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बारूद के ढेर पर जिंदगीः रिहायशी के बीच पटाखा फैक्टरी और गोदाम... अगर विस्फोट हुआ तो मच सकती है बड़ी तबाही

Wed, 16 Oct 2024 02:42 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
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firecrackers factory - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के जंगल धूसड़ के पास रिहायशी इलाके में पटाखा फैक्टरी में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही काम करने वाले मजदूरों के पास मास्क व दस्ताने। यह हाल तब है, जब फैक्टरी में दो बार पहले भी विस्फोट हो चुका है। यही हाल शहर के कई और रिहायशी इलाकों में है, जहां सुरक्षा मानकों की जबरदस्त अनदेखी करके पटाखा फैक्टरी और गोदाम बनाए गए हैं। इससे आसपास के लोगों की जिंदगी पर खतरा मंडरा रहा है। पतली गलियों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंचने की स्थिति तक नहीं है।

जंगल धूसड़ में हसनगंज में बुढ़ऊ चाचा की फैक्टरी के नाम से यह करीब 16 वर्ष पहले खुली थी। जब यह फैक्टरी खुली थी, तब आसपास मकान नहीं थे, खेत ही थे, लेकिन धीरे-धीरे प्लाटिंग होती गई और मकान भी बनने लगे। वर्तमान समय में पटाखा फैक्टरी के 50 मीटर के दायरे में 20 से 25 मकान बन गए हैं।
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firecrackers factory - फोटो : अमर उजाला
सोमवार को फैक्टरी में मजदूर बारूद से पटाखा बना रहे थे। टीनशेड का गोदाम बनाया गया है और कैंपस में जगह-जगह मजदूर बारूद का ढेर लिए बैठे थे। बम, सुतली बम, अनार बम आदि बना रहे थे। किसी भी मजदूर ने न मास्क लगाया था और न ही ग्लब्स। सुरक्षा के नाम पर दो छोटे-छोटे अग्निशमन यंत्र रखे थे और एक ड्रम में पानी था, जबकि प्रतिदिन 25 किलो बारूद से पटाखा बनाने का लाइसेंस प्रशासन ने दिया है।

इस हिसाब से चार अग्निशमन यंत्र होने चाहिए और बोरे में जगह-जगह बालू रखा होना चाहिए। पूछने पर एक मजदूर ने बताया कि उसे अग्निशमन यंत्र चलाने नहीं आता। पिछली बार मई में जब विस्फोट हुआ था, तब भी कोई इसे चला नहीं पाया था।
 
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firecrackers factory - फोटो : अमर उजाला
शहर में बारूद के ढेर पर कई मोहल्ले
धंधेबाजों ने अभी से गोदाम में पटाखा भरना शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो तुर्कमानपुर, छोटेकाजीपुर और नखास में गोदाम बनाए गए हैं। यहां अवैध तरीके से पटाखे रखे जा रहे हैं। अगर विस्फोट हुआ तो बड़ी तबाही मच सकती है।

छोटेकाजीपुर में घनी बस्ती है। सूत्रों के मुताबिक, घोष कंपनी के रास्ते जब छोटेकाजीपुर मोहल्ले की ओर जाते हैं तो दो-तीन पुराने मकान हैं, जहां पटाखा स्टोर किया जाता है। तीन साल पहले इसी मोहल्ले में प्रशासन ने छापा मारकर भारी मात्रा में पटाखा बरामद किया था। अब वहां से दूसरी जगह गोदाम शिफ्ट कर दिया गया है। 

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firecrackers factory - फोटो : अमर उजाला
पटाखा कारोबार से जुड़े एक शख्स ने बताया कि दिवाली से सप्ताह भर पहले पटाखा गोदाम से भेजा जाता है। फैक्टरी में 25 किलो से ज्यादा पटाखा नहीं रख सकते, जांच भी वहीं होती है। ऐसे में गोदाम में अगर पटाखा स्टोर नहीं करेंगे तो सप्लाई ही नहीं दे पाएंगे। उन्होंने बताया कि नखास चौराहे के पास पटाखा बेचने वाले भी गोदाम बनाए हुए हैं। अब अगर सही से जांच की जाए तो भारी मात्रा में पटाखा बरामद हो जाएगा।

36 फैक्टरियों को मिले हैं लाइसेंस
जिले में 36 पटाखा की फैक्टरी को लाइसेंस मिला है। प्रत्येक फैक्टरी में रोजाना 25 किलो बारूद से पटाखा तैयार किया जा सकता है। इसी तरह दिवाली के पहले तीन दिनों के लिए फुटकर दुकानों का अस्थायी लाइसेंस प्रशासन जारी करेगा। प्रत्येक दुकानदार को पांच किलो बारूद से बने पटाखा रखने की अनुमति है।
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firecrackers factory - फोटो : अमर उजाला
यह है पटाखा फैक्टरी खोलने के नियम
- पटाखा फैक्टरी रिहायशी आबादी से एक किलोमीटर दूर होने चाहिए।
- बिजली के हाइटेंशन तार, ट्रांसफार्मर के आसपास फैक्टरी नहीं न हो।
- अग्निशमन यंत्र होना, आग बुझाने के लिए रेत की बाल्टी पानी की व्यवस्था होनी चाहिए
- फैक्टरी या दुकान में गैस सिलेंडर, लैंप, लालटेन, अगरबत्ती सहित ज्वलनशील पदार्थ पर पाबंदी होनी चाहिए
- मौके पर प्राथमिक उपचार, फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए।
- मजदूरों के लिए दास्ताने, स्पेशल ड्रेस, मास्क सहित अन्य सुरक्षा के उपकरण होने चाहिए।
- फैक्टरी या दुकान में दीवारों पर धूम्रपान निषेध की सूचना बोर्ड, क्रेता का नाम लिखना होगा।
- अग्निशमन विभाग और संबंधित थाना पुलिस की एनओसी के बाद ही फैक्टरी संचालित होती है

सभी फैक्ट्रियों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। कहीं भी सुरक्षा के मानक अगर पूरे नहीं मिले तो कार्रवाई होगी। अगर कोई फैक्टरी पहले रिहायशी इलाके से दूर खुली होगी और अब वहां मकान बन गए हैं तो लाइसेंस का रीन्यूअल नहीं किया जाएगा।-कृष्णा करुणेश, डीएम
 
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