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बारिश से मुसीबत: बादल घिरते ही दहशत में आ जाते हैं गोरखपुरवासी, यहां हर गली में लगा है तीन से चार फुट पानी

Wed, 08 Sep 2021 10:08 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर शहर के नकहा मोहल्ले के लोगों का कहना है कि अब आसमान में बादल घिरते ही बारिश की आशंका में वे दहशत में आ जाते हैं। रेलवे लाइन के किनारे बसे इस मोहल्ले के निचले इलाके में एक पखवारे से करीब तीन से चार फुट तक जलभराव है। जलनिकासी के लिए नगर निगम के अलावा लोगों ने खुद भी पंप लगा रखा है। लेकिन अभी तक पानी मुहल्ले से नहीं निकल पाया है।

नकहा ओवरब्रिज के बगल में नकहा नंबर एक मोहल्ले के चमनगंज, रामजानकी नगर, कौशलपुरम आदि कॉलोनियों में हर साल बारिश के महीनों में थोड़ा-बहुत जलभराव होता था, लेकिन कभी पानी घर की दहलीज तक नहीं पहुंचा था। इस साल जुलाई-अगस्त की बारिश में पानी घर के मुहाने तक पहुंच गया। उम्मीद थी कि बारिश थमते ही पानी कम हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दरअसल इस मोहल्ले का पानी गोड़धोइया नाले तक पहुंच ही नहीं पा रहा है। बारिश के पानी में नालियों का पानी मिलने से हालत और बदतर हो गया है। पानी का बहाव रुकने के चलते गंदगी ऊपर तक दिखने लगी है।

 
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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
घर तक जाने के लिए बना रखा है बांस का पुल
मोहल्ले के कई घरों के सामने चार से पांच फुट तक पानी है। लिहाजा बाहर निकलना खतरनाक है। वैकल्पिक उपाय के लिए जुगाड़ की नाव के अलावा कुछ घरों के लोगों ने बांस का पुल भी बना रखा है। हालांकि इस पुल से आवागमन भी कम खतरनाक नहीं है। क्योंकि जुगाड़ से खड़ा यह पुल कभी भी गिरकर हादसे का सबब बन सकता है।

 
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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
सड़क पर आकर पहनते हैं कपड़ा
नकहा के कई मोहल्लों में नौकरी पेशा लोग रहते हैं। इन्हें हर दिन निर्धारित समय पर ड्यूटी पर भी जाना है, लिहाजा वैकल्पिक उपाय करना ही पड़ेगा। ऐसे लोग घर से हॉफ पैंट या तौलिया लपेटकर सड़क पर आते हैं और यहां पूरा कपड़ा पहनकर ऑफिस जाते हैं। शाम को भी यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। सड़क पर ही कपड़ा बदलकर हॉफ पैंट पहनकर घर में जाते हैं।

 

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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
लोग बोले: हमारी पीड़ा कोई नहीं सुनता
महफूज अहमद ने बताया कि मोहल्ले में कभी इतना पानी हमने तो नहीं देखा। वर्ष 1998 की बाढ़ में भी ऐसी त्रासदी नहीं झेलनी पड़ी थी। नगर निगम की तरफ से कुछ जगह पंप लगाए भी गए हैं, लेकिन पानी कहीं कम होता नहीं दिख रहा। करीब पखवारे भर से घर के चारों तरफ पानी भरा है, ऐसे में कभी भी कोई हादसा हो सकता है।

रामबचन ने बताया कि घर चारों तरफ से पानी से घिरा है। तीन दिन पहले तक सड़क पर भी पानी बह रहा था, लेकिन अब कुछ कम हुआ है। हालांकि, अब भी मोहल्ले के अधिकांश घरों से निकलना मुश्किल है। शासन-प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों का दर्द सुना, लेकिन हमारी कोई सुन ही नहीं रहा। शायद किसी को ऐसा लग ही नहीं रहा है कि नकहां नंबर के लोग भी पीड़ित हैं।

 
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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
शंभूनाथ ने बताया कि हमारे मोहल्ले की सड़क पर चार से पांच फुट तक पानी भरा है। ट्यूब की जुगाड़ वाली नाव से आवागमन हो रहा है। बहुत जरूरी होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। हर वक्त हादसे का डर बना रहता है। एक पखवारे से जमा पानी अब सड़ने लगा है। इससे संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।

नकहा नंबर एक के निवासी अवधेश पांडेय ने बताया कि महानगर में बरसात से ऐसी तकलीफ आज तक नहीं देखी। घर में तो दो फुट से अधिक पानी लगा ही था, बगल के खाली जमीन में चार से पांच फुट तक पानी भर गया था। मकान गिरने का खतरा लगा तो किराए पर पंपिंगसेट लगाया। अब तक 80 हजार रुपये से अधिक का डीजल खर्च कर चुके हैं, चार मजदूर लगे हैं। फिर भी अभी पूरा पानी नहीं निकल पाया है।

 
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