नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने के बाद विसर्जन में भी लोगों की आस्था दिखनी चाहिए। प्रतिमा विसर्जन के समय तालाबों में माता की प्रतिमा के साथ बुरा बर्ताव हो रहा है। उनके गहने और कपड़े निकालने के लिए जिस तरह से लोग टूट रहे हैं, यह श्रद्धा पर चोट है।
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राप्ती नदी किनारे बेकद्री में पड़े मां पर चढ़ाए गए वस्त्र पूजा के सामान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
देवी प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान श्रद्धा और आस्था के साथ खिलवाड़ से प्रबुद्ध वर्ग भी आहत है।
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मूर्ति विसर्जन
- फोटो : अमर उजाला
उनका मानना है कि जिस श्रद्धा भाव के साथ पूजा की जाती है उसी तरह अंतिम विदाई की रस्म भी होनी चाहिए।
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यह जिम्मेदारी प्रशासन के साथ आम नागरिकों की भी है। इसे समझना होगा वरना दिखावा से कोई फायदा नहीं, उपहास की वजह भी बनती है।
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ओम फिटनेस योग संस्थान के योगाचार्य धर्मेंद्र प्रजापति ने कहा कि नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने के बाद विसर्जन में भी लोगों की आस्था दिखनी चाहिए। प्रतिमा विसर्जन के समय तालाबों में माता की प्रतिमा के साथ बुरा बर्ताव हो रहा है। उनके गहने और कपड़े निकालने के लिए जिस तरह से लोग टूट रहे हैं, यह श्रद्धा पर चोट है।
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- फोटो : अमर उजाला
इस पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। तालाबों के बाहर सुरक्षा होनी चाहिए जिससे कोई भी विसर्जन के बाद तालाब के अंदर न जा सके। वहां की तस्वीरें देखकर मन बहुत विद्वेलित है। जितने लोगाें ने पूरी आस्था के साथ मां दुर्गा की पूजा की होगी वे यह देखकर बहुत दुखी होंगे।
सेवानिवृत्त आचार्य डॉ एसपी सिंह ने कहा कि जिस मनोभाव से हम नौ दिनों तक देवी प्रतिमा की पूजा करते हैं उसी मनोभाव से विसर्जन की रस्म भी होनी चाहिए। इसकी जिम्मेदारी आम नागरिकों के साथ ही प्रशासन की भी है। अब तो देवी प्रतिमा स्थापित करने में होड़ लगी है लेकिन इन सबके बीच लोग आस्था और श्रद्धा का भाव भूल जा रहे हैं। चौराहों पर प्रतिद्वंदिता साफ दिखती है, यह सरासर गलत है। विसर्जन के बाद तालाबों की अच्छी तरह से सफाई भी होनी चाहिए।