संतकबीरनगर जिले के पुलिस कप्तान के डॉक्टर होने का अनुभव पुलिस कर्मचारियों को भरपूर मिल रहा है। कोरोना संक्रमण काल में वे अपने कर्मचारियों को कप्तान नहीं वरन डॉक्टर की तरह परामर्श दे रहे हैं। यहीं वजह है कि लगातार संक्रमित हो रहे पुलिस कर्मी होम आइसोलेट रहकर कोरोना को मात दे रहे हैं। पुलिस कप्तान डॉक्टर कौस्तुभ आई सर्जन हैं। वह वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2015 तक डॉक्टरी पेशे में रहे हैं। कोरोना संक्रमण के तेजी से हो रहे फैलाव को देखते हुए उन्होनें पुलिस कर्मियों को सुरक्षित करने के लिए सबसे पहले पुलिस लाइन, पुलिस कार्यालय और थाना स्तर पर कोविड हेल्प डेस्क बनवाया। जिले में 1700 पुलिस कर्मियों में से अब 92 प्रतिशत पुलिस कर्मियों ने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली है। पंचायत चुनाव के मतगणना ड्यूटी में लगे करीब 1500 पुलिस कर्मियों को मास्क, फेस शील्ड और सैनिटाइजर दिया। पुलिस कर्मियों के लिए कोविड हेल्प डेस्क बनाया गया है, जो संक्रमित होने वाले पुलिस कर्मियों से दिन में चार बार बातचीत करके बातचीत करके उनके स्वास्थ्य की जानकारी जुटा कर डॉक्टर कौस्तुभ तक पहुंचाते हैं।
विज्ञापन
2 of 5
कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
कोरोना से बचाव के लिए शासन के जरिए निर्गत छह दवाईयों का किट बनवाया गया है, जिसे संक्रमित पुलिस कर्मियों को उपलब्ध करवाते हैं। पुलिस लाइन में ही 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनवाया है। मेंहदावल बाईपास पर यातायात कार्यालय में पब्लिक एड्रेस सिस्टम से लगातार लोगों को कोरोना से बचाव की जानकारी दिलवा रहे है। एसपी डॉक्टर कौस्तुभ बताते हैं कि पहले चरण से लेकर दूसरे चरण तक अब 119 पुलिस कर्मी संक्रमित हो चुके हैं। जिसमें से सिर्फ चार लोग संक्रमित बचे हैं, शेष सभी पुलिस कर्मी नियम का पालन करके होम आइसोलेट रहकर कोरोना को मात दे चुके हैं।
विज्ञापन
3 of 5
आरआई पंकज तिवारी
- फोटो : अमर उजाला।
एसपी के डॉक्टर होने का मिला लाभ तो कोरोना को दे दी मात
आरआई पंकज तिवारी ने बताया कि 25 अप्रैल उन्हें तेज बुखार, खांसी और गले में खरास के साथ शारीरिक कमजोरी महसूस हुई तो उन्होनें तत्काल एसपी को जानकारी दी। एसपी की सलाह से तत्काल होम आइसोलेट हो गए। 27 अप्रैल को एंटीजन जांच कराया तो पॉजिटिव आ गए। तीन दिन बाद आरटीपीसीआर की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन समस्त लक्षण विद्यमान थे। एसपी की ओर से दवाओं का किट, पल्स आक्सीमीटर, डिजिटल थर्मामीटर उपलब्ध कराया गया। मुखिया और डॉक्टर की तरह एसपी ने ध्यान दिया। यही वजह रहा कि 14 दिन में कोरोना को मात दे दिया। वैसे होली के बाद से छुट्टी नहीं गए हैं। फोन और व्हाट्सएप से पत्नी और बच्चों से बातचीत करते रहे।
4 of 5
कोतवाल मनोज कुमार पांडेय
- फोटो : अमर उजाला।
एसपी के परामर्श और नियमों का पालन करके कोरोना को हराया
शहर कोतवाल मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि 24 अप्रैल को उन्हें बुखार,खांसी और गले में खरास की दिक्कत हुई। उसके बाद वह मेंहदावल बाईपास पहुंच कर एंटीजन जांच कराए तो पॉजिटिव आ गए। इसकी सूचना तत्काल एसपी को दिए और उनके सुझाव से कोतवाली के सरकारी कमरे में होमआईसुलेट हो गए। एसपी ने मुखिया की भूमिका में उनका हौसला बढ़ाया और पल-पल की खबर लेते रहे। एसपी के स्तर से उचित मार्गदर्शन मिला। उन्हीं के सुझाएं नियमों का पालन किया और छह मई को रिपोर्ट निगेटिव आई। ढाई महीने से पत्नी और बच्चों से मुलाकात नहीं हुई है,सिर्फ फोन और ह्वाटसएप पर बातचीत कर लेते है।
डॉक्टर की तरह एसपी ने रखा ख्याल तो जीत ली कोरोना की जंग
धनघटा एसओ आर के गौतम ने बताया कि 26 अप्रैल को वह कोरोना संक्रमित हो गए। उसके बाद एसपी को सूचना दिए। एसपी की सलाह से थानाध्यक्ष के कमरे में ही आइसोलेट हो गए। एसपी की ओर से समय- समय पर उचित मार्गदर्शन दिया गया और दवाएं उपलब्ध कराई गई। सूचना पर उनकी पत्नी अनीता और डॉक्टर बिटिया रागिनी भी देखभाल के लिए आ गईं। दवाओं के सेवन और नियमों का पालन करके कोरोना की जंग जीत लिया। उन्होनें कहा कि जनपद पुलिस को एसपी के डॉक्टर होने का भरपूर लाभ मिल रहा है।