gorakhpur ghantaghar
- फोटो : अमर उजाला।
करीब डेढ़ लाख लोगों के बीच फूलमालाओं से लदा पंडित बिस्मिल का पार्थिव शरीर अचिरावती नदी (वर्तमान में राप्ती नदी) के तट पर ले जाया गया। जहां मां भारती के वीर सपूत का अंतिम संस्कार हुआ। घंटाघर के निर्माण की कहानी हिंदी और उर्दू भाषा में घंटाघर की दीवारों पर अंकित है। वहीं दीवार पर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की तस्वीर भी लगी है।