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एक साथ सात लोगों की मौत का मंजर देख दहल उठा था पूरा इलाका, पुलिस वालों को देना पड़ा था अर्थी को कंधा

Mon, 08 Feb 2021 05:15 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, सिद्धार्थनगर।
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अंतिम संस्कार में मौजूद पुलिस व ग्रामीण।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
आज हम आपको उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के एक ऐसे दर्दनाक हादसे के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके बाद पूरे इलाके में मातम छा गया था। जिस घर में हादसे के दो दिन पहले चारों तरफ खुशियों का माहौल था, उसी घर से एक साथ सात लोगों की अर्थी निकली तो हर किसी का दिल दहल उठा था। पत्नी, बेटे और पौत्र को कंधा देते वक्त बुजुर्ग का बिलखना देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं थी। उस वक्त हर किसी के मुंह से सिर्फ एक ही बात निकल रही थी कि भगवान ऐसा दिन किसी को ना दिखाए। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए कैसे एक पल में मातम में बदल गई थी खुशियां...
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अंतिम संस्कार में मौजूद पुलिस व ग्रामीण।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
घटना नवंबर 2020 की है। जिले के रक्सेल गांव निवासी राजेंद्र के मझले बेटे मनील के दो बच्चों का मुंडन संस्कार मैरवा धाम (बिहार) में होना था। मैरवा जाने के लिए सुबह चार बजे परिवार के दस लोग कार में सवार होकर निकले थे। घर से 15 किमी दूर बढ़या गांव के पास कार पुलिया से टकराकर पलट गई।
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सड़क दुर्घटना में क्षतिग्रस्त कार व मृतका की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
टक्कर इतनी भीषण थी कि कार सवार दस लोगों में से छह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में एक बच्चे की गोरखपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में हाहाकार मच गया था। वहीं जब देर शाम गांव में मृतकों के शव पहुंचे तो देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। अंतिम संस्कार के लिए जब एक ही घर से सात लोगों की अर्थी निकली तो किसी की आखों के आंसू थम नहीं रहे थे।

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गांव में शव पहुंचते ही देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।(फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
राजेंद्र बेटे उमेश और पत्नी सावित्री को मुखाग्नि देने के बाद पौत्र हिमांशु, शिवांशु और पौत्री शिवांगी के शव को पकड़कर दहाडे़ मारकर रोने लगे थे। पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के दौरान लोगों का कलेजा फटा जा रहा था। उन्हें किस तरह सांत्वना दें लोगों को समझ में नहीं आ रहा था। 
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Siddharthnagar news - फोटो : अमर उजाला।
मासूमों का शव देखकर रो पड़े थे पुलिसकर्मी
हादसे में मरने वालों में तीन मासूम भी शामिल थे। जिनका शव निकालते समय पुलिस वाले भी भावुक हो गए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसा इतना भयानक था कि देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। वहीं पुलिस कर्मियों को ही शव को कंधा देना पड़ा था।
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