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तामेश्वर नाथ मेला: अब मेले में नहीं दिखते नक्काशीदार दरवाजे, गायब हो रही ये प्रथा

Thu, 18 Mar 2021 01:43 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, संतकबीरनगर।
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Baba tameshwar nath - फोटो : अमर उजाला।
इस बदलते दौर में उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले के तामेश्वरनाथ मेले में भी कई तब्दीलियां देखी गईं। नब्बे के दशक तक घरों में नक्काशीदार लकड़ी के दरवाजे और किवाड़ों को लगवाना लोगों का शौक था। उस दौरान जिले के लोगों को अपने नए मकान में दरवाजों और किवाड़ों की खरीदारी के लिए तामेश्वरनाथ मेले का इंतजार रहता था।
 
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दरवाजा। - फोटो : अमर उजाला।
वक्त बदला तो अब लकड़ी के दरवाजों की जगह प्लाईवुड, सीमेंट और लोहे ने ले ली। इसकी वजह से तामेश्वरनाथ मेले से वे नक्काशीदार दरवाजे और किवाड़ गायब हो गए।

 
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Baba tameshwar nath - फोटो : अमर उजाला।
हरिहरपुर निवासी अनिमेश पांडेय, रामभरोस पांडेय, तामेश्वरनाथ के बुजुर्ग बलदेव भारती और प्रधानाचार्य कृष्णदेव भारती ने मेले की पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1990 के आसपास तामेश्वरनाथ मेले में लकड़ी के बने नक्काशीदार दरवाजे और किवाड़ों के खरीदार जिले के बाहर से भी आते थे।
 

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Baba tameshwar nath - फोटो : अमर उजाला।
करीब महीने भर मेले में लकड़ी के सामान, जिसमें चारपाई के लिए लकड़ी के बने सिरई, पाटी और मसहरी की बिक्री हुआ करती थी। तब बेड का प्रचलन नहीं था, लोग मसहरी खरीदना अपनी शान समझते थे। शादी विवाह के लिए लोग अपनी हैसियत के हिसाब से मसहरी और पलंग की खरीदारी करते थे।
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Baba tameshwar nath - फोटो : अमर उजाला।
जिन लोगों का नया मकान बनता था, वे लोग दरवाजा और किवाड़ खरीदने के लिए तामेश्वरनाथ मेले का इंतजार करते थे। आज मेले में लकड़ी की दुकानों पर बेड, तख्त, कुर्सी, मेज सहित अन्य सामान मौजूद हैं, लेकिन नक्काशीदार दरवाजे और किवाड़ नदारद हैं।
 
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