बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि अंग्रेजों के समय देश में एक ऐसा भी रेल सफर था जिसमें नदी को पार करने के लिए स्टीमर की मदद ली जाती थी। नदी पार करने के बाद फिर से ट्रेन में बैठते थे। यह यात्रा एक किलोमीटर की होती थी। खास बात यह है कि यात्रियों को स्टीमर में भी उसी क्लास में बैठाया जाता था, जिस क्लास में उनका ट्रेन में आरक्षण होता था। दरअसल, यह यात्रा बिहार की थी। पूर्वोत्तर रेलवे का अधिकांश हिस्सा 1880 में तिरहुत स्टेट रेलवे में था। उस दौरान नदी पार करने के लिए दो बार ट्रेन पकड़नी पड़ती थी।
रेलवे के दस्तावेजों के मुताबिक, बाढ़ क्षेत्र और सुल्तानपुर घाट के बीच और बाद में मोकामा और सेमरिया घाट के बीच। तिरहुत राज्य रेलवे के पास कुछ स्टीमर थे। इसमें स्टीमर फ्लोक्स का उल्लेख किया जा सकता है। जिसे समुद्री विभाग से खरीदा गया था। ईगल नामक एक नया स्टीमर अगस्त 1880 से चलना शुरू हुआ। 1881-82 में चार स्टीमर थे, उनमें से 2 पैडल व्हील स्टीमर थे। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...