बदलते मौसम में बच्चे वायरल फीवर, इंसेफेलाइटिस, निमोनिया, डायरिया और उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल तक में ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेएसपी सिंह का कहना है कि कई वायरस हवा में घुलकर बच्चों को बीमार कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में इस मौसम में बच्चों को बचाने के साथ उनका नियमित टीकाकरण जरूर कराएं। टीका कई वायरस को खत्म कर रहा है। राहत की बात यह है कि इंसेफेलाइटिस को छोड़कर अब तक अन्य किसी बीमारी से किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है। वायरल फीवर से पीड़ित बच्चे सप्ताह भर के अंदर ठीक हो जा रहे हैं। पेश है वायरस और उनसे बचाव के लिए टीकाकरण की पूरी रिपोर्ट...
राइनो वायरस
वायरस का यह समूह बच्चों के साथ बड़ों को भी बीमार बनाता है। यह वायरस सांस की नली को प्रभावित करता है। हवा में घुला यह वायरस वायु के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। इससे रोग प्रतिरोक्षक क्षमता कम हो जाती है। इसकी वजह से बच्चे अधिक बीमार पड़ते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला।
आरएसी वायरस
यह कॉमन रेसिपेरेटरी वायरस है। इससे संक्रमित होने पर ठंड जैसे लक्षण नजर आते हैं। इससे ठीक होने में एक से दो सप्ताह का समय लगता है। यह नवजात से लेकर बड़ों तक सभी को संक्रमण की चपेट में लेता है। यह वायरस ब्रॉकोलाइटिस का मुख्य कारण है। इससे फेफड़ों में सूजन आ जाती है। समय से इलाज न होने पर निमोनिया का रूप ले लेता है, जो जानलेवा साबित होता है।
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रोटा वायरस
यह डायरिया का वायरस है और नवजात और छोटे बच्चों में ज्यादा फैलता है। इसकी चपेट में आने के बाद बच्चे उल्टी-दस्त, बुखार और पेट दर्द के शिकार हो जाते हैं। यह गदंगी, हाथ और मल के जरिए फैलता है। समय से इलाज न होने पर मरीज की स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। यह वायरस बड़ों को भी बीमार बना देता है।
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खसरा
इसे विज्ञान की भाषा में मिजिल्स भी कहा जाता है। यह वायरस जनित रोग है। इसके वायरस की चपेट में आने से बच्चों में बुखार, आंखें लाल होना, मुंह के अंदर सफेद धब्बे होना, शरीर पर लाल दाने आने की समस्या होती है। इस वायरस का टीका महिला अस्पताल से लेकर एम्स तक में उपलब्ध है। अब इसके दो डोज बच्चों को लगाई जाती है।
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एईएस
इसका पूरा नाम एक्टयू इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम है। इसे दिमागी बुखार के नाम से भी जाना जाता है। यह जापानी इंसेफेलाइटिस नामक वायरस से होने वाली बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से होती है। यह वायरस सूअरों और जलपक्षियों से भी पैदा होता है। पूर्वांचल में यह बीमारी पालतू जानवरों से भी फैल रही है। पालतू जानवरों में जू (किलनी) इसका मुख्य कारण है। इसकी वजह से बच्चे स्क्रब टाइफस की चपेट में आ रहे हैं। इस साल अब तक 123 मरीज इंसेफेलाइटिस के आ चुके हैं। इनमें नौ मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
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डॉ. भूपेंद्र शर्मा
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वायरल फीवर और ब्रॉकोलाइटिस जैसी बीमारी की चपेट में आ रहे बच्चे
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि इस मौसम में वायरल फीवर और ब्रॉकोलाइटिस जैसी बीमारी की चपेट में बच्चे ज्यादा आ रहे हैं। जिन बच्चों के इलाज में देरी हो रही है। उनकी हालत बिगड़ जा रही है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस बीमारी की चपेट में आने वाले बच्चे एक सप्ताह के अंदर ठीक हो जा रहे हैं। इन बीमारियों से बचने का एक ही उपाय है कि बच्चों को गदंगी से दूर रखें। धूप से बचाएं और नमी वाले स्थानों पर न जानें दें।
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वायरल फीवर व ब्रॉकोलाइटिस के लक्षण
कम या तेज बुखार होना। सांस लेने में परेशानी। गले में दर्द होना। खांसी आना, नाक बहना। बलगम निकलना, कमजोर होना और पैरासिटामॉल का असर कम होना।
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Hand Wash
बचाव के उपाय
धूप और नमी से बचाव करें। ताजा भोजन और शुद्ध पानी पिलाएं। घर के आसपास सफाई रखें। बार-बार हाथ धुलें। मास्क पहनें और बच्चों को बाहर आने-जाने वाले लोगों से दूर रखें।
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निमोनिया के निशुल्क टीके लगने हुए शुरू
न्यूमोकॉकल बैक्टीरिया से होने वाले निमोनिया को रोकने के लिए जिले में अगस्त माह से न्यूमोकॉकल कांजुगेट (पीसीवी) की तीनों डोज निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस टीके की प्रत्येक डोज निजी अस्पतालों में करीब 3000 रुपये की है। नियमित टीकाकरण में पहले 11 टीके निशुल्क लगाए जाते थे। लेकिन अब यह संख्या 12 कर दी गई है। मौजूदा समय में निमोनिया की चपेट में सैकड़ों बच्चे इलाज के लिए निजी अस्पतालों से लेकर सरकारी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
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बच्चों के लिए ये टीके बेहद जरूरी
जन्म के समय- बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटिस-बी
जन्म से छह सप्ताह पर- पोलियो-1, रोटा वायरस-1, आईपीवी-1, पेंटावैलेंट-1, पीसीवी-1
जन्म से 10 सप्ताह पर- पोलियो-2, रोटा वायरस-2, पेंटोवैलेंट-2
जन्म से 14 सप्ताह पर- पोलियो-3, रोटा वायरस-3, आईपीवी-3, पेंटावैलेंट-3, पीसीवी-2
नौ से 12 महीने पर- मीजेल्स-रुबैला-1, पीसीवी-बूस्टर डोज और जपानी इंसेफेलाइटिस-1
14 से 24 महीने पर- पोलियो बूस्टर डोज, मीजेल्स-रुबैला-2, डीपीटी बूस्टर-1 और जापानी इंसेफेलाइटिस-2
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि नियमित टीकाकरण अभियान जिले में चलाया जा रहा रहा है। इसमें अब निमोनिया के टीके को भी अगस्त माह से शामिल कर लिया गया है। इसके बाद से वैक्सीन की संख्या संख्या 11 से बढ़कर 12 हो गई है। अभिभावक बच्चों को नियमित टीका जरूर लगवाएं। इससे बच्चे कई बीमारियों से भी बचते हैं। नियमित टीकाकरण जिला महिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स भी चल रहा है। इसके अलावा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी बच्चों को टीके लगाए जा रहे हैं।