महिला का दूसरी बार ऑपरेशन कर संक्रमित हिस्से को काट कर निकाला गया। महाराजगंज की महिला के आंख और नाक में फैल गया था संक्रमण। शहर के रहने वाले एक व्यक्ति का भी हुआ ऑपरेशन।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में ब्लैक फंगस से जूझ रही महिला का दूसरी बार बड़ा ऑपरेशन करना पड़ा है। ऑपरेशन के बाद महिला के फंगस से संक्रमित अंग में इंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन लगाया गया। इसके अलावा शहर के गीता वाटिका के रहने वाले एक व्यक्ति का भी ऑपरेशन डॉक्टरों ने किया है। दोनों मरीज डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
जानकारी के मुताबिक गीता वाटिका निवासी 52 वर्षीय व्यक्ति 23 अप्रैल को कोविड पॉजिटिव पाए गए थे। चार मई को वह बीआरडी से ठीक होकर घर गए। इस बीच कुछ दिनों बाद तबीयत बिगड़ी तो आंखों से धुंधला दिखाई देने लगा। नाक सूख गई। नाक से काले रंग का स्राव होने लगा। परिजन बीआरडी में पोस्ट कोविड ओपीडी में लेकर आए।
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ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
जांच में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई तो 30 मई को भर्ती कर दिया गया। बुधवार को ऑपरेशन कर फंगस निकाल दिया गया है। वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज 24 मई को महराजगंज की महिला भर्ती हुई थी। महरागंज में एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था।
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ब्लैक फंगस
- फोटो : अमर उजाला
फंगस के लक्षण होने पर उसकी जांच की गई तो ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई। बीआरडी में भर्ती होने के दौरान महिला की नाक से लेकर आंख तक का हिस्सा संक्रमित हो गया था। 26 मई को डॉक्टरों ने छोटा ऑपरेशन किया था। लेकिन ऑपरेशन के बाद भी संक्रमण बढ़ रहा था।
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ब्लैक फंगस का ऑपरेशन करते चिकित्सक।
- फोटो : अमर उजाला।
इस पर ब्लैक फंगस के नोडल अधिकारी डॉ. रामकुमार जायसवाल ने डॉ आशुतोष, ईएनटी की टीम के विभागाध्यक्ष डॉ आरएन यादव, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पीएन सिंह और डॉ. वेद प्रकाश उपाध्याय के साथ मिलकर ऑपरेशन किया। ऑपरेशन करीब डेढ़ घंटे चला। इस दौरान सबसे पहले की ईएनटी की टीम ने नाक और आंख के संक्रमित हिस्से को काट कर अलग कर दिया। इसके बाद नेत्र रोग विभाग की टीम ने आंख के संक्रमित हिस्से को काट कर अलग किया।
संक्रमित हिस्सों को काट कर अलग करने के बाद उस हिस्से पर एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन लगाया गया। डॉ रामकुमार ने बताया कि महिला की हालत अब ठीक है। उसकी निगरानी की जा रही है। नए मरीज नहीं आए हैं। 15 मरीजों का इलाज चल रहा है।