षित हो गई है। इस सीट से सपा से जयनाथ यादव चुनाव लड़ते रहे हैं। इस बार सामान्य वर्ग का प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं होगा। लिहाजा, जीत-हार का फैसला ओबीसी प्रत्याशियों के बीच होना है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
भाजपा के जिला उपाध्यक्ष मनोज शुक्ला वार्ड नंबर 56 से चुनावी तैयारी में थे। वह पिछला चुनाव मामूली अंतर से हारे थे। पार्टी को उम्मीद थी कि यह सीट इस बार निकल जाएगी, लेकिन आरक्षण ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया। सामान्य रहते हुए भी इस सीट से समाजवादी लोहिया वाहिनी के पूर्व प्रदेश सचिव मंतोष यादव चुनाव जीते थे। अब मुकाबला ओबीसी प्रत्याशियों के बीच होना है। जीत-हार का ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।

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पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला।
भाजपा के जिला महामंत्री सबल सिंह वार्ड नंबर 50 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन सीट ओबीसी के लिए आरक्षित हो गई है। भाजपा के महानगर मंत्री रणविजय सिंह मुन्ना व वनटांगिया गांव के निवर्तमान प्रधान वार्ड नंबर-9 से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। मतदाता सूची दुरुस्त कराने का काम भी किया था, लेकिन यह वार्ड एससी के लिए आरक्षित हो गया। अब रणविजय सिंह मुन्ना चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। सहजनवां क्षेत्र से भाजपा नेता परशुराम शुक्ला के बेटे संजय शुक्ला वार्ड नंबर 24 से टिकट मांग रहे थे। यह वार्ड भी आरक्षित हो गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
सपा को राहत देने वाला आरक्षण
आरक्षण की जो सूची जारी हुई है, वह सपा को राहत देने वाली है। निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष गीतांजलि यादव की सीट का आरक्षण नहीं बदला है। यह सीट ओबीसी के लिए ही आरक्षित है। इसी तरह मंतोष यादव जिस सामान्य सीट से चुनाव जीते थे, वह ओबीसी के लिए आरक्षित हो गई है। अब मंतोष दोबारा इसी सीट से चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।
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पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला
भाजपा जिलाध्यक्ष का गांव ओबीसी बहुल, एससी के लिए आरक्षित
ग्राम पंचायतों के आरक्षण में भी भाजपा को झटका लगा है। जानकारी के मुताबिक, भाजपा जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह सैंथवार का गांव ओबीसी बहुल है। एससी का एक परिवार है। इसके बावजूद सहजनवां तहसील क्षेत्र का बीड़ार गांव एससी के लिए आरक्षित कर दिया गया। 
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पंचायत चुनाव। - फोटो : amar ujala
कुरावल ग्राम पंचायत के आरक्षण पर भी सवाल
बेलघाट विकास खंड की कुरावल ग्राम पंचायत का आरक्षण भी सवालों के घेरे में है। इस पर आपत्ति भी दाखिल की जा रही है। आपत्ति के मुताबिक 2015 में कुरावल ग्राम पंचायत ओबीसी के लिए आरक्षित थी। 2015 में एससी ग्राम प्रधान हुआ। इस बार सामान्य होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सीट फिर ओबीसी के लिए आरक्षित कर दी गई है।
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