गोरखपुर की मिट्टी में हॉकी रची बसी है। बस खिलाड़ियों में जज्बा और सुविधाएं बढ़ें तो फिर हॉकी में यहां के खिलाड़ियों की स्टिक का जादू दिखने लगेगा। टोक्यो ओलंपिक में पुरुष हॉकी की टीम ने ब्रांज मेडल हासिल कर 41 साल से हॉकी में पदक के सूखे को खत्म किया है। वहीं पूरे देश को अब महिला हॉकी टीम से ब्रांज मेडल की उम्मीद है। गोरखपुर के भी चार खिलाड़ियों ने हॉकी में अलग-अलग समय में ओलंपिक खेलों में देश के साथ ही गोरखपुर का प्रतिनिधित्व किया है। इनके अलावा 15 से अधिक खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पूर्वांचल का नाम रोशन किया है। जो यह बताने के लिए काफी है कि हॉकी के लिहाज से गोरखपुर की धरती काफी उर्वर है।
ओलंपिक खेलों की महिला हॉकी टीम में वर्ष 1980 में प्रेम माया और रंजना गुप्ता तो वर्ष 2016 में प्रीति दुबे ओलंपिक में ने प्रतिनिधित्व किया है। मगर स्वर्ण पदक हासिल करने का गौरव वर्ष 1964 में ओलंपियन अली सईद के सिर सजा है।
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1980 ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य रहीं प्रेम माया।
- फोटो : अमर उजाला।
इनके अलावा गोरखपुर से मो आरिफ, गुलाम सरवर, जिल्लुर्रहमान, अली सईद, दिवाकर राम, पुष्पा श्रीवास्तव, रीता मिश्रा आदि खिलाड़ियों ने गोरखपुर की सरजमीं का नाम अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय फलक पर रोशन किया है। आर्य कन्या इंटर कॉलेज, एमजी इंटर कॉलेज, इस्लामियां इंटर कॉलेज, एनई रेलवे सीनियर सेकेंडरी, वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, रीजनल स्टेडियम से हॉकी का ककहरा सीखने वाले इन खिलाड़ियों ने जोश और जज्बे के दम पर अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी है।
मौजूदा हालात खिलाड़ियों के लिए संतोषजनक नहीं
हॉकी की वर्तमान स्थिति इन खिलाड़ियों के लिए बहुत संतोषजनक नहीं है। पंजाब, हरियाणा में हमेशा सरकार का फोकस खेल सुविधाओं और खिलाड़ियों पर रहा है। यही वजह है कि अभिभावक भी बच्चों को खिलाड़ी बनाने का सपना देखते हैं। मगर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले नजर डालें तो खेल सुविधाओं के विकास पर इतना ध्यान नहीं दिया गया। यही वजह रही कि उदासीनता के चलते बच्चों और अभिभावकों ने खेल से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। क्रिकेट की चकाचौंध में हॉकी कहीं गुम हो गई हैं। ऊपर से लगातार ओलंपिक में हॉकी में अपेक्षा अनुरूप परिणाम न मिलने से भी नवागत खिलाड़ियों के साथ ही खेल की शुरुआत करने वाले खिलाड़ियों का मनोबल टूट जा रहा था। वर्ष 2021 ओलंपिक में पुरुष वर्ग के हॉकी में ब्रांज मेडल हासिल करने से खिलाड़ियों को मनोबल बढ़ेगा। महिला टीम से भी पूरे देश को ब्रांज मेडल की उम्मीद है।
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1980 ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य रहीं प्रेम माया।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर की बेटी ने तराशे टोक्यो ओलंपिक के दो कोहिनूर
गोरखपुर की बेटी और कोच उत्तर मध्य रेलवे में कार्यरत पुष्पा श्रीवास्तव को भी अपनी दो खिलाड़ियों गुरजीत कौर और निशा से महिला हॉकी टीम को ब्रांच मेडल दिलाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि महिला हॉकी टीम भी अच्छा प्रदर्शन करके कांस्य पदक जीतने में सफल होगी। पुष्पा श्रीवास्तव उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज में कार्यरत हैं। उन्होंने 2016-17 में उत्तर मध्य रेलवे में कार्यरत गुरजीत कौर और निशा को प्रशिक्षण दिया है। ये दोनों ही खिलाड़ी अपने खेल और फिटनेस को लेकर बहुत ज्यादा फोकस्ड हैं। पुष्पा श्रीवास्तव ने लंबे समय तक देश के लिए हॉकी में भारत का प्रतिनिधित्व किया। अब प्रयागराज में रेलवे में हॉकी की प्रतिभाओं को निखार रही हैं।
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ओलंपिक्स हॉकी प्लेयर अर्जुना अवार्डी प्रेम माया
- फोटो : अमर उजाला।
अर्जुन अवार्डी प्रेम माया ने बताया कि भारतीय हॉकी टीम ने टोक्यो में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। 41 वर्ष बाद पदक मिलना हॉकी खिलाड़ियों के मनोबल को बढ़ाएगा। महिला हॉकी टीम से भी इतिहास रचने की उम्मीद है। गोरखपुर के खिलाड़ियों ने हॉकी में अपनी चमक बिखेरी है। जज्बा और सुविधाएं बढ़ें तो इस खेल के दोबारा स्वर्णिम दिन लौटेंगे। वर्तमान सरकार ने इस दिशा में कार्य किया है, मगर अभी और कार्य करने की जरूरत है।
वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी अली सईद ने बताया कि गोरखपुर के खिलाड़ियों ने देश का झंडा बुलंद किया है। यहां मेधा की कोई कमी नहीं है। सुविधाएं और प्रशिक्षण सुविधाओं में बढ़ोतरी हो तो खिलाड़ी अपने स्टिक का जादू बिखेरते नजर आएंगे। हॉकी टीम को 41 साल बाद पदक हासिल करने पर बधाई। आने वाले खिलाड़ियों को इससे और बेहतर करने की प्रेरणा मिलेगी।