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पिता के विरोध के बाद भी बेटी ने नहीं मानी हार, अपनी मेहनत के दम पर बन गई भारतीय हैंडबॉल टीम की 'जान'

Wed, 24 Jun 2020 08:43 AM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
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Manjula pathak - फोटो : सोशल मीडिया।
अगर आप सूर्य की तरह चमकना चाहते हैं, तो पहले उसकी तरह तपना सीखो। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की यह बात पूर्वांचल की शान और भारतीय महिला हैंडबॉल टीम की कप्तान मंजुला पाठक पर खूब फबती है। तीन बार भारतीय हैंडबॉल टीम की कप्तान रहते हुए दो पदक देश को दिलाने वाली इस बेटी की संघर्षों से भरी कहानी थक कर हार मान जाने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। हैंडबॉल के लिए मैदान पर उतरी तो कपड़ों को लेकर गैरों के साथ-साथ पहला विरोध पिता का ही झेलना पड़ा। मगर इस खिलाड़ी ने अपने प्रदर्शन से सभी का मुंह बंद कर दिया और वह समाज के आइडियल है।
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Manjula pathak - फोटो : अमर उजाला।
अमर उजाला से बातचीत में मंजुला ने बताया कि एक बार ग्राउंड से लौटने के दौरान पिता ने टीशर्ट और शॉट में देखा, तो कपड़ों की वजह से खेल से दूर रहने की सलाह दी। शॉट्स और हैंडबॉल तक को जला दिया। मगर मां मंजू ने बेटी के सपने को टूटने नहीं दिया, छुपछुप कर उन्हें प्रैक्टिस के लिए भेजती रहीं। शुरूआती प्रतियोगिताओं में जब मंजुला ने पदक जीते तो पिता ने बेटी को कभी ना टोकने की कसम खाई। फिर क्या था तब से लेकर आज तक ये एनईआर की खिलाड़ी भारतीय  हैंडबॉल टीम में लगातार अपनी जगह बनाई हुई है।
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Manjula pathak - फोटो : अमर उजाला।
देखने वाले की नजर में होती है इज्जत
मंजुला ने कहा कि पूर्वांचल में रुढ़िवादिता लड़कियों का पीछा नहीं छोड़ रही है। टीशर्ट, लोअर, जींस या हाफ पैंट पहनकर प्रैक्टिस के लिए घर से निकलने को लोग अच्छा नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि देखने की नजर में इज्जत होनी चाहिए। जिस दिन ये भाव पुरुषों के मन में होगा बेटियों की राह कोई पिता नहीं रोकेगा।

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Manjula pathak - फोटो : सोशल मीडिया।
स्कूल में हैंडबॉल देख, खिलाड़ी बनने की ठानी
लार के सजांव गांव के मूल निवासी और विशुनपुर कला इंटर कॉलेज में संस्कृत विषय के शिक्षक विनोबा पाठक की तीन संतानों में इकलौती बेटी मंजुला ने बताया कि स्कूल में लड़कियों को हैंडबॉल खेलते देख उन्हें प्रेरणा मिली। कक्षा 9 की पढ़ाई के दौरान ही स्पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) लखनऊ में उनका सेलेक्शन हो गया। वर्ष 2010-14 तक यहां रहते हुए हैंडबॉल की स्टेट और नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। साल 2014 में स्पोर्ट्स कोटे से उन्हें रेलवे में नौकरी मिली। वह सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों वर्ष 2017 में  रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से भी नवाजी जा चुकी हैं।
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Manjula pathak - फोटो : अमर उजाला।
पाकिस्तान में अपनी कप्तानी में दिलाया सिल्वर
2016 में पाकिस्तान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल चैंपियनशिप में अपनी कप्तानी में ही मंजुला ने सिल्वर मेडल दिलाया है। हाल ही में सोलापुर में आयोजित अखिल भारतीय सीनियर हैंडबॉल प्रतियोगिता में इंडियन रेलवे को अपनी कप्तानी में ही गोल्ड मेडल दिलाया। पिछले वर्ष जापान में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में टीम की अगुवाई के साथ एशियन गेम्स के दौरान भी वो भारतीय टीम का सदस्य रहीं हैं। उनका सपना भारतीय हैंडबॉल टीम को शीर्ष स्थान पर काबिज करना है।
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