मौके पर जुटे ग्रामीण व रोते बिलखते परिजन
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स्व. सिंगासन गुप्ता के तीन पुत्रों और दो पुत्रियों में रामेश्वर गुप्ता सबसे छोटे थे। वह अपने पीछे बूढ़ी मां, पत्नी, दो बेटे और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। परिजनों ने बताया कि रामेश्वर वर्ष 1995 में बीआरओ में नियुक्त हुए थे। इस वर्ष 27 जनवरी को वह छुट्टी पर घर आए थे और 19 मार्च को ड्यूटी पर वापस जाना था लेकिन लॉकडाउन की वजह से तीन माह की छुट्टी ले ली थी।