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पुण्यतिथि: गोरखपुर में रहकर मुंशी प्रेमचंद ने लिखी थी ये दो मशहूर कहानियां, यहां बिताया था पूरा बचपन

Thu, 08 Oct 2020 05:33 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
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मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि: मुंशी प्रेमचंद। फाइल - फोटो : अमर उजाला।
पूरे देश में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद्र की 84वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। उपन्यास एवं कहानियों के सम्राट कहे जाने वाले मुंशी प्रेमचंद का गोरखपुर से गहरा नाता रहा। उनका बचपन शहर की गलियों में बीता ही था लेकिन जब वह नौकरी के दौरान गोरखपुर आए तो शहर के बेतियाहाता स्थित निकेतन में पांच साल रहकर उन्होंने अपनी दो मशहूर कहानियां लिखी थीं। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
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मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि: प्रेमचंद्र साहित्य संस्थान, गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
1916 में गोरखपुर आए मुंशी प्रेमचंद
धनपत राय 'मुंशी प्रेमचंद' का बचपन गोरखपुर के तुर्कमानपुर मोहल्ले में ही बीता था, शिक्षा विभाग की नौकरी के दौरान उनका तबादला हुआ तो वह 1916 में गोरखपुर आए। उन्होंने बेतियाहाता स्थित मुंशी प्रेमचंद पार्क में स्थित निकेतन को अपना आशियाना बनाया।

 
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मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि: मुंशी प्रेमचंद का विद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
उसके बाद वह इस निकेतन में तबतक रहे, जब तक उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र नहीं दे दिया। त्यागपत्र देने की वजह महात्मा गांधी का वह प्रभावशाली भाषण था, जो उन्होंने 1921 में बाले मियां के मैदान में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए दिया था। त्यागपत्र देने के तीन दिन बाद ही वह निकेतन छोड़कर वाराणसी चले गए।

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मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि: इसी ईदगाह पर प्रेमचंद्र ने लिखी थी कहानी। - फोटो : अमर उजाला।
ईदगाह और नमक का दारोगा लिखी
'ईदगाह' और 'नमक का दारोगा' जैसी मशहूर कहानियां प्रेमचंद ने बेतियाहाता स्थित निकेतन में रहने के दौरान लिखी थीं। ईदगाह की पृष्ठभूमि उन्हें निकेतन के ठीक पीछे मौजूद हजरत मुबारक खां शहीद के दरगाह के सामने की ईदगाह से मिली थी तो नमक का दारोगा की पृष्ठभूमि राप्ती नदी के घाट से। निकेतन को धरोहर मानते हुए यहां पार्क विकसित कर दिया गया और उस पार्क को मुंशी जी का नाम दे दिया गया।
 
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मुंशी प्रेमचंद की पुण्यतिथि: प्रेमचंद्र पार्क गोरखपुर। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
लाइब्रेरी का हो रहा संचालन
निकेतन में मुंशी प्रेमचंद की पत्नी शिवरानी देवी की ओर से बनवाई गई प्रेमचंद की प्रतिमा उनकी याद के तौर पर मौजूद थी, जिसे 2014 में एक तत्कालीन अपर आयुक्त ने पार्क के गेट पर स्थापित करवा दिया। वर्तमान में निकेतन में प्रेमचंद साहित्य संस्थान की ओर से लाइब्रेरी का संचालन किया जाता है।

 
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