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तस्वीरें: तीन सौ साल पहले यहां हुआ था मंदिर का निर्माण, अब खंडहर में विराजमान हैं ठाकुर जी महाराज

Mon, 05 Jul 2021 01:52 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया।
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ठाकुर जी महाराज। - फोटो : अमर उजाला।
देवरिया जिले के कपरवार पश्चिमपुरा टोला स्थित प्राचीन भवन में ठाकुर जी महाराज विराजमान हैं। करीब 300 साल पुराना मंदिर खंडहर में तब्दील हो गया है। इसके जीर्णोद्धार के लिए भगीरथ की दरकार है। ठाकुरद्वारा में आज भी दोनों वक्त गांव के लोग भोग लगाते हैं।

राप्ती और सरयू नदी के संगम तट पर बसे आदर्श ग्राम कपरवार की आबादी करीब 15 हजार है। यहां सभी जाति-धर्म के लोग रहते हैं। पश्चिमपुरा में सुदामा ओझा के घर के निकट ठाकुरद्वारा है। जो करीब 300 सौ वर्ष पुराना बताया जाता है। ठाकुरद्वारा में आज भी गांव के लोगों द्वारा सुबह-शाम भगवान को रोजाना भोग लगाने की परंपरा है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें....

गांव के उदय प्रताप सिंह, देवेश सिंह, ओमप्रकाश पांडेय, पूर्व प्रधान हनुमान गुप्त, ज्ञानेश्वर सिंह आदि का कहना है कि गांव में आयोजित होने वाली रामलीला की शुरुआत ठाकुर जी के दर्शन और पूजा-अर्चन से होती है।

 
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ठाकुर जी महाराज। - फोटो : अमर उजाला।
लोगों का कहना है कि गांव के ही बुलाकी साहू बांग्लादेश समेत अन्य देशों से नदी के रास्ते गल्ले का व्यापार करते थे। बताया जाता है कि एक दिन में व्यापार में भारी मुनाफा होने पर उन्होंने ठाकुरद्वारा मंदिर का निर्माण कराया था।

 
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ठाकुर जी महाराज। - फोटो : अमर उजाला।
ठाकुरद्वारा में स्थापित भगवान की मूर्तियां दुर्लभ पत्थरों की बताई जाती हैं। ठाकुर जी का भवन जर्जर हाल में है। बरसात में भवन का कुछ हिस्सा गिर भी गया है।

 

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ठाकुर जी महाराज। - फोटो : अमर उजाला।
होली पर्व पर निकाली जाती थी शोभायात्रा
पूर्व में होली त्योहार पर ठाकुर जी की सुंदर झांकी निकाली जाती थी। दर्शनोें के लिए लोगों की भीड़ जुटती थी। हर दरवाजे पर श्रद्धालु पूजा-अर्चन के साथ अबीर-गुलाल चढ़ाते थे।

 
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ठाकुर जी महाराज। - फोटो : अमर उजाला।
लोगों का कहना है कि होली के दिन ठाकुर जी की निकाली जाने वाली झांकी के कारण लोग मांस-मदिरा के सेवन से बचते थे। लेकिन त्योहार के विकृत रूप धारण कर लेने से पिछले कुछ वर्षों से शोभायात्रा पर विराम लग गया है।
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