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जयंती विशेष: गोरखपुर की इस खास जगह पर रुकी थी बिस्मिल की शव यात्रा, देखें तस्वीरें

Thu, 11 Jun 2020 03:19 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर जिले के हिंदी बाजार स्थित घंटाघर स्वतंत्रता आंदोलन के वीर बलिदानियों की शहादत की गौरव गाथा को अपने भीतर समेटे हुए है। वर्तमान में जहां घंटाघर है वहां 1857 में पाकड़ का एक विशाल पेड़ हुआ करता था। जहां दर्जनों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को फांसी दी गई।
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गोरखपुर घंटाघर। - फोटो : अमर उजाला।
महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की शव यात्रा भी यहां रुकी थी। यहीं उनकी मां ने एक प्रेरणादायी भाषण दिया था। इस घटना के बाद से ये स्थान पूरी तरह से पंडित राम प्रसाद बिस्मिल को समर्पित हो गया था।
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gorakhpur ghantaghar - फोटो : अमर उजाला।
करीब डेढ़ लाख लोगों के बीच फूलमालाओं से लदा पंडित बिस्मिल का पार्थिव शरीर अचिरावती नदी (वर्तमान में राप्ती नदी) के तट पर ले जाया गया। जहां मां भारती के वीर सपूत का अंतिम संस्कार हुआ। घंटाघर के निर्माण की कहानी हिंदी और उर्दू भाषा में घंटाघर की दीवारों पर अंकित है। वहीं दीवार पर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की तस्वीर भी लगी है।

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गोरखपुर घंटाघर। - फोटो : अमर उजाला।
घंटाघर के निर्माण का श्रेय रायगंज के सेठ राम खेलावन और सेठ ठाकुर प्रसाद को जाता है। उन्होंने 1930 में अपने पिता सेठ चिगान साहू की याद में इसी स्थान पर एक मीनार ऊंची इमारत का निर्माण कराया जो देश के शहीदों को समर्पित है।
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गोरखपुर घंटाघर। - फोटो : अमर उजाला।
सेठ चिगान के नाम पर काफी दिनों तक इस इमारत को चिगान टावर भी कहा जाता था। इमारत पर एक घंटे वाली घड़ी लगी है, जिसकी वजह से बाद में यह इमारत घंटाघर के नाम से मशहूर हुई।
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